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ऐसे तो टीबी रोग से नहीं जीती जा सकेगी जंग...
Updated Fri, 29 Dec 2017 05:13 PM IST
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ऐसे तो टीबी रोग से नहीं जीती जा सकेगी जंग...
-अस्पताल व मेडिकल स्टोर छिपा रहे टीबी रोगियों की पहचान
-सही उपचार नहीं मिलने से दर्जनों मरीज एमडीआर, एक्सडीआर श्रेणी में पहुंचे
--जतिन त्यागी--
हापुड़। सरकार भले ही पोलियो की तर्ज पर टीबी को देश में जड़ से खत्म करने का सपना देख रही है, लेकिन जिले में कुछ निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर संचालक टीबी के मरीजों की पहचान छिपा ऐसे मरीजों का ग्राफ बढ़ा रहे हैं। इस लापरवाही के चलते बहुत से मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच गए हैं।
स्वास्थ्य अफसरों ने अब मरीजों की सूचना न देने पर अस्पताल, मेडिकल स्टोर संचालकों को एफआईआर की चेतावनी दी है। चिकित्सकों के अनुसार तपेदिक अब लाइलाज बीमारी नहीं है। नियमित इलाज से इस रोग से जीता जा सकता है। सरकारी अस्तालों में डॉटस के जरिए हजारों मरीजों का उपचार किया जा रहा है, लेकिन कुछ निजी चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक टीबी के रोगियों की पहचान छिपाने में लगे हैं। आलम यह है कि साल दर साल जिले में टीबी रोगियों का ग्राफ बढ़ रहा है। इसमें अनेक मरीज ऐसे मिल रहे हैं, जो इलाज गड़बड़ाने से एमडीआर और एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच गए हैं। ऐसे मरीजों पर नियमित रूप से दी जाने वाली दवाएं खास असर नहीं कर पाती है।
टीबी रोगियों की ऑनलाइन फिडिंग जरूरी-
- सरकार ने टीबी को देश से मिटाने के लिए निष्क्षय साइट लांच की थी। इस साइट पर सरकारी, निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को टीबी के मरीजों का पूरा ब्योरा अपलोड करना होता है। लेकिन कुछ निजी अस्पताल इनकी पहचान छिपाने में लगे हुए हैं।
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35 एमडीआर व सात मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंचे-
- स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अनुसार नियमित इलाज न मिल पाने के कारण जिले भर में 35 मरीज एमडीआर और सात मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इन मरीजों पर अब नियमित रूप से दी जाने वाली दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है। हालांकि निजी अस्पतालों से निकले इन मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज दिया जा रहा है, इनके स्वास्थ्य में 10 फीसदी सुधार भी हुआ है।
-रोगियों की पहचान छिपाने पर रजिस्ट्रेशन होगा रद्द-
टीबी रोगियों की किसी निजी अस्पताल, मेडिकल स्टोर ने पहचान छिपाई तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
मेडिकल स्टोर को तीन साल तक रखना होगा रिकॉर्ड
- यदि टीबी के मरीजों का किसी अस्पताल में इलाज चल रहा है और दवाएं मेडिकल स्टोर से ली जा रही हैं, तो मेडिकल स्टोर संचालकों को तीन साल तक टीबी के मरीजों का ब्योरा रखना होगा और इसकी जानकारी स्वास्थ्य अफसरों को भी देनी होगी।
-जिले में टीबी के मरीजों का ग्राफ-
वर्ष मरीजों की संख्या
2014-15 2100
2015-16 2400
2016-17 2923
कोट
डिप्टी सीएमओ डा. राकेश अनुरागी का कहना है कि टीबी के मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है। मरीज स्वस्थ्य होकर घर लौट रहे हैं। निजी अस्पताल, मेडिकल स्टोर को मरीजों का ब्योरा विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर होगी।
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-अस्पताल व मेडिकल स्टोर छिपा रहे टीबी रोगियों की पहचान
-सही उपचार नहीं मिलने से दर्जनों मरीज एमडीआर, एक्सडीआर श्रेणी में पहुंचे
--जतिन त्यागी--
हापुड़। सरकार भले ही पोलियो की तर्ज पर टीबी को देश में जड़ से खत्म करने का सपना देख रही है, लेकिन जिले में कुछ निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर संचालक टीबी के मरीजों की पहचान छिपा ऐसे मरीजों का ग्राफ बढ़ा रहे हैं। इस लापरवाही के चलते बहुत से मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच गए हैं।
स्वास्थ्य अफसरों ने अब मरीजों की सूचना न देने पर अस्पताल, मेडिकल स्टोर संचालकों को एफआईआर की चेतावनी दी है। चिकित्सकों के अनुसार तपेदिक अब लाइलाज बीमारी नहीं है। नियमित इलाज से इस रोग से जीता जा सकता है। सरकारी अस्तालों में डॉटस के जरिए हजारों मरीजों का उपचार किया जा रहा है, लेकिन कुछ निजी चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक टीबी के रोगियों की पहचान छिपाने में लगे हैं। आलम यह है कि साल दर साल जिले में टीबी रोगियों का ग्राफ बढ़ रहा है। इसमें अनेक मरीज ऐसे मिल रहे हैं, जो इलाज गड़बड़ाने से एमडीआर और एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच गए हैं। ऐसे मरीजों पर नियमित रूप से दी जाने वाली दवाएं खास असर नहीं कर पाती है।
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टीबी रोगियों की ऑनलाइन फिडिंग जरूरी-
- सरकार ने टीबी को देश से मिटाने के लिए निष्क्षय साइट लांच की थी। इस साइट पर सरकारी, निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को टीबी के मरीजों का पूरा ब्योरा अपलोड करना होता है। लेकिन कुछ निजी अस्पताल इनकी पहचान छिपाने में लगे हुए हैं।
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35 एमडीआर व सात मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंचे-
- स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अनुसार नियमित इलाज न मिल पाने के कारण जिले भर में 35 मरीज एमडीआर और सात मरीज एक्सडीआर श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इन मरीजों पर अब नियमित रूप से दी जाने वाली दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है। हालांकि निजी अस्पतालों से निकले इन मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज दिया जा रहा है, इनके स्वास्थ्य में 10 फीसदी सुधार भी हुआ है।
-रोगियों की पहचान छिपाने पर रजिस्ट्रेशन होगा रद्द-
टीबी रोगियों की किसी निजी अस्पताल, मेडिकल स्टोर ने पहचान छिपाई तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
मेडिकल स्टोर को तीन साल तक रखना होगा रिकॉर्ड
- यदि टीबी के मरीजों का किसी अस्पताल में इलाज चल रहा है और दवाएं मेडिकल स्टोर से ली जा रही हैं, तो मेडिकल स्टोर संचालकों को तीन साल तक टीबी के मरीजों का ब्योरा रखना होगा और इसकी जानकारी स्वास्थ्य अफसरों को भी देनी होगी।
-जिले में टीबी के मरीजों का ग्राफ-
वर्ष मरीजों की संख्या
2014-15 2100
2015-16 2400
2016-17 2923
कोट
डिप्टी सीएमओ डा. राकेश अनुरागी का कहना है कि टीबी के मरीजों का सफल इलाज किया जा रहा है। मरीज स्वस्थ्य होकर घर लौट रहे हैं। निजी अस्पताल, मेडिकल स्टोर को मरीजों का ब्योरा विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर होगी।