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32 पशु अस्पतालों में से 24 को चिकित्सकों का इंतजार
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Sat, 25 Feb 2017 09:51 PM IST
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पशु अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदेश सरकार भले ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कामधेनु जैसी योजनाएं चलाकर पशु पालकों का हौसला बढ़ा रही है। वहीं, पशुपालन विभाग ही ऐसी योजनाओं को पलीता लगा लगा रहा है।
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आलम यह है कि जिले में मौजूद 32 पशु सेवा केंद्रों में से महज आठ पर ही पशु चिकित्सक तैनात हैं। इन अस्पतालों में भी चिकित्सक कभी कभार ही दिखाई देते हैं। ऐसे में पशु पालक झोलाछाप चिकित्सकों से पशुओं का इलाज कराने को मजबूर हैं।
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जानकारी के अनुसार जिले में सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलने से पशुपालकों का रुझान पशु पालन से कम होने लगा है। हालात ऐसे हैं कि पशु पालक सिर्फ अपने खानेपीने लायक ही दुग्ध के लिए पशु पाल रहे हैं। ग्
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रामीण अंचल में बने पशु सेवा केंद्र कई सालों से चिकित्सकों के बैठने की राह देख रहे हैं। पशु चिकित्सकों की लापरवाही का आलम यह है कि 32 पशु सेवा केंद्रों में से 24 पशु सेवा केंद्र विरान पड़े हैं।
बता दें कि उक्त पशु सेवा केंद्र ऐसे गांवों में स्थित हैं, जहां बड़े पैमाने पर दुग्ध उत्पादन का काम होता है। ऐसे में पशुओं के बीमार होने पर पालकों को राजकीय पशु चिकित्सालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
बहरहाल पिलखुवा, ब्रजनाथपुर, पीरनगर, सूदान, बाबूगढ़, कुचैसर चौपला, नूरपुर, सपनावत में बने पशु अस्पतालों में से कई में चिकित्सक कम ही रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई माह से अस्पतालों में चिकित्सक नहीं आए हैं।
मजबूरी में पशुओं का महंगा इलाज कराना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जिन अस्पतालों में चिकित्सक बैठते हैं, वहां दवाओं के नाम पर पशुपालकों का शोषण किया जा रहा है।
अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पशु पालन विभाग सरकारी सुविधाओं को लेकर कितना सजग है।
सरावा, खडख़ड़ी, कांवी, कनिया कल्याणपुर, छपकौली, अकड़ौली, सवालपुर, भटियाना समेत 24 गांवों में बने पशु सेवा केंद्रों पर चिकित्सक तैनात नहीं हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वाईपी सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण पशु सेवा केंद्रों पर चिकित्सक तैनात नहीं किए जा रहे हैं। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
उनका कहना है कि पशु पालकों को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। वैसे भी सचल पशु केंद्रों के लिए गाड़ी मिल चुकी हैं, इनसे पशुपालकों को राहत दिलाई जा रही है।