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मेले में छठा बिखेरेगा बनारस का मयूर नृत्य और ब्रज की होली
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:35 PM IST
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धर्म अध्यात्म, आस्था और मनोरंजन का लगेगा तड़का
हापुड़। इस बार गढ़ गंगा कार्तिक मेले में अध्यात्म, आस्था और मनोरंजन का तड़का देखने को मिलेगा। साथ ही बनारस का मयूर नृत्य और ब्रज की होली का रंग भी में चटख होगा। उधर, भजन संध्या गायक भक्ति संगीत से समा बांधेंगे तो हास्य कलाकार के चुटकुलों पर देहाती युवा ठहाका लगाएंगे। कुल मिलाकर आध्यात्म, धर्म और आस्था का मेला मेला बनेगा।
गढ़ मेले को कई सालों के प्रयास के बाद राजकीय दर्जा मिल गया है। इस बार मेले को शासन से बजट भले ही नहीं पास हुआ हो लेकिन मेले का स्वरूप बदलने के लिए प्रशासन एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए है। जिला प्रशासन ने मेले को महोत्सव का रूप देने के लिए कई बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि मेला अपनी देहाती छवि से ऊपर आएगा। अब तक मेला सर्कस और झूलों तक ही सीमित था। लेकिन इस बार मेले में आध्यात्म नगरों की छवि साफ झलकेगी। इन नगरों की प्रसिद्ध इवेंट इस मेले में दिखाई देंगे। आयोजक प्रयास कर रहे हैं कि मेले को राष्ट्रीय स्तर से आयोजित किया जाए। मेले में बनारस का मयूर नृत्य, ब्रज की होली और अयोध्या के राम शक्ति प्रदर्शन संबंधित कार्यक्रमों के लिए कलाकारों को बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर से भजन गायकों की भी भजन संध्याओं को आयोजन करेंगी। हास्य कलाकार और कवि सम्मेलन का भी आयोजन होगा। इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।
डीएम कृष्णा करुनेश ने बताया कि उनका पूरा प्रयास है कि मेले की आध्यात्म छवि के साथ इसे इस रूप में आयोजित किया जाए जो आने वाले समय के लिए एक मिशाल बने।
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हापुड़। इस बार गढ़ गंगा कार्तिक मेले में अध्यात्म, आस्था और मनोरंजन का तड़का देखने को मिलेगा। साथ ही बनारस का मयूर नृत्य और ब्रज की होली का रंग भी में चटख होगा। उधर, भजन संध्या गायक भक्ति संगीत से समा बांधेंगे तो हास्य कलाकार के चुटकुलों पर देहाती युवा ठहाका लगाएंगे। कुल मिलाकर आध्यात्म, धर्म और आस्था का मेला मेला बनेगा।
गढ़ मेले को कई सालों के प्रयास के बाद राजकीय दर्जा मिल गया है। इस बार मेले को शासन से बजट भले ही नहीं पास हुआ हो लेकिन मेले का स्वरूप बदलने के लिए प्रशासन एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए है। जिला प्रशासन ने मेले को महोत्सव का रूप देने के लिए कई बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि मेला अपनी देहाती छवि से ऊपर आएगा। अब तक मेला सर्कस और झूलों तक ही सीमित था। लेकिन इस बार मेले में आध्यात्म नगरों की छवि साफ झलकेगी। इन नगरों की प्रसिद्ध इवेंट इस मेले में दिखाई देंगे। आयोजक प्रयास कर रहे हैं कि मेले को राष्ट्रीय स्तर से आयोजित किया जाए। मेले में बनारस का मयूर नृत्य, ब्रज की होली और अयोध्या के राम शक्ति प्रदर्शन संबंधित कार्यक्रमों के लिए कलाकारों को बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर से भजन गायकों की भी भजन संध्याओं को आयोजन करेंगी। हास्य कलाकार और कवि सम्मेलन का भी आयोजन होगा। इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।
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डीएम कृष्णा करुनेश ने बताया कि उनका पूरा प्रयास है कि मेले की आध्यात्म छवि के साथ इसे इस रूप में आयोजित किया जाए जो आने वाले समय के लिए एक मिशाल बने।
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