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भूजल दूषित होने से वैट में कैंसर और हेपेटाइटिस का कहर
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Thu, 01 Jun 2017 09:42 PM IST
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कैंसर
- फोटो : अमर उजाला
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सिंभावली के गांव वैट का भूजल दूषित होने पर शासन ने करोड़ों की लागत से पाइपलाइन पेयजल सप्लाई का सिस्टम तो तैयार करा दिया, लेकिन अभी तक सप्लाई चालू नहीं हो पाई है। ऐसे में ग्रामीणों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
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जिससे कैंसर और हेपेटाइटिस लगातार ग्रामीणों की जिंदगी को निगल रही है। भूजल दूषित होने की पुष्टि होने के बाद शासन ने गांव में टंकी का निर्माण कराया था, जिस पर भूमिगत लाइन बिछाने समेत करीब दस करोड़ की रकम खर्च हुई है।
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टंकी निर्माण को चार माह बीतने के बाद भी पेयजल सप्लाई चालू न हो पाने से ग्रामीणों को निजी और सरकारी हैंडपंपों से निकल रहा दूषित पानी ही इस्तेमाल करना मजबूरी बनी है। दूषित पानी का इस्तेमाल होने से गांव में कैंसर और हेपेटाइटिस बीमारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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जिसने दो माह के भीतर शाहीन, इकराम, रफीक, रईस, जाहिद, इस्लाम, रुखसाना समेत एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों को मौत की नींद सुला दिया है। जबकि वर्तमान में भी गांव में महिलाओं समेत दर्जनों ग्रामीण हेपेटाइटिस बीमारी की गिरफ्त में हैं। तहसील क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा गांव होने के बाद भी वैट में स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है।
सिंभावली, गढ़ और बहादुरगढ़ क्षेत्र में जानलेवा कैंसर का सर्वाधिक कहर तीन दर्जन गांवों में फैला है। इनकी सीमा से होकर शराब फैक्ट्री, शुगर मिल और स्याना के दूध प्लांटों के दूषित पानी वाले नाले पूठ गंगा में गिर रहे हैं।
देखा जाए तो केंद्र समेत प्रदेश शासन स्तर से गंगा को साफ सुथरा बनाने के लिए बड़े स्तर पर कवायद हो रही है। इसके बाद भी गंगा में जहरीला पानी डाल रहे नालों की कोई रोकथाम नहीं हो पा रही है।
मेरठ के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.पीके शुक्ला का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी से होने वाले कैंसर की रोकथाम के लिए अब इलाज तो उपलब्ध है, लेकिन लाखों की रकम खर्च होने से गरीब तबके की पहुंच से बाहर है।
सीएमओ डॉ.एके सिंह का कहना है कि भूजल के जहरीले तत्वों की जांच कराने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग की बजाए जल निगम का है। अगर किसी गांव में बीमारी फैल रही है, तो वहां टीम भेजकर रोगियों की जांच और इलाज कराया जाएगा।