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स्वच्छताग्रह आंदोलन के साक्षी बनेंगे हापुड़ के भी 55 नागरिक
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:58 PM IST
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स्वच्छताग्रह आंदोलन में भाग लेने हापुड़ से जाएंगे 55 लोग
हापुड़। सत्याग्रह आंदोलन की जन्मस्थली बिहार के चंपारण की धरती से 100 साल बाद फिर इतिहास दोहराया जाएगा। इस बार लड़ाई स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि देश से गंदगी खदेड़ने के लिए होगी। 3 से 10 अप्रैल तक चंपारण में स्वच्छताग्रह आंदोलन की अलख जगाई जाएगी। इसके साक्षी हापुड़ के 55 नागरिक (स्वच्छताग्राही) बनेंगे। इन लोगों को चयन के बाद ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण दे दिया गया है। 31 मार्च को स्वच्छताग्राही चंपारण के लिए रवाना होंगे जहां पीएम नरेंद्र मोदी स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे।
देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकालने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 100 वर्ष पूर्व बिहार के चंपारण से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। इस समय देश गंदगी, प्रदूषण से जूझ रहा है। जबकि महात्मा गांधी का मानना था कि साफ सफाई ईश्वर भक्ति के बराबर है। उन्होंने स्वच्छ भारत का सपना देखा था। इसी सपने को साकार करने के लिए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंपारण से स्वच्छताग्रह आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन से 10 अप्रैल तक चंपारण में एक विशाल सम्मेलन का आयोजन होगा।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए हापुड़ से भी 55 स्वच्छताग्राही व ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर का चयन किया गया है। इन स्वच्छताग्राहियों को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। 31 मार्च को चयनित स्वच्छताग्राही बिहार के चंपारण के लिए रवाना होंगे, जहां 3 से 10 अप्रैल तक चलने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वच्छता के टिप्स सीखने का मौका मिलेगा। उसके बाद चयनित लोग जिले में स्वच्छता की अलख जगाएंगे।
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क्या है स्वच्छताग्राही
देहात अंचल में सफाई की अलख जगाने के लिए जिला पंचायती राज विभाग ने प्रत्येक गांव से चुनिंदा लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया। इन्हीं लोगों को स्वच्छताग्राही के नाम से जाना जाता है। उनका काम अन्य ग्रामीणों को खुले में शौच न करने, शौचालय बनवाने के प्रति जागरूक करना है।
डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि जिले से 55 स्वच्छताग्राहियों को चयनित कर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे। 31 मार्च को स्वच्छताग्राही व ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर पंचारण के लिए रवाना हो जाएंगे।
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हापुड़। सत्याग्रह आंदोलन की जन्मस्थली बिहार के चंपारण की धरती से 100 साल बाद फिर इतिहास दोहराया जाएगा। इस बार लड़ाई स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि देश से गंदगी खदेड़ने के लिए होगी। 3 से 10 अप्रैल तक चंपारण में स्वच्छताग्रह आंदोलन की अलख जगाई जाएगी। इसके साक्षी हापुड़ के 55 नागरिक (स्वच्छताग्राही) बनेंगे। इन लोगों को चयन के बाद ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण दे दिया गया है। 31 मार्च को स्वच्छताग्राही चंपारण के लिए रवाना होंगे जहां पीएम नरेंद्र मोदी स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे।
देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकालने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 100 वर्ष पूर्व बिहार के चंपारण से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। इस समय देश गंदगी, प्रदूषण से जूझ रहा है। जबकि महात्मा गांधी का मानना था कि साफ सफाई ईश्वर भक्ति के बराबर है। उन्होंने स्वच्छ भारत का सपना देखा था। इसी सपने को साकार करने के लिए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंपारण से स्वच्छताग्रह आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए तीन से 10 अप्रैल तक चंपारण में एक विशाल सम्मेलन का आयोजन होगा।
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इस अभियान को सफल बनाने के लिए हापुड़ से भी 55 स्वच्छताग्राही व ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर का चयन किया गया है। इन स्वच्छताग्राहियों को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। 31 मार्च को चयनित स्वच्छताग्राही बिहार के चंपारण के लिए रवाना होंगे, जहां 3 से 10 अप्रैल तक चलने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वच्छता के टिप्स सीखने का मौका मिलेगा। उसके बाद चयनित लोग जिले में स्वच्छता की अलख जगाएंगे।
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क्या है स्वच्छताग्राही
देहात अंचल में सफाई की अलख जगाने के लिए जिला पंचायती राज विभाग ने प्रत्येक गांव से चुनिंदा लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया। इन्हीं लोगों को स्वच्छताग्राही के नाम से जाना जाता है। उनका काम अन्य ग्रामीणों को खुले में शौच न करने, शौचालय बनवाने के प्रति जागरूक करना है।
डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि जिले से 55 स्वच्छताग्राहियों को चयनित कर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें स्वच्छता का पाठ पढ़ाएंगे। 31 मार्च को स्वच्छताग्राही व ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर पंचारण के लिए रवाना हो जाएंगे।