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दीपावली पर शुभ मुहुर्त व विधि विधान से पूजन करने से घर पर होगा लक्ष्मी का वासण्
Updated Tue, 06 Nov 2018 11:36 PM IST
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दिवाली आज, घर-घर में विराजेंगे लक्ष्मी गणेश जी
- विधि विधान से पूजन करने पर होगी मां लक्ष्मी की कृपा
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। बुधवार रात दीपावली पर दीपों की रोशनी से पूरा शहर जगमगा उठेगा। भगवान श्री गणेश और लक्ष्मी जी अपनी कृपा से सभी का दुख हर लेंगे। विधि विधान से पूजा अर्चना करने से मां लक्ष्मी का वास घर में होगा।
यह है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को पूरे दिन दीपावली का शुभ योग है। इस बार की दीपावली पर न तो कोई भद्रा आ रही है और न ही कोई ग्रहण आदि पड़ रहा है। इसलिए विधि-विधान से पूजन करने पर घर में महालक्ष्मी का सदा वास बना रहेगा। बुधवार को स्थिर लगन में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार सुबह 7.25 बजे से 9.30 बजे तक वृश्चिक लग्न, दोपहर 1.35 बजे से तीन बजे तक कुंभ लग्न और शाम 6.15 बजे से 8.08 तक वृष लग्न रहेगा। चौघडिय़ा मुहूर्त के अनुसार सुबह 10.45 से 12.10 बजे तक चर योग, 4.21 बजे से 5.44 बजे तक लाभ योग, और 7.10 बजे से 8.40 तक अमृत योग और 8.40 बजे से 10.25 तक चर योग शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि इस बार राहु काल शाम 4.30 बजे से 6 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई शुभ कार्य न करें।
ऐसे करें दीपावली पूजन
सर्वप्रथम नए वस्त्रों को धारण करना चाहिए। उसके बाद धन की देवी लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा को लाल आसन पर स्थापित कर घी का दीपक जलाना चाहिए। लक्ष्मी और गणेश को लाल गुलाब, कमल का फूल आदि से पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ पंच मेवा, अनार का भोग लगाकर फल आदि चढ़ाना चाहिए। इसके उपरांत आरती करके खील बताशे आदि चढ़ाएं। रात्रि काल में कनकधारा श्रोत श्रीशुक्त, महालक्ष्मी, सहस्त्रनाम द्वारा कमल पुष्प से अनार बीज से गोमय, पंचमेवा, कमल गट्टे, खीर इन सब से लक्ष्मी पूजा, अर्चना, हवन आदि करने से धन व्यापार की वृद्धि होती है। अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए।
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दीपावल पूजन व महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि एक थाली में 11, 21 या 16 गाय के घी या तिल के तेल का दीपक थाली में लगाकर दीप दान करें। गणपति लक्ष्मी की धातु की प्रतिमा (चांदी, पीतल आदि) का ही पूजा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हें हम पंचामृत आदि से स्नान करा सकते हैं। गणपति लक्ष्मी की धातु की प्रतिमा का कभी विसर्जन नहीं किया जाता है। यह जितने अधिक समय रखी जाती है, इनमें उतना ही ज्यादा गणपति व लक्ष्मी का वास सदा के लिए होकर सिद्ध हो जाती हैं।
यहां करें दीप दान
तुलसी पर दीप दान से कृष्ण भक्ति, बेल वृक्ष और आंवला वृक्ष पर दीप दान से लक्ष्मी प्राप्ति, लक्ष्मी नारायण, शिव मंदिर, कुबैर, गणपति, महालक्ष्मी व अन्य देवाल्यों में दीप दान करें।
रात 11.40 से दो बजे तक होगा महानिशिथ काल
गढ़ में भद्रकाली मंदिर के पुजारी पंडित रमाशंकर तिवारी और ज्योतिषाचार्य पंडित उमेश सेनरा ने बताया कि रात 11.40 बजे से लेकर दो बजे तक महानिशिथ काल का पूजन शुभ रहेगा। इस अवधि में महालक्ष्मी के पूजन को विशेष उपमा दी गई है, क्योंकि इसी समय में समुद्र मंथन से लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी। इसका उल्लेख निशीथे लक्ष्म्यादि पूजनं कृत्यं शुभं दोहे में भी किया गया है। इस अवधि में मां लक्ष्मी का पूजन करने वालों के यहां भंडार भरपूर होंगे। पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि रात्रि में पूजा अर्चना करने के बाद प्रात:काल में प्रार्थना करें कि हे अलक्ष्मी अर्थात दरिद्रता तुम मेरे घर से चली जाओ, क्योंकि अब महाविष्णु सहित लक्ष्मी जी का निवास मेरे घर में हो गया है। ऐसा करने वालों की सदा मनोकामना पूरी होती हैं और वे मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।
रंगोली से सजेगा घर आंगन
दीपावली पर महिलाओं के पास घर में खास व्यंजन बनाने के अलावा साज सज्जा की भी जिम्मेदारी होती है। गृहणियां इस मामले में भी पीछे नहीं रहना चाहतीं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में रंगोली से घर का आंगन सजाने का क्रेज काफी बढ़ा है। इसी वजह से पंसारियों की दुकान पर अबीर गुलाल और रंगों के अलावा सूजी व अन्य सामग्रियों की खूब बिक्री हुई।
दिवाली से रोशन होगा आसमान
हापुड़। दीपावली पर बुधवार रात 8 बजे से शहर में जमकर आतिशबाजी होगी। इससे आसमान रोशन हो जाएगा। रामलीला मैदान में बच्चे अभिभावकों के साथ पटाखे खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं दुकानदारों ने सभी तैयारी पूरी कर ली है। दीपावली पर आतिशबाजी की बिक्री के मद्देनजर यूं तो दर्जनों तरह के पटाखे दुकानों पर मौजूद हैं। दीप वर्षा, लड़ी, राकेट की काफी मांग है, लेकिन आज भी फूलझड़ी, अनार और चकरी बच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं। 12 से 150 आवाज के स्काई शाट बाजार में हैं। पटाखा विक्रेताओं ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पटाखों के दाम 15 से 20 प्रतिशत महंगे हुए हैं। जिसके चलते पटाखों की बिक्री भी काफी हद तक प्रभावित होने की उम्मीद है। दाम ज्यादा होने से मांग निश्चित रुप से घटी है। ग्राहक लोकल पटाखों की खरीददारी से ज्यादा ब्रांडेड पटाखों की खरीददारी कर रहे हैं। दुकानदारों ने भी लोकल पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए ब्रांडेड पटाखों की बिक्री करना उचित समझा है।
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- विधि विधान से पूजन करने पर होगी मां लक्ष्मी की कृपा
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। बुधवार रात दीपावली पर दीपों की रोशनी से पूरा शहर जगमगा उठेगा। भगवान श्री गणेश और लक्ष्मी जी अपनी कृपा से सभी का दुख हर लेंगे। विधि विधान से पूजा अर्चना करने से मां लक्ष्मी का वास घर में होगा।
यह है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को पूरे दिन दीपावली का शुभ योग है। इस बार की दीपावली पर न तो कोई भद्रा आ रही है और न ही कोई ग्रहण आदि पड़ रहा है। इसलिए विधि-विधान से पूजन करने पर घर में महालक्ष्मी का सदा वास बना रहेगा। बुधवार को स्थिर लगन में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। इस बार सुबह 7.25 बजे से 9.30 बजे तक वृश्चिक लग्न, दोपहर 1.35 बजे से तीन बजे तक कुंभ लग्न और शाम 6.15 बजे से 8.08 तक वृष लग्न रहेगा। चौघडिय़ा मुहूर्त के अनुसार सुबह 10.45 से 12.10 बजे तक चर योग, 4.21 बजे से 5.44 बजे तक लाभ योग, और 7.10 बजे से 8.40 तक अमृत योग और 8.40 बजे से 10.25 तक चर योग शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि इस बार राहु काल शाम 4.30 बजे से 6 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई शुभ कार्य न करें।
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ऐसे करें दीपावली पूजन
