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ग्लैंडर्स को लेकर जिले में हाई अलर्ट,पशुपालन विभाग सतर्क
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ग्लैंडर्स को लेकर जिले में हाई अलर्ट, पशुपालन विभाग सतर्क
हापुड़। बरेली में ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित एक घोड़े को मौत का इंजेक्शन दिए जाने के बाद से जिले में भी हाईअलर्ट कर दिया गया है। पशुपालन विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है। संदिग्ध घोड़ों की जांच के लिए टीमों का गठन कर, सैंपल लैब भेजने की तैयारी भी की जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि घोड़ों में ग्लैंडर्स रोग काफी खतरनाक है, यह बीमारी लाइलाज है इसकी चपेट में मनुष्य भी आ सकते हैं। बरेली में ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जिसके बाद ग्लैंडर्स से पीड़ित घोड़े को मौत का इंजेक्शन देना पड़ा है।
बहरहाल, जिले में भी इस रोग को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। पशु चिकित्सकों की सात टीमें घोड़ों पर नजर रखेंगी। संदिग्ध घोड़ा मिलने पर उसके सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाएंगे। हालांकि पशु चिकित्सकों का दावा है कि फिलहाल जिले में ग्लैंडर्स बीमारी का प्रकोप नहीं है।
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-ग्लैंडर्स के लक्षण-
* घोड़ों के त्वचा में फोड़े व घुमड़ियां।
* नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखना।
* तेज बुखार आना, धस्का/खांसी होना।
* नाक से पीला कनार/श्राव आना और सांस लेने में तकलीफ।
- ऐसे फैलती है यह बीमारी -
* बीमार पशु के साथ रहने से।
* बीमार पशु के मुहं व नाक से निकलने वाली कनार/श्राव से।
* बीमार पशु व अन्य पशुओं का चारा पानी साथ होने से।
- इस तरह कर सकते हैं बचाव -
* स्वस्थ पशु को बीमार जानवर से अलग रखना।
* अन्य पशु व मनुष्यों में यह बीमारी न फैले इसके लिए बीमार पशु को अलग रखना।
कोट-
सीवीओ डा. प्रमोद कुमार का कहना है कि फिलहाल जिले में ग्लैंडर्स रोग नहीं मिला है। फिर भी टीमों का गठन कर घोड़ों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
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हापुड़। बरेली में ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित एक घोड़े को मौत का इंजेक्शन दिए जाने के बाद से जिले में भी हाईअलर्ट कर दिया गया है। पशुपालन विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है। संदिग्ध घोड़ों की जांच के लिए टीमों का गठन कर, सैंपल लैब भेजने की तैयारी भी की जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि घोड़ों में ग्लैंडर्स रोग काफी खतरनाक है, यह बीमारी लाइलाज है इसकी चपेट में मनुष्य भी आ सकते हैं। बरेली में ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, जिसके बाद ग्लैंडर्स से पीड़ित घोड़े को मौत का इंजेक्शन देना पड़ा है।
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बहरहाल, जिले में भी इस रोग को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। पशु चिकित्सकों की सात टीमें घोड़ों पर नजर रखेंगी। संदिग्ध घोड़ा मिलने पर उसके सैंपल जांच के लिए लैब भेजे जाएंगे। हालांकि पशु चिकित्सकों का दावा है कि फिलहाल जिले में ग्लैंडर्स बीमारी का प्रकोप नहीं है।
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-ग्लैंडर्स के लक्षण-
* घोड़ों के त्वचा में फोड़े व घुमड़ियां।
* नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखना।
* तेज बुखार आना, धस्का/खांसी होना।
* नाक से पीला कनार/श्राव आना और सांस लेने में तकलीफ।
- ऐसे फैलती है यह बीमारी -
* बीमार पशु के साथ रहने से।
* बीमार पशु के मुहं व नाक से निकलने वाली कनार/श्राव से।
* बीमार पशु व अन्य पशुओं का चारा पानी साथ होने से।
- इस तरह कर सकते हैं बचाव -
* स्वस्थ पशु को बीमार जानवर से अलग रखना।
* अन्य पशु व मनुष्यों में यह बीमारी न फैले इसके लिए बीमार पशु को अलग रखना।
कोट-
सीवीओ डा. प्रमोद कुमार का कहना है कि फिलहाल जिले में ग्लैंडर्स रोग नहीं मिला है। फिर भी टीमों का गठन कर घोड़ों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।