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मुनाफे का सौदा, प्रतिष्ठित लोग भी धंधे से जुड़े
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मुनाफे का सौदा, प्रतिष्ठित लोग भी धंधे से जुड़े
हापुड़। वाहनों के कटान में मुनाफे से अब यह धंधा शहरों से गांवों तक पहुंच गया है, एक ट्रक के कटान पर मुनाफे के चार से पांच लाख रुपये मिलने पर प्रतिष्ठित लोग इस धंधे में जुड़ गए हैं।
अवैध कटान अधिकतर सभी शहरों में चल रहा है। मेरठ का सोती गंज आसपास के जिलों में इसका गढ़ माना जाता है। इसे वाहनों का कमेला भी कहा जाता है। हापुड़ की बात करें तो बुलंदशहर रोड पर वाहनों का कटान किया जाता है। कोतवाली पुलिस ने पूर्व में यहां कार्रवाई की तो फिलहाल यहां मामला ठंडा है। सख्ती के कारण हापुड़ में कटान ना के बराबर हो रहा है। इसी सख्ती के कारण यह गंदा धंधा गांवों तक पहुंच गया। बड़ी बात है कि प्रतिष्ठित और समाज में अच्छा रुसूख रखने वाले लोग भी इसके आकर्षण से दूर नहीं रह पाये। गांव भटियाना में इस धंधे को करने वाला ग्राम प्रधान एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखता है। इस परिवार की गांव में एक अच्छी साख थी। लेकिन इस खुलासे के बाद हैरान हैं कि ऐसा क्या हो गया कि परिवार को वाहनों का कटान करना पड़ा। पुलिस के अनुसार एक भारी वाहन तीस हजार रुपये में यहां बेचा जाता है। जिसके कटान के बाद उसके पुर्जे चार से पांच लाख में बेचे जाते हैं। बस यही लालच इस धंधे को बढ़ावा दे रहा है।
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हापुड़। वाहनों के कटान में मुनाफे से अब यह धंधा शहरों से गांवों तक पहुंच गया है, एक ट्रक के कटान पर मुनाफे के चार से पांच लाख रुपये मिलने पर प्रतिष्ठित लोग इस धंधे में जुड़ गए हैं।
अवैध कटान अधिकतर सभी शहरों में चल रहा है। मेरठ का सोती गंज आसपास के जिलों में इसका गढ़ माना जाता है। इसे वाहनों का कमेला भी कहा जाता है। हापुड़ की बात करें तो बुलंदशहर रोड पर वाहनों का कटान किया जाता है। कोतवाली पुलिस ने पूर्व में यहां कार्रवाई की तो फिलहाल यहां मामला ठंडा है। सख्ती के कारण हापुड़ में कटान ना के बराबर हो रहा है। इसी सख्ती के कारण यह गंदा धंधा गांवों तक पहुंच गया। बड़ी बात है कि प्रतिष्ठित और समाज में अच्छा रुसूख रखने वाले लोग भी इसके आकर्षण से दूर नहीं रह पाये। गांव भटियाना में इस धंधे को करने वाला ग्राम प्रधान एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखता है। इस परिवार की गांव में एक अच्छी साख थी। लेकिन इस खुलासे के बाद हैरान हैं कि ऐसा क्या हो गया कि परिवार को वाहनों का कटान करना पड़ा। पुलिस के अनुसार एक भारी वाहन तीस हजार रुपये में यहां बेचा जाता है। जिसके कटान के बाद उसके पुर्जे चार से पांच लाख में बेचे जाते हैं। बस यही लालच इस धंधे को बढ़ावा दे रहा है।
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