फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   सिर्फ 18 शिक्षकों के सहारे चल रहे शहर के 21 परिषदीय विद्यालय

सिर्फ 18 शिक्षकों के सहारे चल रहे शहर के 21 परिषदीय विद्यालय

Mon, 05 Mar 2018 11:29 PM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 11:29 PM IST
विज्ञापन
सिर्फ 18 शिक्षकों के सहारे चल रहे   शहर के 21 परिषदीय विद्यालय
सिर्फ 18 शिक्षकों के सहारे चल रहे
विज्ञापन

शहर के 21 परिषदीय विद्यालय
- छह विद्यालयों में शिक्षामित्रों के भरोसे हो रही पढ़ाई
- विद्यालयों में तैनात हैं कुल 11 हेडमास्टर, 7 सहायक अध्यापक और 19 शिक्षामित्र
- शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में भर्ती न होने से पढ़ाई की स्थिति चिंताजनक
--जतिन त्यागी--
हापुड़। शहर के 21 प्राइमरी, जूनियर विद्यालय सिर्फ 37 शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। इनमें भी 11 हेडमास्टर और सात सहायक अध्यापक हैं, शेष शिक्षामित्र हैं। छह प्राइमरी विद्यालयों में तो शिक्षामित्रों के भरोसे ही पढ़ाई हो रही है। सन् 1998 के बाद से शहरी क्षेत्र के स्कूलों में भर्ती न होने के कारण शिक्षकों की किल्लत बनी हुई है। इससे पढ़ाई की स्थिति भी चिंताजनक है।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति को सुधारने के लिए शासन स्तर से बीते दिनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की बंपर भर्तियां हुईं थीं। मगर, इन भर्तियों का लाभ जिले में देहात अंचल के विद्यालयों को ही मिल सका। आलम यह है कि शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में वर्ष 1998 के बाद से अभी तक शिक्षकों की भर्ती नहीं हो सकी है। हालांकि देहात अंचल से स्थानांतरित होकर कुछ शिक्षक जरूर शहरी क्षेत्र के स्कूलों में आए थे। मगर, वह भी अंतरजनपदीय स्थानांतरण होकर अपने मूल जनपदों में लौट गए। अब स्थिति यह है कि शहर के छह प्राइमरी विद्यालयों में न तो कोई हेडमास्टर है और न ही सहायक अध्यापक, उक्त विद्यालय सिर्फ शिक्षामित्रों के भरोसे ही चल रहे हैं। कुल मिलाकर शहर के 21 प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों में शिक्षामित्रों को छोड़कर सिर्फ 18 हेडमास्टर, सहायक अध्यापक ही तैनात हैं। जबकि इन विद्यालयों में करीब 2300 छात्र अध्यनरत हैं।
विज्ञापन

मानक के अनुसार एक शिक्षक 40 छात्रों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त है, जबकि शहर में एक शिक्षक को औसतन 63 छात्र पढ़ाने पड़ रहे हैं। वहीं, इन विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी भारी कमी है। शहर के 17 प्राइमरी विद्यालयों में सिर्फ तीन सफाई कर्मी मौजूद हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन विद्यालयों में साफ-सफाई किस तरह होती होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

नगर शिक्षा अधिकारी गजेंद्र सिंह का कहना है कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी से काफी समस्या हो रही है। आलम यह है कि यदि कोई शिक्षक किसी कारणवश अवकाश पर रहता है तो स्कूल में शिक्षण कार्य कराना काफी मुश्किल हो जाता है। शिक्षकों की डिमांड वह उच्चाधिकारियों से कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed