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Hapur News: अनियमितता पर डीएम ने निरस्त किए शहर में होर्डिंग के टेंडर
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संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। नगर पालिका के होर्डिंग टेंडर में कई अनियमितता मिलने पर डीएम के आदेश पर पालिका के ईओ ने टेंडर निरस्त कर दिए हैं। दो फर्मों को अलग-अलग शहर में टेंडर लगाने को लेकर दो अनुमति मिली हुई है। पालिका को अपने अधिकारियों की मनमानी से लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। अनियमितताओं की जानकारी मिलने से डीएम ने जांच के आदेश दिए। जांच के बाद डीएम के आदेश पर पालिका ने दोनों कंपनियों के टेंडर तत्काल निरस्त कर दिए हैं। वहीं पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
शहर के मध्य से होकर पीडब्ल्यूडी का पुराना हाईवे निकलता है। इस गढ़-दिल्ली हाईवे पर दर्जनों होर्डिंग्स लगे हैं। इन होर्डिंग्स को ईशान इंजीनियर्स एंड बिल्डर्स और आरती इंटरप्राजेज कंपनियों द्वारा लगाया गया है। उक्त कंपनियों को टेंडर देने में मानकों का पालन नहीं किया गया। वहीं, दोनों कंपनियों से जमा कराए गए शुल्क में भी भारी अंतर है। एक कंपनी को नियमविरुद्ध साढ़े तीन साल का टेंडर जारी कर दिया गया। बड़ी बात है कि इसे एक जन प्रतिनिधि के मौखिक आदेश पर किया जाना बताया गया। जबकि दूसरी कंपनी को हाईवे के डिवाइडर पर होर्डिंग्स लगाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इसको एक न्यायिक आदेश की आड़ लेकर जारी करना बताया गया। इसका शुल्क निर्धारित का लगभग 10 प्रतिशत ही जमा कराया गया। दोनों में से किसी भी कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया पालिका की बोर्ड बैठक में स्वीकृत नहीं कराई गई।
जिले के एक पूर्ववर्ती जिलाधिकारी द्वारा इस हाईवे पर होर्डिंग्स नहीं लगवाने के आदेश जारी किए गए थे। उनके बदलने के बाद आदेशों को भी फाइल से दरकिनार कर दिया गया। अवैध रूप से होर्डिंग्स लगाने के इस खेल में पालिका के अधिकारियों, एक जनप्रतिनिधि और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर लाखों रुपये लेनदेन के आरोप लगे। उसके बाद होर्डिंग्स के टेंडर जारी करने में दोनों टेंडर कंपनियां ही आमने-सामने आ गईं। आरती इंटरप्राइजेज की ओर से डीएम को शिकायत दी गई कि ईशान कंपनी को गलत तरीके से टेंडर दिए गए हैं। साढ़े तीन साल के टेंडर जारी कर दिए गए। इसको बोर्ड से पास नहीं कराया गया। वहीं सालाना बढ़ने वाले 10 प्रतिशत शुल्क की प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया।
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शिकायत के बाद डीएम ने तलब की दोनाें टेंडरों की फाइल--
डीएम अभिषेक पांडेय ने शिकायत के बाद दोनों कंपनियों को टेंडर जारी होने की फाइल तलब कर ली। जांच में पाया गया कि दोनों ही कंपनियों को टेंडर मानकों को ताक पर रखकर दिया गया है। एक कंपनी को एक जनप्रतिनिधि के मौखिक आदेश पर साढ़े तीन साल का टेंडर जारी कर दिया गया। नगर पालिका ने यह टेंडर नियमानुसार नहीं किया। जबकि दूसरी कंपनी को एक न्यायिक आदेश का हवाला देकर आदेश जारी कर दिया गया। इस मामले की शिकायत हाईकोर्ट में भी की गई है। डीएम ने मानकों से इतर टेंडर जारी होने के चलते इनको निरस्त करने के आदेश दिए। जिला पालन करते हुए पालिका ने दोनों ही कंपनियों के टेंडर को निरस्त कर दिया है।
ईओ संजय मिश्रा ने बताया कि आरती इंटर प्राइजेज के संचालक की ओर से टेंडर को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। इस पर दोनों टेंडर को लेकर पत्रावली भेज दी गई थी। मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए पूर्व में हुए दोनों होर्डिंग के टेंडर को निरस्त करने के आदेश दिए थे। इस पर दोनों के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं।
