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आलू ने शीतगृह संचालकों को लगाया करोड़ों का फटका

Sat, 30 Dec 2017 01:09 AM IST
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:09 AM IST
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आलू ने शीतगृह संचालकों को लगाया करोड़ों का फटका

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आलू ने शीतगृह संचालकों को लगाया करोड़ों का फटका
हापुड़। आलू की बेकद्री ने इस बार किसानों को ही नहीं शीतगृह संचालकों को भी करोड़ों रुपये का फटका लगा दिया है। जिले के 14 शीतगृहों में अब भी आलू के तीन लाख बोरों का स्टॉक रखा हुआ है। उचित दाम न मिलने के कारण किसानों ने आलू को निकालने से इंकार कर दिया है, ऐसे में शीतगृह संचालकों को मिलने वाला करोड़ों रुपया भी अटक गया है। नए आलू की आवक के साथ ही संचालकों को आलू खुले में फेंकना पड़ रहा है।
बीते सत्र में जिले के 35 हजार हेक्टेयर में आलू की बुवाई की गई थी। जिलेभर में खुले में 14 शीतगृहों में इस बार आलू के 30 लाख बोरों का स्टॉक रखा गया था। बंपर पैदावार के कारण काफी आलू शीतगृह में रखा भी नहीं जा सका था।
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सरकार ने आलू की खरीद शुरू की, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ सकी। आलम यह है कि किसानों को इस बार शीतगृहों का किराया भी जेब से ही देना पड़ा, क्योंकि आलू का बोरा महज 120 रुपये तक ही बिक सका था। ऐसे में चटकी की उम्मीद में शीतगृहों में आलू रखे किसानों को कड़ा फटका लगा। क्योंकि पुराने आलू का दाम अब 50 रुपये/कट्टा है।
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आलम यह है कि किसानों ने शीतगृहों में रखे करीब तीन लाख कट्टों के स्टॉक को निकालने से मना कर दिया है। इससे शीतगृह संचालकों को करीब 3.60 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। शीतगृहों में रखा आलू अब गलने लगा है, ऐसे में संचालकों को आलू खुले में फेेंकना पड़ रहा है। वहीं, अब नए आलू की आवक शुरू हो गई है, लेकिन इसका दाम भी अच्छा नहीं है प्रति कट्टा 230 से 280 रुपये तक ही बिक पा रहा है।
दूसरे राज्यों में भी नहीं मिल रहे दाम
इस क्षेत्र की आलू की दक्षिण भारत के राज्य केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड आदि राज्यों में काफी मांग रहती थी। इन राज्यों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का आलू तीन गुना अधिक दामों में मिलता था। लेकिन इस बार इन राज्यों में आलू की डिमांड कम रहने से आलू की कीमत बेहद कम रही हैं।

कोल्ड स्टोर संचालक संजय अग्रवाल ने बताया कि आलू का दाम कम होने से किसान शीतगृह से आलू नहीं निकाल रहे हैं। करीब तीन लाख पुराने कट्टों का स्टॉक अभी भी शीतगृहों में रखा हुआ है, इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
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