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ब्याह-शादी में फिजूलखर्ची करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होगा
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:14 AM IST
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मुस्लिम शादी में फिजुलखर्ची और दहेज पर लगेगी रोक
गढ़मुक्तेश्वर। मुस्लिम शादी में अब ज्यादा फिजुलखर्ची नहीं होगी। साथ ही समाज के लोगों ने दहेज पर भी रोक लगाने की बात कही है। यह निर्णय गांव दौताई के अनवारुल उलूम मदरसे में बृहस्पतिवार रात इस्लाहे माशरात कांफ्रेंस (समाज सुधार सम्मेलन) के आयोजन में लिया गया। इसमें सामाजिक बुराइयों से बचने और ब्याह-शादी समेत खुशी के मौकों पर होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुफ्ती नाजिर ने कहा कि हर किसी का नैतिक दायित्व बनता है कि ब्याह-शादी में होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर इस पैसे से गरीब-मजलूमों समेत जरूरतमंदों की मदद की जाए, क्योंकि आर्थिक तंगी में न जाने कितने मरीजों को दवा और मासूम बच्चों को दूध तक नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि ब्याह-शादी के दौरान अब गांव में डीजे नहीं बजेगा और न ही आतिशबाजी की जाएगी। इसके अलावा बारातियों की तादाद भी 25 से ज्यादा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मौत होने पर तीजा और चालीसवें के नाम पर कोई दावत नहीं दी जाएगी, शादी से पहली वाली रात को मंढा की रोटी करने की बजाए सिर्फ वलीमे की दावत की जाएगी। इस्लाहे माशरात कांफ्रेंस में तय किए गए नियमों की किसी भी रूप में अनदेखी करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। हाफिज मोहम्मद अली, मौलाना अलाउद्दीन, मौलाना जमील, कारी शकील, मौलाना मनव्वर, मौलाना अय्यूब, कारी शफीक, मौलाना महराज, कारी मोहम्मद उस्मान ने लोगों ेको सड़कों पर फैले अतिक्रमण को हटाने के साथ ही अपने घरों समेत आसपास में पूरी तरह साफ सफाई रखने का संकल्प दिलाया।
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गढ़मुक्तेश्वर। मुस्लिम शादी में अब ज्यादा फिजुलखर्ची नहीं होगी। साथ ही समाज के लोगों ने दहेज पर भी रोक लगाने की बात कही है। यह निर्णय गांव दौताई के अनवारुल उलूम मदरसे में बृहस्पतिवार रात इस्लाहे माशरात कांफ्रेंस (समाज सुधार सम्मेलन) के आयोजन में लिया गया। इसमें सामाजिक बुराइयों से बचने और ब्याह-शादी समेत खुशी के मौकों पर होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुफ्ती नाजिर ने कहा कि हर किसी का नैतिक दायित्व बनता है कि ब्याह-शादी में होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर इस पैसे से गरीब-मजलूमों समेत जरूरतमंदों की मदद की जाए, क्योंकि आर्थिक तंगी में न जाने कितने मरीजों को दवा और मासूम बच्चों को दूध तक नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि ब्याह-शादी के दौरान अब गांव में डीजे नहीं बजेगा और न ही आतिशबाजी की जाएगी। इसके अलावा बारातियों की तादाद भी 25 से ज्यादा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मौत होने पर तीजा और चालीसवें के नाम पर कोई दावत नहीं दी जाएगी, शादी से पहली वाली रात को मंढा की रोटी करने की बजाए सिर्फ वलीमे की दावत की जाएगी। इस्लाहे माशरात कांफ्रेंस में तय किए गए नियमों की किसी भी रूप में अनदेखी करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। हाफिज मोहम्मद अली, मौलाना अलाउद्दीन, मौलाना जमील, कारी शकील, मौलाना मनव्वर, मौलाना अय्यूब, कारी शफीक, मौलाना महराज, कारी मोहम्मद उस्मान ने लोगों ेको सड़कों पर फैले अतिक्रमण को हटाने के साथ ही अपने घरों समेत आसपास में पूरी तरह साफ सफाई रखने का संकल्प दिलाया।
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