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72वां स्वतंत्रता दिवस पर विशेष----
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:44 PM IST
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मेरठ क्रांति के सूत्रधारों को भूला शासन प्रशासन, स्मारक बदहाल
- सिकंदगेट भंडापट्टी निवासी चौधरी जबरदस्त खां, नवाब उल्फत खां ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की नींव
- चर्बी लगे कारतूसों को आधार बनाकर किया था विद्रोह
- स्मारक के सुंदरीकरण के लिए पालिका ने किए थे 5.12 लाख स्वीकृत, योजना नहीं चढ़ सकी परवान
जतिन त्यागी
हापुड़। देश को अंग्रेजों के चुंगल से आजादी दिलाने के लिए 1857 की क्रांति मेरठ से शुरू हुई। इसमें मेरठ कमिश्नरी के 85 क्रांतिकारियों ने चर्बी लगे कारतूसों को आधार बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। इस क्रांति में हापुड़ के सिंकदगेट भंडापट्टी निवासी दो सगे भाई चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां सूत्रधार बने थे, लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी से उनके शहीद स्मारक बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
सिकंदगेट भंडापट्टी निवासी चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां बचपन से ही क्रांतिकारी सोच के थे। अंग्रेजों की गुलामी के समय मोहल्ले में ही दोनों भाइयों ने एक चौपाल बनाई, जिस पर क्रांतिकारी बैठक कर योजनाएं बनाते थे। 10 मई 1857 को सभी क्रांतिकारी सैनिक छावनी में अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए दिल्ली स्थित लाल किला की ओर बढ़ने लगे। इसी बीच मेरठ कमिश्नरी में क्रांतिकारियों ने चर्बी लगे कारतूसों का विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में यह विरोध बढ़ता चला गया और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का रूप ले लिया।
चौधरी जबरदस्त खां और नवाब उल्फत खां को अंग्रेजी सरकार ने फर्जी मुकदमे में फंसा दिया और 14 सितंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई। साथ ही बुलंदशहर रोड पर स्थित उनकी तमाम जमीन-जायदाद जब्त कर ली।
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देश की आजादी में हापुड़ के इन दोनों सपूतों का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है, लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी से सिकंदरगेट पर लगे उनके शहीद स्तंभ की बेहद अनदेखी की जा रही है। आलम यह है कि हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, लेकिन चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां का शहीद स्तंभ गंदगी और जर्जर हालत में पड़ा है।
नवाब उल्फत खां ने अंग्रेजों का नेटवर्क कर दिया था ध्वस्त
1857 की क्रांति के दौरान चौधरी जबरदस्त खां द्वारा चर्बी लगे कारतूसों को लेकर बगावत किए जाने की खबर जैसे ही उनके भाई नवाब उल्फत खां को मिली तो उन्होंने मेरठ से आगरा तक जा रही टेलीकॉम सेवा के तारों को बुलंदशहर रोड पर काट दिया था। इससे अंग्रेजी सरकार की दूरसंचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी।
वर्ष 2001 में मेरठ में लगाया गया था अमर शहीदों के नाम का पत्थर
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार बने 85 क्रांतिकारियों के नाम का पत्थर वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने लगाया था जो आज भी लगा है। इसमें चौधरी जबरदस्त खां का नाम अंकित है।
--फोटो संख्या--11
बजट मिलने के बाद भी नहीं सुधरे हालात
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार चौधरी जबरदस्त खां के परपौत्र फसीह चौधरी ने बताया कि सिकंदरगेट स्थित उनके शहीद स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए वह शासन तक मांग उठा चुके हैं। नगर पालिका बोर्ड ने वर्ष 2016 में स्मारक के सुंदरीकरण के लिए 5.12 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन आज तक सुंदरीकरण तो दूर पालिका व प्रशासन को कोई अफसर, कर्मचारी शहीद स्तंभ पर नहीं पहुंचा। आरटीआई में स्वीकृत रकम का खुलासा हुआ है।
कोट
