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सात समुंदर पार से गढ़ आए ‘विदेशी मेहमान’

Wed, 06 Jan 2016 10:50 PM IST
अमर उजाला, गढ़
अमर उजाला, गढ़ Updated Wed, 06 Jan 2016 10:50 PM IST
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Birds came in garh.
 ब्रजघाट में साइबेयिन पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। ये विदेशी मेहमान हर साल हजारों मील लंबा सफर कर यहां आते हैं। इनके आने का क्रम दिवाली के बाद से ही शुरू हो जाता है लेकिन इस बार ये देर से आए हैं।
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उधर, इन रंग बिरंगे पक्षियों की एक झलक देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग ब्रजघाट गंगा किनारे पहुंच रहे हैं।
 

  बता दें कि सोवियत रूस का साइबेरिया क्षेत्र विश्व में सबसे ठंडा इलाका माना जाता है, जहां सर्दी के मौसम में नदी, पोखर, तालाब और झील समेत सभी जलाशयों पर बर्फ की मोटी परत जम जाती है।
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 इसके चलते इन जलाशयों में रहने वाले सुरखाब, डच, चहा, मुर्गाबी, स्ट्रेन, सारस जैसे कई प्रजातीय पक्षियों को प्रतिवर्ष हजारों मील लंबी उड़ान भरकर भारत समेत उपमहाद्वीप से जुडें देशों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ता है।
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मध्य दिसंबर में भारत समेत आसपास के देशों में पहुंचने वाले ये मेहमान पक्षी होली दहन होने के बाद मौसम में बदलाव प्रारंभ होते ही वापसी की उड़ान भरने लगते हैं।

इन दिनों यूरोप समेत विश्व के अधिकांश देशों में बर्फबारी और ठिठुरती सर्दी का प्रकोप फैला हुआ है। वहीं ये मेहमान पक्षी इन सब से दूर होकर ब्रजघाट गंगा में अठखेलियां करने में मस्त हैं।


 --गंगा प्रदूषण के चलते घट रही संख्या
करीब चार दशक पहले तक क्षेत्र में मेहमान पक्षियों की भरमार रहती थी, जिसमें प्रतिवर्ष गिरावट हो रही है। साइबेरियन पक्षियों की तेजी के साथ घट रही संख्या के लिए गंगा में गिर रहा फैक्ट्रियों का दूषित और शहर-कस्बों के कचरे से जुड़ा गंदा पानी सबसे अहम वजह मानी जा रही है।

 पर्यावरणविद् प्रो.अब्बास अली ने बताया  कि साइबेरियन प्रजाति के कई पक्षी सर्दी के मौसम में भारत समेत आसपास के देशों में आकर अंडे भी देते हैं। जिनसे पैदा होने वाले चूजों को गर्मी के मौसम में साथ लेकर अपने वतन को उड़ जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के भीतर गंगा में तेजी के साथ प्रदूषण बढ़ा है।


 जिससे  इन पक्षियों का क्षेत्र से मोह भंग होने के साथ ही भरतपुर वर्ड सेंचुरी समेत दूसरे स्थानों के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है।

 सुरक्षित स्थानों की तरफ भर रहे उड़ान  
 जानकारों का कहना है कि मेहमान पक्षी बेहद चालाक और चतुर प्रवृत्ति वाले होते हैं, जो शिकारियों के हाथों मारे जाने से बचने के लिए ब्रजघाट गंगा समेत राजस्थान के भरतपुर की बर्ड सेंचुरी को सर्वाधिक महफूज स्थान मानने लगे हैं।
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