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पहाड़ों की बारिश से खादर में बेचैनी
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:12 PM IST
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उफनाई गंगा, खादर में फिर दहशत
- गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी रहने से खादर क्षेत्र के गांवों में फिर से बेचैनी बढ़ने लगी है, क्योंकि जलभराव होने से निचले जंगल में खड़ी हजारों बीघा फसल पहले ही बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और संक्रामक बीमारी भी तेजी से पांव पसार रही हैं।
भले ही वेस्टर्न यूपी से जुड़े मैदानी इलाकों में रहने वाले आकाश की तरफ टकटकी लगाकर बारिश होने की बाट जोह रहे हैैं, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों पर झमाझम बारिश होने का सिलसिला लगातार जारी चल रहा है। जिससे गढ़ खादर क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों में रहने वाले हजारों परिवारों में बेचैनी का माहौल व्याप्त है। क्योंकि तीन सप्ताह तक राहत मिलने के बाद गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर अगले तीन-चार दिनों तक जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही तो फिर निचले जंगल में खड़ी फसलें बर्बाद हो जाएंगी। मेवासिंह, निहाल, नौबत, ब्रह्मा का कहना है कि खादर के जंगल में जलभराव होने से आबादी में मच्छर-मक्खी और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ने पर वायरल फीवर, डायरिया, आई फ्लू जैसी बीमारी तेजी के साथ पांव पसार रही हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कैंप लगवाना तो दूर बल्कि जरूरी दवाओं का वितरण कराने तक को तैयार नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की देर शाम से लेकर बुधवार की देर शाम तक गंगा के जलस्तर में दस सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 198.30 मीटर के निशान पर पहुंच गया है।
तहसीलदार अजय उपाध्याय का कहना है कि पहाड़ों की बारिश से गंगा के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन खादर के गांवों में बाढ़ आने जैसा कोई खतरा नहीं है। बताया कि बुधवार शाम 3 बजे के बाद जलस्तर में गिरावट देखी गई है।
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- गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी
अमर उजाला ब्यूरो
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी रहने से खादर क्षेत्र के गांवों में फिर से बेचैनी बढ़ने लगी है, क्योंकि जलभराव होने से निचले जंगल में खड़ी हजारों बीघा फसल पहले ही बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और संक्रामक बीमारी भी तेजी से पांव पसार रही हैं।
भले ही वेस्टर्न यूपी से जुड़े मैदानी इलाकों में रहने वाले आकाश की तरफ टकटकी लगाकर बारिश होने की बाट जोह रहे हैैं, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों पर झमाझम बारिश होने का सिलसिला लगातार जारी चल रहा है। जिससे गढ़ खादर क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों में रहने वाले हजारों परिवारों में बेचैनी का माहौल व्याप्त है। क्योंकि तीन सप्ताह तक राहत मिलने के बाद गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर अगले तीन-चार दिनों तक जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही तो फिर निचले जंगल में खड़ी फसलें बर्बाद हो जाएंगी। मेवासिंह, निहाल, नौबत, ब्रह्मा का कहना है कि खादर के जंगल में जलभराव होने से आबादी में मच्छर-मक्खी और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ने पर वायरल फीवर, डायरिया, आई फ्लू जैसी बीमारी तेजी के साथ पांव पसार रही हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कैंप लगवाना तो दूर बल्कि जरूरी दवाओं का वितरण कराने तक को तैयार नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की देर शाम से लेकर बुधवार की देर शाम तक गंगा के जलस्तर में दस सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 198.30 मीटर के निशान पर पहुंच गया है।
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तहसीलदार अजय उपाध्याय का कहना है कि पहाड़ों की बारिश से गंगा के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन खादर के गांवों में बाढ़ आने जैसा कोई खतरा नहीं है। बताया कि बुधवार शाम 3 बजे के बाद जलस्तर में गिरावट देखी गई है।
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