दस्तावेज निकलवाकर इसका संज्ञान लिया जाएगा। अमर शहीदों के स्मारकों की बदहाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - जितेंद्र कुमार आनंद, ईओ, नगर पालिका
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- सिकंदगेट भंडापट्टी निवासी चौधरी जबरदस्त खां, नवाब उल्फत खां ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की नींव
- चर्बी लगे कारतूसों को आधार बनाकर किया था विद्रोह
- स्मारक के सुंदरीकरण के लिए पालिका ने किए थे 5.12 लाख स्वीकृत, योजना नहीं चढ़ सकी परवान
जतिन त्यागी
हापुड़। देश को अंग्रेजों के चुंगल से आजादी दिलाने के लिए 1857 की क्रांति मेरठ से शुरू हुई। इसमें मेरठ कमिश्नरी के 85 क्रांतिकारियों ने चर्बी लगे कारतूसों को आधार बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। इस क्रांति में हापुड़ के सिंकदगेट भंडापट्टी निवासी दो सगे भाई चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां सूत्रधार बने थे, लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी से उनके शहीद स्मारक बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
सिकंदगेट भंडापट्टी निवासी चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां बचपन से ही क्रांतिकारी सोच के थे। अंग्रेजों की गुलामी के समय मोहल्ले में ही दोनों भाइयों ने एक चौपाल बनाई, जिस पर क्रांतिकारी बैठक कर योजनाएं बनाते थे। 10 मई 1857 को सभी क्रांतिकारी सैनिक छावनी में अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए दिल्ली स्थित लाल किला की ओर बढ़ने लगे। इसी बीच मेरठ कमिश्नरी में क्रांतिकारियों ने चर्बी लगे कारतूसों का विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में यह विरोध बढ़ता चला गया और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का रूप ले लिया।
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चौधरी जबरदस्त खां और नवाब उल्फत खां को अंग्रेजी सरकार ने फर्जी मुकदमे में फंसा दिया और 14 सितंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई। साथ ही बुलंदशहर रोड पर स्थित उनकी तमाम जमीन-जायदाद जब्त कर ली।
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देश की आजादी में हापुड़ के इन दोनों सपूतों का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है, लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी से सिकंदरगेट पर लगे उनके शहीद स्तंभ की बेहद अनदेखी की जा रही है। आलम यह है कि हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, लेकिन चौधरी जबरदस्त खां व नवाब उल्फत खां का शहीद स्तंभ गंदगी और जर्जर हालत में पड़ा है।
नवाब उल्फत खां ने अंग्रेजों का नेटवर्क कर दिया था ध्वस्त
1857 की क्रांति के दौरान चौधरी जबरदस्त खां द्वारा चर्बी लगे कारतूसों को लेकर बगावत किए जाने की खबर जैसे ही उनके भाई नवाब उल्फत खां को मिली तो उन्होंने मेरठ से आगरा तक जा रही टेलीकॉम सेवा के तारों को बुलंदशहर रोड पर काट दिया था। इससे अंग्रेजी सरकार की दूरसंचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी।
वर्ष 2001 में मेरठ में लगाया गया था अमर शहीदों के नाम का पत्थर
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार बने 85 क्रांतिकारियों के नाम का पत्थर वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने लगाया था जो आज भी लगा है। इसमें चौधरी जबरदस्त खां का नाम अंकित है।
--फोटो संख्या--11
बजट मिलने के बाद भी नहीं सुधरे हालात
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार चौधरी जबरदस्त खां के परपौत्र फसीह चौधरी ने बताया कि सिकंदरगेट स्थित उनके शहीद स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए वह शासन तक मांग उठा चुके हैं। नगर पालिका बोर्ड ने वर्ष 2016 में स्मारक के सुंदरीकरण के लिए 5.12 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन आज तक सुंदरीकरण तो दूर पालिका व प्रशासन को कोई अफसर, कर्मचारी शहीद स्तंभ पर नहीं पहुंचा। आरटीआई में स्वीकृत रकम का खुलासा हुआ है।
कोट
दस्तावेज निकलवाकर इसका संज्ञान लिया जाएगा। अमर शहीदों के स्मारकों की बदहाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - जितेंद्र कुमार आनंद, ईओ, नगर पालिका