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इंडस्ट्री व इंफ्रास्टेक्चर प्रोजेक्ट के तहत लगे ट्यूबवैल अवैध करार
Updated Fri, 29 Dec 2017 05:13 PM IST
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इंडस्ट्री व इंफ्रास्टेक्चर प्रोजेक्ट के तहत लगे ट्यूबवैल अवैध
- ऐसे ट्यूबवैल व बोरिंग के लिए डीएम से एनओसी लेना होगा जरूरी, शासन ने लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। शासन ने इंडस्ट्री, इंफ्रास्टेक्चर प्रोजेक्ट और निजी व्यवसायिक कार्यों के लिए खुदे ट्यूबवेल और बोरिंग अवैध करार दे दिए हैं। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने इसके लिए डीएम को एनओसी जारी करने का प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया है। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए गए हैं।
केंद्रीय भूमिजल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक वाईबी कौशिक की ओर से 15 दिसंबर को जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में अवैध तौर पर भूमि जल दोहन पर नाराजगी जताई। पत्र में कहा गया है कि अवैध खनन की तरह पानी के भी अवैध दोहन के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार माना जाएगा। अब इंडस्ट्री, इंफ्रास्टेक्चर के निजी बड़े प्रोजेक्ट, खनन परियोजना और निर्माण साइट पर नई बोरिंग नहीं की जा सकती। बोरिंग से पहले डीएम कार्यालय में आवेदन करना होगा। भूमिजल बोर्ड ने डीएम को पदेन अधिकरण समिति का अध्यक्ष नियुक्त करते हुए निरीक्षण और वैधानिक कार्रवाई करने के भी अधिकार दिए हैं। डीएम अपने किसी प्रतिनिधि को निरीक्षण की शक्तियां प्रदान कर वास्तविक स्थिति पता करा सकते हैं। इतना ही नहीं, अवैध बोरिंग मिलने पर एफआइआर भी कराने को कहा है।
डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि जल का अत्यधिक दोहन वास्तव में गंभीर मामला है। शासन से प्राप्त आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
- ऐसे ट्यूबवैल व बोरिंग के लिए डीएम से एनओसी लेना होगा जरूरी, शासन ने लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। शासन ने इंडस्ट्री, इंफ्रास्टेक्चर प्रोजेक्ट और निजी व्यवसायिक कार्यों के लिए खुदे ट्यूबवेल और बोरिंग अवैध करार दे दिए हैं। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने इसके लिए डीएम को एनओसी जारी करने का प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया है। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए गए हैं।
केंद्रीय भूमिजल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक वाईबी कौशिक की ओर से 15 दिसंबर को जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में अवैध तौर पर भूमि जल दोहन पर नाराजगी जताई। पत्र में कहा गया है कि अवैध खनन की तरह पानी के भी अवैध दोहन के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार माना जाएगा। अब इंडस्ट्री, इंफ्रास्टेक्चर के निजी बड़े प्रोजेक्ट, खनन परियोजना और निर्माण साइट पर नई बोरिंग नहीं की जा सकती। बोरिंग से पहले डीएम कार्यालय में आवेदन करना होगा। भूमिजल बोर्ड ने डीएम को पदेन अधिकरण समिति का अध्यक्ष नियुक्त करते हुए निरीक्षण और वैधानिक कार्रवाई करने के भी अधिकार दिए हैं। डीएम अपने किसी प्रतिनिधि को निरीक्षण की शक्तियां प्रदान कर वास्तविक स्थिति पता करा सकते हैं। इतना ही नहीं, अवैध बोरिंग मिलने पर एफआइआर भी कराने को कहा है।
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डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि जल का अत्यधिक दोहन वास्तव में गंभीर मामला है। शासन से प्राप्त आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।