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बरसात में काली नदी फिर बर्बाद करेगी हजारों बीघा धान और गन्ने की फसल..
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धान और गन्ने की फसल पर काली नदी का साया
हापुड़। काली नदी दर्जनों गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा फसलों को इस वर्ष भी बर्बाद कर सकती है। क्योंकि बरसात सिर पर है और प्रशासन ने नदी की सफाई की कोई तैयारी ही शुरू नहीं की है। कूड़ों के अंबार पानी की निकासी में अवरोध बन रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य ने डीएम से शिकायत कर, नदी की सफाई की मांग की है।
काली नदी किनारे बसे गांव मुरादपुर निजामसर से गजालपुर के बीच पड़ने वाले सैकड़ों किसानों की खेती हर साल बरसात के समय बर्बाद हो जाती है। क्योंकि काली नदी में औद्योगिक इकाईयों का कैमिकल युक्त पानी आता है, जो फसलों समेत लोगों की जान पर काल बनकर बरस रहा है।
प्रशासन, सिंचाई विभाग द्वारा इस नदी की साफ सफाई नहीं करायी जाती। इसका परिणाम यह है कि बरसात के दिनों में नदी में लगे कूड़े के अंबार पानी के बहाव में अवरोध बन जाते हैं। इससे नदी के किनारे टूटने से पानी फसलों में भर जाता है।
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बीते वर्ष भी किसानों की सैकड़ों बीघा धान और गन्ने की फसल कैमिकल युक्त पानी खेतों में भरने से बर्बाद हो गई थी। इतना ही नहीं मुरादपुर व बिगास मलकपुर पुल के पास मार्ग अवरुद्ध हो गया था। जिसके चलते लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हुई थी।
मामले की गंभीरता पर इस क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने डीएम को पत्र देकर, बरसात से पहले काली नदी की साफ सफाई कराने की मांग उठाई है।
किसानों को नहीं मिला मुआवजा
बीते वर्ष किसानों की सैकड़ों बीघा फसल काली नदी के दूषित पानी से बर्बाद हो गयी थी। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। प्रशासन की तरफ से फसलों के नुकसान का आंकलन तक नहीं कराया गया।
इकाली नदी से प्रभावित ये गांव
काली नदी गांव मुरादपुर, गजालपुर, आगाहपुर, मतनौरा, मलकपुर, श्यामपुर, बिगास आदि से होकर गुजर रही है। ऐसे में बरसात के दिनों में इन गांवों में काली नदी का पानी नुकसान पहुंचा सकता है।
अधिकारी कहिन
एसडीएम सत्यप्रकाश का कहना है कि मामला गंभीर है। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर, साफ सफाई का कार्य कराया जाएगा। मानसून से पहले सफाई करा दी जाएगी।
जतिन त्यागी 25एचपीआर01
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हापुड़। काली नदी दर्जनों गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा फसलों को इस वर्ष भी बर्बाद कर सकती है। क्योंकि बरसात सिर पर है और प्रशासन ने नदी की सफाई की कोई तैयारी ही शुरू नहीं की है। कूड़ों के अंबार पानी की निकासी में अवरोध बन रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य ने डीएम से शिकायत कर, नदी की सफाई की मांग की है।
काली नदी किनारे बसे गांव मुरादपुर निजामसर से गजालपुर के बीच पड़ने वाले सैकड़ों किसानों की खेती हर साल बरसात के समय बर्बाद हो जाती है। क्योंकि काली नदी में औद्योगिक इकाईयों का कैमिकल युक्त पानी आता है, जो फसलों समेत लोगों की जान पर काल बनकर बरस रहा है।
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प्रशासन, सिंचाई विभाग द्वारा इस नदी की साफ सफाई नहीं करायी जाती। इसका परिणाम यह है कि बरसात के दिनों में नदी में लगे कूड़े के अंबार पानी के बहाव में अवरोध बन जाते हैं। इससे नदी के किनारे टूटने से पानी फसलों में भर जाता है।
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बीते वर्ष भी किसानों की सैकड़ों बीघा धान और गन्ने की फसल कैमिकल युक्त पानी खेतों में भरने से बर्बाद हो गई थी। इतना ही नहीं मुरादपुर व बिगास मलकपुर पुल के पास मार्ग अवरुद्ध हो गया था। जिसके चलते लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हुई थी।
मामले की गंभीरता पर इस क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने डीएम को पत्र देकर, बरसात से पहले काली नदी की साफ सफाई कराने की मांग उठाई है।
किसानों को नहीं मिला मुआवजा
बीते वर्ष किसानों की सैकड़ों बीघा फसल काली नदी के दूषित पानी से बर्बाद हो गयी थी। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। प्रशासन की तरफ से फसलों के नुकसान का आंकलन तक नहीं कराया गया।
इकाली नदी से प्रभावित ये गांव
काली नदी गांव मुरादपुर, गजालपुर, आगाहपुर, मतनौरा, मलकपुर, श्यामपुर, बिगास आदि से होकर गुजर रही है। ऐसे में बरसात के दिनों में इन गांवों में काली नदी का पानी नुकसान पहुंचा सकता है।
अधिकारी कहिन
एसडीएम सत्यप्रकाश का कहना है कि मामला गंभीर है। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर, साफ सफाई का कार्य कराया जाएगा। मानसून से पहले सफाई करा दी जाएगी।
जतिन त्यागी 25एचपीआर01