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कोल्हू और क्रेशरों पर कसेगा शिकंजा
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Thu, 16 Feb 2017 09:02 PM IST
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क्रेशरों पर कसेगा शिकंजा
- फोटो : अमर उजाला
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हवा मे जहर घोल रहे कोल्हू और क्रेशरों पर जल्द ही शिकंजा कसेगा। एनजीटी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर कोल्हू-क्रेशरों से फैल रहे प्रदूषण की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
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वेस्टर्न यूपी के गन्ना बेल्ट में करीब पांच हजार कोल्हू-क्रेशर संचालित हैं, जिनमें हापुड़ में करीब डेढ़ हजार कोल्हू-क्रेशर वातावरण में धुएं का जहर घोल रहे हैं। जिले में 1500 से अधिक कोल्हू-क्रेशर आबादी के बीच में ही चल रहे हैं।
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गढ़, ब्रजघाट, सिंभावली, बहादुरगढ़, नानपुर, झड़ीना में ढाई सौ से अधिक कोल्हू-क्रेशरों का संचालन हो रहा है। एक कोल्हू पर प्रतिदिन औसतन सवा सौ कुंतल गन्ने की पेराई हो जाती है, जिन पर 25 से लेकर 30 हॉर्स पावर वाले डीजल इंजनों का इस्तेमाल किया जाता है।
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जहां गुड़ पकाने के लिए प्रतिदिन दस हजार कुंतल से भी अधिक खोई, पत्ती, पुआल और प्लास्टिक के अवशेष जलाए जा रहे हैं। अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वेस्टर्न यूपी में चल रहे कोल्हू-क्रेशरों का अध्ययन करने के लिए कमेटी बनाई है।
वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण सहायक इंजीनियर जेबी सिंह ने बताया कि कोल्हू-क्रेशरों से काफी प्रदूषण फैल रहा है। अभी तक इनके लिए कोई नियमावली नहीं थी। अब एनजीटी ने इनका व्यापक अध्ययन कराने को कमेटी बनाने की घोषणा की है।