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आलू पर मंदे की मार, किसान मायूस
अमर उजाला, हापुड़
Updated Wed, 23 Dec 2015 11:46 PM IST
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आलू की फसल बंपर होने से किसान जितना खुश था, उतना ही मंदे के मार झेलकर मायूस है। हालांकि अभी तक संभल क्षेत्र से कच्ची खोद के आलू की काफी आवक हो रही है।
हालांकि आसपास के क्षेत्र में भी आलू का क्षेत्रफल अधिक होने तथा मौसम अनुकूल होने से आलू की भारी पैदावार होने के संकेत है जिससे भण्डारण की समस्या उत्पन्न होने के आसार हैं।
स्थानीय सब्जी मंडी में आजकल लगभग ढाई हजार कट्टा (50 किलो भर्ती) कच्ची खोद का आलू संभल क्षेत्र से आ रहा है। यह आलू 200 से 250 रुपये कट्टा बिक रहा है।
जबकि पिछले सीजन में इन दिनों कच्ची खोद आलू 350 से 400 रुपये कट्टा बिका था। सीजन के अंत में आलू का बीज मंदा होने के कारण किसानों ने आलू का क्षेत्रफल काफी बढ़ा दिया है।
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अनुमान है कि पिछले साल के मुकाबले आलू का रकबा 25 प्रतिशत बढ़ा है। मौसम भी आलू के अनुरूप रहा है जिस कारण आलू की फसल भी अभी तक बंपर है।
मंदे की मार के कारण किसान मायूस हैं क्योंकि एक बीघा में कच्ची खोद का आलू 20 से 25 कट्टा ही निकल पाता है। इस तरह एक बीघे में लगभग 4000 रुपये का आलू निकल रहा है जबकि लागत 4 से 5 हजार रुपये बीघा की आयी है।
इससे साफ है कि किसानों को जितनी लागत लगी है, वही मुश्किल से मिल रही है जिससे लाभ तो शून्य हो गया है।
अगर आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो आलू की फसल पिछले साल के मुकाबले इस साल और बंपर होने की उम्मीद है।
ऐसे में आलू की फसल पकने पर उनके भण्डारण की समस्या के आसार अभी से बन रहे हैं। सब्जी के प्रमुख आढ़ती विजय पाल आढ़ती का कहना है कि अभी बाहर का आलू अधिक आ रहा है। स्थानीय किसानों का आलू कम आ रहा है लेकिन फसल बंपर है जिस कारण आलू के रेट गिरे हैं।
आलू के प्रमुख कारोबारी अनिल गुप्ता का कहना है कि आलू की फसल बंपर होने के कारण मंदे की मार पड़ी है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। आगे भी कोई सुधार की उम्मीद नहीं है। किसान कच्चा आलू खोदकर गेहूं बो रहे हैं। इस कारण कच्चे आलू का आवक बढ़ रही है।
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हालांकि आसपास के क्षेत्र में भी आलू का क्षेत्रफल अधिक होने तथा मौसम अनुकूल होने से आलू की भारी पैदावार होने के संकेत है जिससे भण्डारण की समस्या उत्पन्न होने के आसार हैं।
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स्थानीय सब्जी मंडी में आजकल लगभग ढाई हजार कट्टा (50 किलो भर्ती) कच्ची खोद का आलू संभल क्षेत्र से आ रहा है। यह आलू 200 से 250 रुपये कट्टा बिक रहा है।
जबकि पिछले सीजन में इन दिनों कच्ची खोद आलू 350 से 400 रुपये कट्टा बिका था। सीजन के अंत में आलू का बीज मंदा होने के कारण किसानों ने आलू का क्षेत्रफल काफी बढ़ा दिया है।
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अनुमान है कि पिछले साल के मुकाबले आलू का रकबा 25 प्रतिशत बढ़ा है। मौसम भी आलू के अनुरूप रहा है जिस कारण आलू की फसल भी अभी तक बंपर है।
मंदे की मार के कारण किसान मायूस हैं क्योंकि एक बीघा में कच्ची खोद का आलू 20 से 25 कट्टा ही निकल पाता है। इस तरह एक बीघे में लगभग 4000 रुपये का आलू निकल रहा है जबकि लागत 4 से 5 हजार रुपये बीघा की आयी है।
इससे साफ है कि किसानों को जितनी लागत लगी है, वही मुश्किल से मिल रही है जिससे लाभ तो शून्य हो गया है।
अगर आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो आलू की फसल पिछले साल के मुकाबले इस साल और बंपर होने की उम्मीद है।
ऐसे में आलू की फसल पकने पर उनके भण्डारण की समस्या के आसार अभी से बन रहे हैं। सब्जी के प्रमुख आढ़ती विजय पाल आढ़ती का कहना है कि अभी बाहर का आलू अधिक आ रहा है। स्थानीय किसानों का आलू कम आ रहा है लेकिन फसल बंपर है जिस कारण आलू के रेट गिरे हैं।
आलू के प्रमुख कारोबारी अनिल गुप्ता का कहना है कि आलू की फसल बंपर होने के कारण मंदे की मार पड़ी है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। आगे भी कोई सुधार की उम्मीद नहीं है। किसान कच्चा आलू खोदकर गेहूं बो रहे हैं। इस कारण कच्चे आलू का आवक बढ़ रही है।