सर्वप्रथम नए वस्त्रों को धारण करना चाहिए। उसके बाद धन की देवी लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा को लाल आसन पर स्थापित कर घी का दीपक जलाना चाहिए। लक्ष्मी और गणेश को लाल गुलाब, कमल का फूल आदि से पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ पंच मेवा, अनार का भोग लगाकर फल आदि चढ़ाना चाहिए। इसके उपरांत आरती करके खील बताशे आदि चढ़ाएं। रात्रि काल में कनकधारा श्रोत श्रीशुक्त, महालक्ष्मी, सहस्त्रनाम द्वारा कमल पुष्प से अनार बीज से गोमय, पंचमेवा, कमल गट्टे, खीर इन सब से लक्ष्मी पूजा, अर्चना, हवन आदि करने से धन व्यापार की वृद्धि होती है। अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए।
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दीपावल पूजन व महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि एक थाली में 11, 21 या 16 गाय के घी या तिल के तेल का दीपक थाली में लगाकर दीप दान करें। गणपति लक्ष्मी की धातु की प्रतिमा (चांदी, पीतल आदि) का ही पूजा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हें हम पंचामृत आदि से स्नान करा सकते हैं। गणपति लक्ष्मी की धातु की प्रतिमा का कभी विसर्जन नहीं किया जाता है। यह जितने अधिक समय रखी जाती है, इनमें उतना ही ज्यादा गणपति व लक्ष्मी का वास सदा के लिए होकर सिद्ध हो जाती हैं।
यहां करें दीप दान
तुलसी पर दीप दान से कृष्ण भक्ति, बेल वृक्ष और आंवला वृक्ष पर दीप दान से लक्ष्मी प्राप्ति, लक्ष्मी नारायण, शिव मंदिर, कुबैर, गणपति, महालक्ष्मी व अन्य देवाल्यों में दीप दान करें।
रात 11.40 से दो बजे तक होगा महानिशिथ काल
गढ़ में भद्रकाली मंदिर के पुजारी पंडित रमाशंकर तिवारी और ज्योतिषाचार्य पंडित उमेश सेनरा ने बताया कि रात 11.40 बजे से लेकर दो बजे तक महानिशिथ काल का पूजन शुभ रहेगा। इस अवधि में महालक्ष्मी के पूजन को विशेष उपमा दी गई है, क्योंकि इसी समय में समुद्र मंथन से लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी। इसका उल्लेख निशीथे लक्ष्म्यादि पूजनं कृत्यं शुभं दोहे में भी किया गया है। इस अवधि में मां लक्ष्मी का पूजन करने वालों के यहां भंडार भरपूर होंगे। पंडित रमाशंकर तिवारी ने बताया कि रात्रि में पूजा अर्चना करने के बाद प्रात:काल में प्रार्थना करें कि हे अलक्ष्मी अर्थात दरिद्रता तुम मेरे घर से चली जाओ, क्योंकि अब महाविष्णु सहित लक्ष्मी जी का निवास मेरे घर में हो गया है। ऐसा करने वालों की सदा मनोकामना पूरी होती हैं और वे मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।
रंगोली से सजेगा घर आंगन
दीपावली पर महिलाओं के पास घर में खास व्यंजन बनाने के अलावा साज सज्जा की भी जिम्मेदारी होती है। गृहणियां इस मामले में भी पीछे नहीं रहना चाहतीं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में रंगोली से घर का आंगन सजाने का क्रेज काफी बढ़ा है। इसी वजह से पंसारियों की दुकान पर अबीर गुलाल और रंगों के अलावा सूजी व अन्य सामग्रियों की खूब बिक्री हुई।
दिवाली से रोशन होगा आसमान
हापुड़। दीपावली पर बुधवार रात 8 बजे से शहर में जमकर आतिशबाजी होगी। इससे आसमान रोशन हो जाएगा। रामलीला मैदान में बच्चे अभिभावकों के साथ पटाखे खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं दुकानदारों ने सभी तैयारी पूरी कर ली है। दीपावली पर आतिशबाजी की बिक्री के मद्देनजर यूं तो दर्जनों तरह के पटाखे दुकानों पर मौजूद हैं। दीप वर्षा, लड़ी, राकेट की काफी मांग है, लेकिन आज भी फूलझड़ी, अनार और चकरी बच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं। 12 से 150 आवाज के स्काई शाट बाजार में हैं। पटाखा विक्रेताओं ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पटाखों के दाम 15 से 20 प्रतिशत महंगे हुए हैं। जिसके चलते पटाखों की बिक्री भी काफी हद तक प्रभावित होने की उम्मीद है। दाम ज्यादा होने से मांग निश्चित रुप से घटी है। ग्राहक लोकल पटाखों की खरीददारी से ज्यादा ब्रांडेड पटाखों की खरीददारी कर रहे हैं। दुकानदारों ने भी लोकल पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए ब्रांडेड पटाखों की बिक्री करना उचित समझा है।