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पिछली घटना को देखते हुए हरकत में आया पुलिस प्रशासन
Updated Wed, 23 May 2018 12:04 AM IST
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पुलिस ने छावनी में तब्दील किया कनिया कल्याणपुर गांव
हापुड़। गांव कनिया कल्याणपुर में मारपीट के मामले में लापरवाही बरतने वाली पुलिस एक व्यक्ति की मौत के बाद हरकत में आ गयी है। सूचना मिलते ही गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। दरअसल, यह सतर्कता वर्ष 2012 में हुई हत्या के मामले में ग्रामीणों द्वारा थाने में उपद्रव को देखते हुए बरती गयी।
वर्ष 2012 में गांव के ही दो पक्षों में विवाद के बाद ग्रामीण सुरजन सिंह की हत्या कर दी गयी थी। जिसके बाद उसके एक गवाह की भी हत्या कर दी गयी। इस मामले में ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया था। आनन फानन में बाबूगढ़ थाने में एकत्र हुए लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की थी। पुलिसकर्मियों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। जमकर पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी भी घायल हुए थे। ग्रामीणों ने थाने में आग लगाने का भी प्रयास किया। इस मामले में गांव के ही 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी।
यही कारण रहा कि मंगलवार शाम मारपीट में घायल की मौत की खबर आते ही पुलिस अधिकारी फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा के साथ निर्दोष को छोड़ने की घोषणा कर दी गयी। गांव में आने जाने वाले रास्तों पर भी पुलिस तैनात थी। अधिकारियों का पूरा फोकस इसी बात पर रहा कि किसी प्रकार ग्रामीणों का गुस्सा शांत किया जाए।
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हापुड़। गांव कनिया कल्याणपुर में मारपीट के मामले में लापरवाही बरतने वाली पुलिस एक व्यक्ति की मौत के बाद हरकत में आ गयी है। सूचना मिलते ही गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया। दरअसल, यह सतर्कता वर्ष 2012 में हुई हत्या के मामले में ग्रामीणों द्वारा थाने में उपद्रव को देखते हुए बरती गयी।
वर्ष 2012 में गांव के ही दो पक्षों में विवाद के बाद ग्रामीण सुरजन सिंह की हत्या कर दी गयी थी। जिसके बाद उसके एक गवाह की भी हत्या कर दी गयी। इस मामले में ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया था। आनन फानन में बाबूगढ़ थाने में एकत्र हुए लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की थी। पुलिसकर्मियों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। जमकर पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी भी घायल हुए थे। ग्रामीणों ने थाने में आग लगाने का भी प्रयास किया। इस मामले में गांव के ही 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी।
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यही कारण रहा कि मंगलवार शाम मारपीट में घायल की मौत की खबर आते ही पुलिस अधिकारी फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा के साथ निर्दोष को छोड़ने की घोषणा कर दी गयी। गांव में आने जाने वाले रास्तों पर भी पुलिस तैनात थी। अधिकारियों का पूरा फोकस इसी बात पर रहा कि किसी प्रकार ग्रामीणों का गुस्सा शांत किया जाए।
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