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Hapur News: मासूम बच्चे की हत्या के दोषी को आजीवन कारावास
Mon, 05 Jun 2023 10:06 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Mon, 05 Jun 2023 10:06 PM IST
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हापुड़। गढ़ के गांव सैदपुरा में करीब साढ़े पांच वर्ष पहले सात वर्षीय बच्चे के सिर पर धारदार दाव से प्रहार कर दो टुकड़े करके निर्मम हत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने सोमवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने मामले के आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मृतक मासूम सात बहनों का इकलौता भाई था। हत्या के बाद इस गरीब परिवार का चिराग बुझ गया।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि गांव सैदपुरा निवासी सतीश ने गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली में एक तहरीर दी थी। जिसमें कहा कि उसका सात वर्षीय पुत्र रवि 27 जनवरी 2018 को घर से स्कूल जा रहा था। उनके घर के पास ही बिजेंद्र पुत्र जय प्रकाश हाथ में लकड़ी काटने वाला दाव लेकर खड़ा था। जैसे ही रवि घर से बाहर निकला। तभी बिजेंद्र ने उसके सिर पर दाव से प्रहार किया। जिससे उसके सिर के दो टुकड़े हो गए और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। आरोपी उनके पुत्र की हत्या कर जंगल की तरफ भाग गया।
पुलिस ने आरोपी बिजेंद्र के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कोर्ट में चल रही थी। उनके द्वारा न्यायालय में मजबूत पैरवी की गई है। जिसके चलते उनके द्वारा अभियोजन पक्ष की तरफ से दस गवाह न्यायालय में पेश किए गए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कई बड़े साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए।
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न्यायाधीश विपिन कुमार द्वितीय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को मामले में निर्णय सुनाया। अभियुक्त बिजेंद्र को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट ने आरोपी नहीं दी थी जमानत-
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि बच्चे की निर्मम हत्या करने के मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। जिसके चलते ही कोर्ट ने आरोपी को मामले की पूरी सुनवाई के दौरान जमानत भी नहीं दी। जिससे आरोपी मामले की करीब साढ़े पांच वर्ष की सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहा है।
दोषी के चेहरे पर नहीं कोई सिकन-
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि न्यायाधीश ने दोषी बिजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिस पर उनके द्वारा दोषी से कहा कि तुम्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है। इस पर दोषी के चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी और न ही उसको सजा से कोई दहशत थी।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि गांव सैदपुरा निवासी सतीश ने गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली में एक तहरीर दी थी। जिसमें कहा कि उसका सात वर्षीय पुत्र रवि 27 जनवरी 2018 को घर से स्कूल जा रहा था। उनके घर के पास ही बिजेंद्र पुत्र जय प्रकाश हाथ में लकड़ी काटने वाला दाव लेकर खड़ा था। जैसे ही रवि घर से बाहर निकला। तभी बिजेंद्र ने उसके सिर पर दाव से प्रहार किया। जिससे उसके सिर के दो टुकड़े हो गए और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। आरोपी उनके पुत्र की हत्या कर जंगल की तरफ भाग गया।
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पुलिस ने आरोपी बिजेंद्र के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किए। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कोर्ट में चल रही थी। उनके द्वारा न्यायालय में मजबूत पैरवी की गई है। जिसके चलते उनके द्वारा अभियोजन पक्ष की तरफ से दस गवाह न्यायालय में पेश किए गए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कई बड़े साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किए।
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न्यायाधीश विपिन कुमार द्वितीय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को मामले में निर्णय सुनाया। अभियुक्त बिजेंद्र को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट ने आरोपी नहीं दी थी जमानत-
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि बच्चे की निर्मम हत्या करने के मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। जिसके चलते ही कोर्ट ने आरोपी को मामले की पूरी सुनवाई के दौरान जमानत भी नहीं दी। जिससे आरोपी मामले की करीब साढ़े पांच वर्ष की सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहा है।
दोषी के चेहरे पर नहीं कोई सिकन-
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नरेश चंद शर्मा ने बताया कि न्यायाधीश ने दोषी बिजेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिस पर उनके द्वारा दोषी से कहा कि तुम्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है। इस पर दोषी के चेहरे पर कोई सिकन नहीं थी और न ही उसको सजा से कोई दहशत थी।