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बिना नक्शे बने 19 हजार मकान एचपीडीए में हड़कंप, फाइल तैयार करने में जुटे अफसर
Hapur
Updated Tue, 29 Jul 2014 05:31 AM IST
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पिलखुवा। अधिकारियों की उदासीनता के चलते हापुड़ जिले में आठ साल के भीतर बने 20249 भवनों में से 19157 एचपीडीए से स्वीकृत नहीं है। इससे करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हुई है। मामला संज्ञान में लेते हुए आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 के अनु सचिव पीएन यादव ने एचपीडीए से जवाब तलब किया है। इसके चलते अधिकारियों में हड़कंप मचा है और अधिकारियों ने फाइलों की खाक छाननी शुरू कर दी है। जांच के दौरान कई अधिकारियों पर गाज भी गिरने की संभावना बनी है।
कैसे खुला भेद
खेड़ा गांव निवासी रामभरोसे तोमर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत हापुड़, पिलखुवा और गढ़मुक्तेश्वर नगर पालिका परिषद से वर्ष 2007 से लेकर 2014 तक बने मकानों की सूची मांगी थी। जिसकी जानकारी मिलने पर एचपीडीए के अधिकारियों की कारगुजारी सामने आई थी। 2007 से 2014 तक हापुड़ जिले में 20249 आवास बने जिनमें से महज 1092 आवास ही एचपीडीए से स्वीकृत है। 19157 मकान अस्वीकृत पाए गए थे। तोमर ने यह जानकारी 26 जून शासन को भेजी थी।
हरकत में शासन, मांगा जवाब
देर से ही सही, लेकिन शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 के अनु सचिव पीएन यादव ने हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। शासन से 10 जुलाई को जारी पत्र में कहा गया है कि 15 दिन में जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएं। संभावना है कि कई अधिकारियों पर गाज भी कर सकती है।
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कैसे खुला भेद
खेड़ा गांव निवासी रामभरोसे तोमर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत हापुड़, पिलखुवा और गढ़मुक्तेश्वर नगर पालिका परिषद से वर्ष 2007 से लेकर 2014 तक बने मकानों की सूची मांगी थी। जिसकी जानकारी मिलने पर एचपीडीए के अधिकारियों की कारगुजारी सामने आई थी। 2007 से 2014 तक हापुड़ जिले में 20249 आवास बने जिनमें से महज 1092 आवास ही एचपीडीए से स्वीकृत है। 19157 मकान अस्वीकृत पाए गए थे। तोमर ने यह जानकारी 26 जून शासन को भेजी थी।
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हरकत में शासन, मांगा जवाब
देर से ही सही, लेकिन शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 के अनु सचिव पीएन यादव ने हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। शासन से 10 जुलाई को जारी पत्र में कहा गया है कि 15 दिन में जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएं। संभावना है कि कई अधिकारियों पर गाज भी कर सकती है।
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