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55 हजार गन्ना किसानों को अब भी भुगतान का इंतजार
Updated Thu, 25 Oct 2018 11:30 PM IST
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55 हजार गन्ना किसानों को अब भी भुगतान का इंतजार
गढ़मुक्तेश्वर। त्योहारों और शादी ब्याह का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में करीब 55 हजार गन्ना किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 14 दिन में गन्ना भुगतान के तमाम दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। करीब 14 माह बीतने के बाद भी किसानों को ब्याज तो दूर असल रकम भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में किसान अपनी छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी कर्ज लेने को मजबूर हैं।
करीब 55 हजार किसान सिंभावली शुगर मिल से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने पिछले पेराई सत्र में शुगर मिल को साढ़े पांच सौ करोड़ से अधिक का गन्ना बेचा था। इसमें से सवा दो सौ करोड़ का पेमेंट अब तक मिल द्वारा अदा नहीं किया गया है। इससे आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ में दबे किसान काफी दिक्कत झेल रहे हैं। एक ओर बिजली महकमा नलकूपों से लेकर उनके घरेलू कनेक्शन तक काट रहा है, वहीं तहसील का संग्रह विभाग भी कर्ज के बोझ में दबे किसानों पर दबाव बढ़ाकर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। इसके अलावा समय पर फीस अदा न होने पर स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों को भी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
यूपी की सत्ता संभालते ही सीएम योगी ने 14 दिन के भीतर गन्ना पेमेंट न मिलने पर किसानों को गन्ना नियमावली के तहत बकाया पेमेंट पर 15 फीसदी की दर से वार्षिक ब्याज दिलाने की घोषणा की थी, जो अब तक महज हवाई साबित हुई है। क्योंकि 14 दिनों की बजाए अब 14 महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन ब्याज तो दूर बल्कि किसानों को अब तक अपने ही गन्ने का असल पेमेंट तक नहीं मिल पाया है। इसके अलावा पिछले साल की तुलना में वर्तमान पेराई सत्र भी करीब दस दिन की देरी से शुरू होने पर हजारों जरूरतमंद और छोटी जोत वाले किसानों को अपना हजारों क्विंटल गन्ना सस्ते रेट में क्रेशरों पर बेचना पड़ा है। वहीं बिजली, डीजल, खाद, ट्रांसपोर्ट और मजदूरी में इजाफा होने के बाद भी इस बार गन्ना मूल्य में फिलहाल बढ़ोतरी की कोई घोषणा नहीं की गई है।
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सरकार ने की वादाखिलाफी
भाकियू मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा का कहना है कि 14 दिन में पेमेंट न मिलने पर ब्याज दिलाने वाली सीएम की घोषणा पूरी तरह हवाई साबित हुई है, क्योंकि अपने ही गन्ने का सवा दो अरब से भी ज्यादा का भुगतान 14 माह बीतने के बाद भी नहीं मिल पाया है।
चुन्ने प्रधान का कहना है कि बकाएदारी वाले किसानों के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं और तहसील का संग्रह विभाग भी उन्हें खूब परेशान कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ किसानों के गन्ने का सवा दो अरब का पेमेंट दबाकर बैठे शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ सरकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
व्यापारी संजय रंगोली कहते हैं कि पिछले साल के बकाया गन्ना मूल्य की अदायगी न होने से किसान की खाली जेब नहीं भर पाई हैं, जिससे इस त्योहारी सीजन में भी कारोबारियों को मंदी की मार झेलनी पड़ रही है।
कोट
पिछले साल सिंभावली शुगर मिल ने करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा था, इसमें किसानों का सवा दो सौ करोड़ अभी बाकी चल रहा है। इसकी जल्द से जल्द अदायगी कराने को शासन समेत गन्ना विभाग मिल प्रबंधन पर लगातार दबाव बनाता आ रहा है।
- राजीव सेठ, गन्ना विकास समिति
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55 हजार गन्ना किसानों को अब भी भुगतान का इंतजार
गढ़मुक्तेश्वर। त्योहारों और शादी ब्याह का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में करीब 55 हजार गन्ना किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 14 दिन में गन्ना भुगतान के तमाम दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। करीब 14 माह बीतने के बाद भी किसानों को ब्याज तो दूर असल रकम भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में किसान अपनी छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी कर्ज लेने को मजबूर हैं।
करीब 55 हजार किसान सिंभावली शुगर मिल से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने पिछले पेराई सत्र में शुगर मिल को साढ़े पांच सौ करोड़ से अधिक का गन्ना बेचा था। इसमें से सवा दो सौ करोड़ का पेमेंट अब तक मिल द्वारा अदा नहीं किया गया है। इससे आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ में दबे किसान काफी दिक्कत झेल रहे हैं। एक ओर बिजली महकमा नलकूपों से लेकर उनके घरेलू कनेक्शन तक काट रहा है, वहीं तहसील का संग्रह विभाग भी कर्ज के बोझ में दबे किसानों पर दबाव बढ़ाकर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। इसके अलावा समय पर फीस अदा न होने पर स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों को भी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
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यूपी की सत्ता संभालते ही सीएम योगी ने 14 दिन के भीतर गन्ना पेमेंट न मिलने पर किसानों को गन्ना नियमावली के तहत बकाया पेमेंट पर 15 फीसदी की दर से वार्षिक ब्याज दिलाने की घोषणा की थी, जो अब तक महज हवाई साबित हुई है। क्योंकि 14 दिनों की बजाए अब 14 महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन ब्याज तो दूर बल्कि किसानों को अब तक अपने ही गन्ने का असल पेमेंट तक नहीं मिल पाया है। इसके अलावा पिछले साल की तुलना में वर्तमान पेराई सत्र भी करीब दस दिन की देरी से शुरू होने पर हजारों जरूरतमंद और छोटी जोत वाले किसानों को अपना हजारों क्विंटल गन्ना सस्ते रेट में क्रेशरों पर बेचना पड़ा है। वहीं बिजली, डीजल, खाद, ट्रांसपोर्ट और मजदूरी में इजाफा होने के बाद भी इस बार गन्ना मूल्य में फिलहाल बढ़ोतरी की कोई घोषणा नहीं की गई है।
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सरकार ने की वादाखिलाफी
भाकियू मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा का कहना है कि 14 दिन में पेमेंट न मिलने पर ब्याज दिलाने वाली सीएम की घोषणा पूरी तरह हवाई साबित हुई है, क्योंकि अपने ही गन्ने का सवा दो अरब से भी ज्यादा का भुगतान 14 माह बीतने के बाद भी नहीं मिल पाया है।
चुन्ने प्रधान का कहना है कि बकाएदारी वाले किसानों के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं और तहसील का संग्रह विभाग भी उन्हें खूब परेशान कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ किसानों के गन्ने का सवा दो अरब का पेमेंट दबाकर बैठे शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ सरकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
व्यापारी संजय रंगोली कहते हैं कि पिछले साल के बकाया गन्ना मूल्य की अदायगी न होने से किसान की खाली जेब नहीं भर पाई हैं, जिससे इस त्योहारी सीजन में भी कारोबारियों को मंदी की मार झेलनी पड़ रही है।
कोट
पिछले साल सिंभावली शुगर मिल ने करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा था, इसमें किसानों का सवा दो सौ करोड़ अभी बाकी चल रहा है। इसकी जल्द से जल्द अदायगी कराने को शासन समेत गन्ना विभाग मिल प्रबंधन पर लगातार दबाव बनाता आ रहा है।
- राजीव सेठ, गन्ना विकास समिति