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गंगा मेला कल से, व्यवस्था कोई नहीं, दावे तमाम

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Hapur
Hapur Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा मेले की व्यवस्थाएं न कर पाने वाली जिला पंचायत के अधिकारी अब डीएम को भी गुमराह कर रहे हैं। पिछले मेलों की व्यवस्थाओं को नकारते हुए जिला पंचायत अधिकारी ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि इस समय तक जिला पंचायत ने इतनी व्यवस्थाएं कर दी हैं।
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गंगा मेला संपन्न कराने की जिम्मेदारी पहली बार जिला पंचायत हापुड़ को मिली है। अभी तक जिला पंचायत अपना कैम्प नहीं लगा पाई है, ठेकेदारों ने काम जरूर शुरू कर दिया है। शनिवार को नाव में सवार होकर स्नान घाट के लिए स्थान और जल स्तर की परख कर रहे डीएम चक्रपाणि यादव ने जब जानकारी ली तोे जिला पंचायत अधिकारी अपनी पीठ खुद थपथपाने लगे। उन्होंने डीएम को बताया कि एक माह से जिला पंचायत जल स्तर की परख कर रही है और अस्थाई मार्ग बनवाने के साथ कैंप आदि लगवा रही है। पहले जिला पंचायत ने कभी इस समय तक इतनी व्यवस्थाएं नहीं की।
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पुलिस लाइन पहुंचे डीएम को जिला पंचायत अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष मुख्य स्नान पर जल स्तर कम होने के कारण काफी दिक्कत हुई थी। इसलिए मुख्य स्नान घाट पर प्लास्टिक के रेत से भरे बैग गिराने की आवश्यकता नहीं है।
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जिला पंचायत अधिकारी यह भूल गए कि गाजियाबाद जिला पंचायत मेला प्रारम्भ होने से पूर्व स्नान घाट का निर्माण कराती थी। एसएसपी गाजियाबाद रहे रघुवीर लाल ने गंगा में एक युवक को तैराकर देखा था। मेला प्रारम्भ होने से तीन दिन पूर्व जिला पंचायत के कैंप में डीएम बैठक लेते थे, जबकि जिला पंचायत का अभी कैंप तक नहीं लगा। गढ़ से मेला तक विद्युत लाइन खींचकर प्रकाश व्यवस्था शुरू होती थी, जो कही नजर नहीं आ रही।
जिला पंचायत पक्की रोड पर गड्ढ़ों का भराव कराती थी, जो इस बार नहीं कराया गया। मेले में पहुंच रहे दुकानदार अंधेरे और गन्ने की फसल के बीच में तंबू लगा रहे हैं और दूर-दूर तक रात में पुलिस नहीं है।

सुरक्षा है नहीं, इसलिए पशु नहीं ले जा रहे
पशु मेला भारत का सबसे बड़ा मेला होता है, जहां विदेश से व्यापारी आते हैं। मेले में 15 दिन पहले ही घोड़ा-खच्चर आने शुरू हो जाते थे, लेकिन इस बार दो दिन पहले भी सड़कों पर पशु दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। पशु व्यापारी हाजी फजल कहते हैं कि मेला करीब दो किलोमीटर नगर की तरफ पहुंच गया है। पशु मेला जहां लगना है वहां गन्ने की फसल खड़ी है। सुरक्षा है नहीं इसलिए अभी पशु नहीं ले जा रहे हैं।

मुख्य स्नान घाट चिन्हित करने को नाव में घूमे डीएम
गढ़मुक्तेश्वर। उत्तर भारत का मिनी कुंभ कहलाने वालाकार्तिक पूर्णिमा गंगा मेला प्रारंभ होने में मात्र एक दिन शेष है। जिला पंचायत अभी तक कोई व्यवस्थाएं नहीं कर पाई है। शनिवार को मुख्य स्नान घाट चिन्हित करने के लिए डीएम ने नाव में बैठकर गंगा में भ्रमण किया। अमर उजाला ने मेले की व्यवस्थाओं को लेकर शनिवार को खुलासा किया तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। शनिवार की दोपहर डीएम चक्रपाणि यादव अमले के साथ मेला स्थल पहुंचे। उन्होंने मेला मानचित्र देखते हुए पुलिस लाइन, वीआईपी कैम्प और गंगा तट का निरीक्षण किया। गंगा स्नान करने के लिए अस्थाई स्नान घाट का निर्माण न किए जाने पर नाराजगी प्रकट करते हुए रविवार शाम तक घाट का निर्माण कराने के निर्देश दिए। डीएम ने एक युवक को गंगा में उतारकर जल स्तर देखा। इसके बाद उन्होंने स्नान घाट चिन्हित करने के लिए नाव में सवार होकर भ्रमण किया। डीएम ने जिला पंचायत अधिकारी को निर्देशित किया कि स्नान घाट को जेसीवी से जीरो प्वाइंट पर समतल कराते हुए उसमें प्लास्टिक के बैग में रेत भरकर गंगा में डाले जाएं, जिससे कटान रुक सके और मुख्य स्नान घाट पर करीब 15 से 20 फुट तक जल स्तर 4 फुट तक रहे। उन्होंने कहा कि मेले में केन्द्र से सचिव और मंत्री आ रहे हैं। जिला पंचायत कैम्प के निकट ही वीआईपी कैम्प लगवाए जाएं। इस मौके पर एसडीएम केबी सिंह, तहसीलदार दिलीप कुमार, कोतवाली इंचार्ज केपी सिंह, जिला पंचायत अधिकारी, सतपाल गोस्वामी आदि थे।

डीएम बोले, खबर में जो छपा है वो दिखाइये
गंगा तट पर पहुंचे डीएम चकपाणि यादव ने कहा कि स्नान घाट और गंगा कटान की जो खबर लगी है, उसे दिखाइये। इसके बाद डीएम को नाव में बैठाकर करीब पांच सौ मीटर घूमाया गया। डीएम ने कहा कि गंगा जी कटान कर रही है जिसके चलते मुख्य स्नान घाट पर विशेष नजर रखी जाए। उन्होंने पिछले मेलों के दौरान हुए हादसों, निजी गोताखोर, गोताखोर पीएसी, नाव, मोटरवोट आदि के विषय में विस्तृत रिपोर्ट ली।


न लाइट है न पानी
गंगा मेला स्थल पर अभी तक जिला पंचायत ने न तो प्रकाश की कोई व्यवस्था की है और न ही पानी की। शौचालय भी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
टैंट आदि लगने शुरू हो गए हैं।

गंगा में 12 हजार क्यूसेक पानी
डीएम ने सिंचाई विभाग से जानकारी ली कि गंगा में कितना पानी है। अवर अभियंता ने बताया कि 12 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज है, इससे कम नहीं हो सकता। हालांकि करीब 30 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है, जबकि 15 सेंटीमीटर और कम हो सकता है।
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