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Hapur News: अस्पतालों में मिर्गी की दवा खत्म, विटामिन डी-3 की आपूर्ति भी ठप

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2024 11:00 PM IST
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Epilepsy medicines run out in hospitals, supply of Vitamin D-3 also stopped
सरकारी अस्पताल में दवा लेने के लिए लाइन में लगे मरीज।  - फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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हापुड़। जिले के सरकारी अस्पतालों में मिर्गी की दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। सर्वाधिक ओपीडी वाले गढ़ रोड सीएचसी से भी मरीज मायूस लौट रहे हैं। एक साल तक बच्चे को दी जाने वाली विटामिन डी-3 की भी किल्लत है। टीबी की दवाओं के लिए निजी बाजार का सहारा लिया जा रहा है।
बदलते मौसम में खांसी, एलर्जी के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। दवाओं के लिए काउंटरों पर मारामारी है, बहुत सी दवाओं की कमी है, जिस कारण चिकित्सक उन्हें पर्चे पर भी नहीं लिख रहे। मिर्गी के मरीज भी कम नहीं है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में इस मर्ज की दवा की नहीं आ रही।
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बृहस्पतिवार को ओपीडी में ऐसे मरीज आए, लेकिन उन्हें दवाओं के बिना ही मायूस लौटना पड़ा। बता दें कि मिर्गी के इलाज के लिए फनेटाईन सोडियम 100 एमजी और सोडियम बेलपोरेट सीरप आते हैं। इन दोनों की ही सप्लाई अस्पतालों को नहीं हो रही है।
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ऐसे बच्चे जो खाना नहीं खाते, उनको विटामिन डी-3 देना भी जरूरी है लेकिन, सरकारी अस्पतालों में इसकी भी कमी है, जिस कारण बच्चों को यह नहीं दिया जा रहा। पैरासिटामॉल और एंटीबॉयोटिक दवाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन खांसी, एलर्जी की दवाओं की डिमांड जिस तरह चल रही है, उसके अनुरूप सप्लाई बनाकर रखना भी आसान नहीं है।
1890 मरीजों को मिल रही बाजार की दवा

टीबी के मरीजों को दी जाने वाली दवाएं अब सरकारी आपूर्ति में नहीं आ रही है। विभाग बाजार से ही इनकी खरीद कर रहा है। करीब पांच लाख की दवाएं हाल ही में खरीदी गई हैं। इन मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता जरूरी है क्योंकि, पाठ्यक्रम अधूरा रहने से बीमारी गंभीर हो जाती है।
ओआरएस और ग्लूकोज की डिमांड बढ़ी

गर्मी में लू लगने और डायरिया की समस्या बढ़ी है, ऐसे में ओआरएस और ग्लूकोज की डिमांड काफी बढ़ गई है। आशाओं को भी किट दी गई हैं, साथ ही यातायात पुलिस समेत फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी, अधिकारियों को भी इनकी सप्लाई की जा रही है। अस्पतालों में एक लाख से भी अधिक पैकेट रखवाएं गए हैं।

सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी ने कहा कि मिर्गी की दवाओं की कमी नहीं है। अस्पतालों में इनकी उपलब्धता जरूरी है। फार्मेसी की जांच कर लापरवाही करने वालों से जवाब मांगा जाएगा। टीबी की दवाएं भी मरीजों को मुहैया कराई जा रही हैं।
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