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इफ्को ने जिले के किसानों को पहुंचाया 11 करोड़ रुपये का नुकसान-शिवकुमार
Updated Thu, 03 Aug 2017 05:19 PM IST
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फोटो फाइल संख्या 02एचपीआर पीएच-07
इफ्को खाद के सैंपल फेल, किसानों 11 करोड़ की चपत
- रालोद के जिलाध्यक्ष ने शिवकुमार ने लगाया आरोप
- जांच में मिली थी पोटाश, फास्फोरस की कमी
- दोनों ही तत्व फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
किसानों को इफ्को कंपनी ने 11 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। कंपनी के गोदाम से भरे गए खाद के आठ सैंपल कृषि विभाग की जांच रिपोर्ट में फेल हो गए हैं। इनमें पोटाश और फास्फोरस की कमी मिली है। इन तत्वों की फसलों को बेहद आवश्यकता होती है। यह बात रालोद के जिलाध्यक्ष शिवकुमार त्यागी ने कहीं।
वह मंगलवार को गढ़ रोड स्थित कार्यालय पर प्रेस से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने की हिस्सेदारी इफ्को की है। किसानों का इफ्को खाद पर भरोसा था, लेकिन मिलावटखोरी के चलते किसानों का जो शोषण हो रहा है। पिछले दिनों कृषि विभाग ने इफ्को के गोदाम से 8 सैंपल लिए थे। ये सभी सैंपल फेल पाए गए। जांच में पोटाश और फास्फोरस की कमी पाई गई है। इससे खाद कंपनी को प्रति बैग 50 रुपये का लाभ हुआ है।
जिले की 35 सहकारी समितियों पर 11,6690 बैग की बिक्री किसानों को की गई। इससे किसानों को करीब 11 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। खाद कंपनी अब फार्म सांठगांठ कर रिसेंपलिंग के लिए भेजे गए खाद की जांच रिपोर्ट जारी नहीं होने दी है। इससे किसानों में रोष है। इस मामले में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है।
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रालोद के वरिष्ठ नेता आफताब चौधरी ने कहा कि शुगर मिलों ने किसानों ने नाम पर जो ऋण निकाला है, उसकी सीबीआई जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं आलू उत्पादक किसानों को राहत दिलाने के लिए शीतगृहों का किराया माफ कराया जाना चाहिए।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह का कहना है कि इफ्को डीएपी खाद के आठ सैंपल फेल पाए गए थे। इफ्को की ओर से रिसेंपलिंग की याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। आठों सैंपल दोबारा से जांच के लिए भेजे गए हैं।
इफ्को खाद के सैंपल फेल, किसानों 11 करोड़ की चपत
- रालोद के जिलाध्यक्ष ने शिवकुमार ने लगाया आरोप
- जांच में मिली थी पोटाश, फास्फोरस की कमी
- दोनों ही तत्व फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
किसानों को इफ्को कंपनी ने 11 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। कंपनी के गोदाम से भरे गए खाद के आठ सैंपल कृषि विभाग की जांच रिपोर्ट में फेल हो गए हैं। इनमें पोटाश और फास्फोरस की कमी मिली है। इन तत्वों की फसलों को बेहद आवश्यकता होती है। यह बात रालोद के जिलाध्यक्ष शिवकुमार त्यागी ने कहीं।
वह मंगलवार को गढ़ रोड स्थित कार्यालय पर प्रेस से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने की हिस्सेदारी इफ्को की है। किसानों का इफ्को खाद पर भरोसा था, लेकिन मिलावटखोरी के चलते किसानों का जो शोषण हो रहा है। पिछले दिनों कृषि विभाग ने इफ्को के गोदाम से 8 सैंपल लिए थे। ये सभी सैंपल फेल पाए गए। जांच में पोटाश और फास्फोरस की कमी पाई गई है। इससे खाद कंपनी को प्रति बैग 50 रुपये का लाभ हुआ है।
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जिले की 35 सहकारी समितियों पर 11,6690 बैग की बिक्री किसानों को की गई। इससे किसानों को करीब 11 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। खाद कंपनी अब फार्म सांठगांठ कर रिसेंपलिंग के लिए भेजे गए खाद की जांच रिपोर्ट जारी नहीं होने दी है। इससे किसानों में रोष है। इस मामले में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है।
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रालोद के वरिष्ठ नेता आफताब चौधरी ने कहा कि शुगर मिलों ने किसानों ने नाम पर जो ऋण निकाला है, उसकी सीबीआई जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं आलू उत्पादक किसानों को राहत दिलाने के लिए शीतगृहों का किराया माफ कराया जाना चाहिए।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह का कहना है कि इफ्को डीएपी खाद के आठ सैंपल फेल पाए गए थे। इफ्को की ओर से रिसेंपलिंग की याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। आठों सैंपल दोबारा से जांच के लिए भेजे गए हैं।