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हापुड़। नगर पालिका के होर्डिंग टेंडर में कई अनियमितता मिलने पर डीएम के आदेश पर पालिका के ईओ ने टेंडर निरस्त कर दिए हैं। दो फर्मों को अलग-अलग शहर में टेंडर लगाने को लेकर दो अनुमति मिली हुई है। पालिका को अपने अधिकारियों की मनमानी से लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। अनियमितताओं की जानकारी मिलने से डीएम ने जांच के आदेश दिए। जांच के बाद डीएम के आदेश पर पालिका ने दोनों कंपनियों के टेंडर तत्काल निरस्त कर दिए हैं। वहीं पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
शहर के मध्य से होकर पीडब्ल्यूडी का पुराना हाईवे निकलता है। इस गढ़-दिल्ली हाईवे पर दर्जनों होर्डिंग्स लगे हैं। इन होर्डिंग्स को ईशान इंजीनियर्स एंड बिल्डर्स और आरती इंटरप्राजेज कंपनियों द्वारा लगाया गया है। उक्त कंपनियों को टेंडर देने में मानकों का पालन नहीं किया गया। वहीं, दोनों कंपनियों से जमा कराए गए शुल्क में भी भारी अंतर है। एक कंपनी को नियमविरुद्ध साढ़े तीन साल का टेंडर जारी कर दिया गया। बड़ी बात है कि इसे एक जन प्रतिनिधि के मौखिक आदेश पर किया जाना बताया गया। जबकि दूसरी कंपनी को हाईवे के डिवाइडर पर होर्डिंग्स लगाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इसको एक न्यायिक आदेश की आड़ लेकर जारी करना बताया गया। इसका शुल्क निर्धारित का लगभग 10 प्रतिशत ही जमा कराया गया। दोनों में से किसी भी कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया पालिका की बोर्ड बैठक में स्वीकृत नहीं कराई गई।
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जिले के एक पूर्ववर्ती जिलाधिकारी द्वारा इस हाईवे पर होर्डिंग्स नहीं लगवाने के आदेश जारी किए गए थे। उनके बदलने के बाद आदेशों को भी फाइल से दरकिनार कर दिया गया। अवैध रूप से होर्डिंग्स लगाने के इस खेल में पालिका के अधिकारियों, एक जनप्रतिनिधि और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर लाखों रुपये लेनदेन के आरोप लगे। उसके बाद होर्डिंग्स के टेंडर जारी करने में दोनों टेंडर कंपनियां ही आमने-सामने आ गईं। आरती इंटरप्राइजेज की ओर से डीएम को शिकायत दी गई कि ईशान कंपनी को गलत तरीके से टेंडर दिए गए हैं। साढ़े तीन साल के टेंडर जारी कर दिए गए। इसको बोर्ड से पास नहीं कराया गया। वहीं सालाना बढ़ने वाले 10 प्रतिशत शुल्क की प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया।
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शिकायत के बाद डीएम ने तलब की दोनाें टेंडरों की फाइल
डीएम अभिषेक पांडेय ने शिकायत के बाद दोनों कंपनियों को टेंडर जारी होने की फाइल तलब कर ली। जांच में पाया गया कि दोनों ही कंपनियों को टेंडर मानकों को ताक पर रखकर दिया गया है। एक कंपनी को एक जनप्रतिनिधि के मौखिक आदेश पर साढ़े तीन साल का टेंडर जारी कर दिया गया। नगर पालिका ने यह टेंडर नियमानुसार नहीं किया। जबकि दूसरी कंपनी को एक न्यायिक आदेश का हवाला देकर आदेश जारी कर दिया गया। इस मामले की शिकायत हाईकोर्ट में भी की गई है। डीएम ने मानकों से इतर टेंडर जारी होने के चलते इनको निरस्त करने के आदेश दिए। जिला पालन करते हुए पालिका ने दोनों ही कंपनियों के टेंडर को निरस्त कर दिया है।
ईओ संजय मिश्रा ने बताया कि आरती इंटर प्राइजेज के संचालक की ओर से टेंडर को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी। इस पर दोनों टेंडर को लेकर पत्रावली भेज दी गई थी। मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए पूर्व में हुए दोनों होर्डिंग के टेंडर को निरस्त करने के आदेश दिए थे। इस पर दोनों के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं।