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दिवाली पर बिगड़ी शहर की आबोहवा, चार गुना बढ़ा प्रदूषण

Thu, 08 Nov 2018 11:49 PM IST
Updated Thu, 08 Nov 2018 11:49 PM IST
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दिवाली पर बिगड़ी शहर की आबोहवा, चार गुना बढ़ा प्रदूषण
दिवाली पर बिगड़ी शहर की आबोहवा, चार गुना बढ़ा प्रदूषण
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- सामान्य दिनों से दो गुना अधिक हुआ ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण चार गुना से अधिक दर्ज
- रोक के बावजूद बीते वर्ष के मुकाबले अधिक हुई आतिशबाजी
- बृहस्पतिवार को भी बदतर रहे हालात, पीएम 2.5 बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। कोर्ट द्वारा पटाखे छुड़ाने के लिए घोषित नियम व शर्ताें के बावजूद दीपावली पर शहर में देर रात तक खूब धूमधड़ाका हुआ। पूरा आकाश रंग बिरंगी आतिशबाजी से भर गया। युवाओं ने जमकर मौज मस्ती की। यह मौज मस्ती अपने पीछे बड़ी मात्रा में प्रदूषण छोड़ गई। दीपावली की रात सामान्य दिनों से दो गुना अधिक ध्वनि और करीब साढ़े चार गुना अधिक वायु प्रदूषण रिकार्ड किया गया। बृहस्पतिवार को भी हालात बदतर रहे। पीएम 2.5 बढ़ा रहा।
सामान्य दिनों में हापुड़ में ध्वनि प्रदूषण करीब 45 बीबीएल दर्ज किया जाता है। जबकि दीपावली की रात यह इसका करीब दोगुना 95 बीबीएल दर्ज किया गया। इसके अलावा हापुड़ में सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण के जो आंकड़े रहते हैं, उनमें साढ़े चार गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
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उनमें पीएम (पार्टीकुलेंट मैटर)- 10 की मात्रा सामान्यत: 100 माइक्रोग्राम होनी चाहिए, लेकिन दीपावली की रात यह 451 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक रिकार्ड की गई। दीपावली से पहले यह मात्रा 315 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक दर्ज की गई थी। जबकि पीएम- 2.5 की मात्रा 245 दर्ज की गई।
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प्रदूषण विभाग के स्टेशन इंचार्ज सलमान राणा ने बताया कि दीपावली पर प्रदूषण काफी बढ़ा है। मनुष्य ही नहीं पशु पक्षियों के लिए भी प्रदूषण का यह स्तर खतरनाक है।
बोले चिकित्सक -
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजबीर सिंह के अनुसार ध्वनि प्रदूषण से कान और मस्तिष्क की नसों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। तेज आवाज से कान का पर्दा फटने की भी आशंका रहती है।
बुजुर्ग लोगों को ध्वनि प्रदूषण से अधिक दिक्कत आती है। इससे घबराहट की स्थिति रहती है। इसके अलावा सांस संबंधी रोगियों के लिए वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक है। इस स्थिति में उन्हें काफी परेशानी होती है। ऐसे में विशेष देखभाल की आवश्यकता है। इसके अलावा बच्चों को भी इस स्थिति से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आंखों में जलन, सिरदर्द व चिड़चिड़ापन आम समस्याएं हैं।
नहीं दिखा कोर्ट के आदेशों का असर
कोर्ट द्वारा पटाखों छुड़ाने के लिए शाम आठ से रात दस बजे तक का समय दिया गया था। लेकिन दीपावली की रात इस प्रकार की कोई पाबंदी दिखाई नहीं दी। न तो पुलिस प्रशासन ने इसके लिए कोई सख्ती दिखाई और न ही शहर के लोगों ने कोई पहल की। शहर में देर रात तक जमकर आतिशबाजी हुई।


बृहस्पतिवार को भी बदतर रहे हालात
बुधवार को दिवाली के बाद बृहस्पतिवार को प्रदूषण और बढ़ गया। एक्यूआर 346 दर्ज किया गया, जबकि पीएम 10 की मात्रा 443 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक दर्ज की गई। वहीं पीएम 2.5 की मात्रा 245 से बढ़कर 251 तक पहुंच गई।

पिछले तीन साल का प्रदूषण का स्तर ---
वर्ष वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण
2014 423 मा.ग्रा. प्रति क्यूबिक 90बीबीए
2015 433 मा.ग्रा. प्रति क्यूबिक 95बीबीए
2016 439 मा.ग्रा प्रति क्यूबिक 98बीबीए
2017 445 मा.ग्रा प्रति क्यूबिक 95बीबीए
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