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Hapur News: बैंकों में बंधक है 30 हजार किसानों की भूमि, गत वर्ष 455 करोड़ का लिया ऋण

Wed, 07 Feb 2024 11:01 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Wed, 07 Feb 2024 11:01 PM IST
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455 crore rupees loan
हापुड़। जिले के 30 हजार से अधिक किसानों की भूमि बैंकों में बंधक है, केसीसी पर गत वर्ष दिसंबर महीने तक किसानों ने 455 करोड़ का ऋण लिया है। जबकि इसके पिछले दो साल में 57 हजार किसान 1049 करोड़ के कर्जदार बने। ब्याज में छूट की बदौलत डिफाल्टर किसानों की सूची लंबी हो रही है। गन्ना भुगतान में विलंब से कर्जदार किसानों की संख्या बढ़ी है।
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फसल बुवाई और खेती संबंधी खर्चों के लिए किसानों को बैंक केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) पर ऋण मुहैया कराते हैं। इसके तहत ऋण पर किसानों को ब्याज में करीब तीन फीसदी की छूट भी मिलती है। हर साल किसानों को कर्ज संबंधी फाइल का नवीनीकरण कराना पड़ता है, इसके तहत पहले लिए ऋण को चुकाना होता है। लेकिन किसान ब्याज में छूट के बावजूद ऋण चुकाने में असफल हो रहे हैं। इसके पीछे बढ़ती महंगाई और फसलों का नुकसान है। जिले में गन्ना भुगतान में देरी भी इसका बड़ा परिणाम है। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के साथ ही किसानों का कर्ज माफ हुआ था। लेकिन अब बड़ी संख्या में फिर से किसान बैंकों के कर्जदार हो गए हैं।
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चार सालों में केसीसी पर ऋण लेने वाले किसान

वर्ष किसान लिया ऋण

2020-21 2695 86.5 करोड़

2021-22 43936 594 करोड़

2022-23 27022 463 करोड़

2023-24 14232 455 करोड़

(नोट : वित्त वर्ष 2023-24 में बंटा कर्ज दिसंबर महीने तक का है, यह जानकारी अग्रणी बैंक कार्यालय से मिली है।)



-सहकारी समितियों से भी लिया है करोड़ों का ऋण-

सहकारी समितियों से भी किसानों ने करोड़ों का ऋण लिया है। समिति के सदस्य बने किसानों की संख्या में भी साल दर साल इजाफा हो रहा है। जिन किसानों पर पिछली सालों का ऋण बकाया चला आ रहा है, उनसे वसूली के लिए टीमें प्रयास में जुट गई हैं।
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गन्ना भुगतान व फसलों की कम पैदावार बनी वजह

किसानों की आय केवल खेती से ही होती है। सरकार की तरफ से भले ही कर्ज देने की योजना हो, लेकिन चीनी मिलों पर उनके बकाया भुगतान का दबाव न बनाना, किसानों की फसलों की कम पैदावार होना, उनकी फसलों का उचित दाम न मिलना भी कर्ज न चुकाने की बड़ी वजह माना जा रहा है। इसी के चलते सरकार को राजस्व वसूली में दिक्कतें भी आ रही हैं क्योंकि किसानों का यही तर्क है कि जब तक चीनी मिलें गन्ने का बकाया भुगतान नहीं करेंगी अथवा उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलेगा वह कहां से कर्ज चुकाएंगे।



-ऋण माफी की आस में हैं किसान-

किसानों द्वारा लिए कर्ज को माफ करने की आस भी बैंकों के आड़े आ रही है। सत्ता में आने से पहले सरकारें किसानों को कर्ज माफी के सुहावने सपने दिखाती हैं। किसान सिर्फ इसी आस में हैं कि अब लोकसभा का चुनाव है, सरकार अपने घोषणा पत्र में फिर से कर्ज माफी दे। कर्ज माफी की उम्मीद में बहुत से किसान कर्ज के रूप में ली रकम बैंकों में जमा नहीं कर पाएंगे।



कोट -जिले के विभिन्न बैंकों से केसीसी पर किसानों ने वित्त वर्ष 2023-24 में दिसंबर महीने तक 455 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। केसीसी पर किसानों को दिए जाने वाले ऋण के ब्याज में नियमानुसार छूट का प्रावधान है।--रमन, एलडीएम।
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