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अब छात्रों के टैलेंट पर होगा गुरूजी का मूह्यल्यांकन

Sun, 11 Mar 2018 11:56 PM IST
Updated Sun, 11 Mar 2018 11:56 PM IST
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अब छात्रों के टैलेंट पर होगा गुरूजी का मूह्यल्यांकन
अब छात्रों के टैलेंट पर होगा गुरुजी का मूल्यांकन
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हापुड़। परिषदीय स्कूलों में शिक्षा स्तर में सुधार के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो नियमों में सुधार भी किया जा रहा है। इसी के तहत अफसर स्कूल निरीक्षण की आख्या हर माह शासन को भेजेंगे। बच्चों के टैलेंट पर ही गुरुजी का मूल्यांकन होगा। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षा निदेशक ने संबंधित अफसरों को शासनादेश की गाइडलाइन भेज दी है। इसमें यह निर्धारित किया है कि शिक्षक किस महीने बच्चों को क्या पढ़ाएंगे। इसके अलावा जब कोई अधिकारी किसी विद्यालय में निरीक्षण करने पहुंचेगा तो वह किन-किन चीजों की जांच करेंगे। जांच के बाद उक्त अधिकारी तीन दिनों के अंदर विभाग की ओर से डेवलप साफ्टवेयर पर आख्या रिपोर्ट अपलोड करेंगे।
इसमें जांचकर्ता अधिकारी को निरीक्षण के लिए एक फार्म मिलेगा, जिसमें उसे विकास खंड के साथ विद्यालय का नाम, प्रधानाध्यापक का नाम और मोबाइल नंबर, कक्षावार छात्रों का नामांकन, उपस्थिति, कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्रों की संख्या और उपस्थिति दर्ज करनी होगी। उसके बाद यह जांच की जाएगी कि क्या विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना सभा आयोजित होती है।
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इतना ही नहीं निरीक्षण आख्या में घंटावार समय सारिणी प्रदर्शित है या नहीं, माहवार पाठ्यक्रम विभाजन के अनुसार शिक्षण कार्य हो रहा है या नहीं, विषयवार अधिगम संकेतकों को दृष्टिगत रखते हुए पाठ्योजना अध्यापक द्वारा तैयार की गई है या नहीं। निरीक्षण के दौरान अधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम तीन कक्षाओं का निरीक्षण किया जाएगा।
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इसमें कक्षा एक के छात्रों का हिंदी अक्षर का ज्ञान, अंकों का ज्ञान, हिंदी के पाठ का वाचन, हिंदी में लेखन, गिनती और पहाड़े का ज्ञान, सामान्य ज्ञान, गणित प्रश्न के सामूहिक प्रश्न का उत्तर देने वाले छात्रों का प्रतिशत दर्ज करना होगा। निरीक्षणकर्ता को उच्च प्राथमिक विद्यालयों की तीनों कक्षाओं का निरीक्षण करना होगा। इन बिंदुओं पर आख्या तैयार कर शासन को अवगत कराया जायेगा।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है। इसके लिए अध्यापकों को एक महीने का समय दिया गया है। एक महीने बाद जिस विद्यालय में जांच के दौरान इन नियमों का पालन और बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं मिला तो कार्रवाई तय है।
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