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हापुड़ की पंचायती गौशाला को मिला 1.18 करोड़ रुपये अनुदान
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:04 AM IST
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हापुड़ की पंचायती गौशाला को
मिला 1.18 करोड़ रुपये अनुदान
हापुड़। नगर की श्री पंचायती गौशाला के करीब 1900 गौवंश के भरण-पोषण में मदद करने के लिए गो सेवा आयोग ने समाप्त हो रहे चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 1.18 करोड़ रुपये का अनुदान भेजा है। इस गौशाला में करीब 24 साल बाद कोई अनुदान आया है, जिससे प्रबंधन को काफी राहत मिली है।
हापुड़ की पक्का बाग स्थित पंचायती गौशाला 1905 से संचालित है। इस गौशाला की देखरेख चुनाव से निर्वाचित प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। गौवंश की संख्या बढ़ने पर प्रबंध समिति ने वर्ष 2000 में जरौठी में भी भवन बनाकर वहां गौशाला की स्थापना की। इस गौशाला का तोड़ी (भोजपुर) और मिर्जापुर मवाना में फार्म भी है। गौशाला की प्रबंध समिति के मंत्री सुरेश कुमार गुप्ता की माने तो गौशाला में इस समय करीब 1900 गौवंश हैं, जिनके भरण पोषण में औसतन करीब 3.60 करोड़ रुपये सालाना खर्च आता है। गौवंश की सेवा में करीब 100 कर्मचारी काम करते हैं तथा प्रबंध समिति के तमाम पदाधिकारी भी समय-समय पर गौशाला जाकर गौवंश की सेहत के बारे में जानकारी करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि गौवंश के भरण-पोषण के लिए दूध, घी, गोबर की बिक्री और दोनों फार्म की आय के साथ-साथ आम जनमानस के दान से धन जुटाया जाता है। क्योंकि औसतन प्रतिदिन एक लाख रुपये खर्च आता है।
प्रबंध कमेटी के मंत्री सुरेश गुप्ता ने बताया कि करीब ढाई साल पहले उनकी कमेटी ने पदभार संभाला था। वह तभी से गौशाला के विकास और बढ़ते गौवंश के भरण-पोषण का संकट दूर करने के लिए प्रयासरत हैं। उनका कहना है कि वह कई बार लखनऊ जाकर गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों और प्रमुख सचिव पशु पालन से भी मिले। इतना ही नहीं गौशाला के लिए अनुदान की फाइल पर जिलाधिकारी कृष्णा करुनेश और तत्कालीन जिला पशु चिकित्साधिकारी वीरेंद्र त्यागी से संस्तुति कराकर गौ सेवा आयोग में पहुंचाई। इस पर भी तमाम जांच होने के बाद उक्त 1.18 करोड़ रुपये का अनुदान गौशाला के खाते में पहुंच सका। इससे काफी राहत मिलेगी। उन्होंने गौशालाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का भी आभार प्रकट किया है।
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हापुड़ की गौशाला का अनुदान दूसरे नंबर पर
हापुड़। पंचायती गौशाला की प्रबंध समिति के सदस्य दीपक गोयल का कहना है कि यहां की गौशाला को मिला 1.18 करोड़ का अनुदान, इस बार जारी अनुदान में दूसरे नंबर पर है। इससे ज्यादा अनुदान मथुरा की गौशाला को मिला है।
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मिला 1.18 करोड़ रुपये अनुदान
हापुड़। नगर की श्री पंचायती गौशाला के करीब 1900 गौवंश के भरण-पोषण में मदद करने के लिए गो सेवा आयोग ने समाप्त हो रहे चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 1.18 करोड़ रुपये का अनुदान भेजा है। इस गौशाला में करीब 24 साल बाद कोई अनुदान आया है, जिससे प्रबंधन को काफी राहत मिली है।
हापुड़ की पक्का बाग स्थित पंचायती गौशाला 1905 से संचालित है। इस गौशाला की देखरेख चुनाव से निर्वाचित प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। गौवंश की संख्या बढ़ने पर प्रबंध समिति ने वर्ष 2000 में जरौठी में भी भवन बनाकर वहां गौशाला की स्थापना की। इस गौशाला का तोड़ी (भोजपुर) और मिर्जापुर मवाना में फार्म भी है। गौशाला की प्रबंध समिति के मंत्री सुरेश कुमार गुप्ता की माने तो गौशाला में इस समय करीब 1900 गौवंश हैं, जिनके भरण पोषण में औसतन करीब 3.60 करोड़ रुपये सालाना खर्च आता है। गौवंश की सेवा में करीब 100 कर्मचारी काम करते हैं तथा प्रबंध समिति के तमाम पदाधिकारी भी समय-समय पर गौशाला जाकर गौवंश की सेहत के बारे में जानकारी करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि गौवंश के भरण-पोषण के लिए दूध, घी, गोबर की बिक्री और दोनों फार्म की आय के साथ-साथ आम जनमानस के दान से धन जुटाया जाता है। क्योंकि औसतन प्रतिदिन एक लाख रुपये खर्च आता है।
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प्रबंध कमेटी के मंत्री सुरेश गुप्ता ने बताया कि करीब ढाई साल पहले उनकी कमेटी ने पदभार संभाला था। वह तभी से गौशाला के विकास और बढ़ते गौवंश के भरण-पोषण का संकट दूर करने के लिए प्रयासरत हैं। उनका कहना है कि वह कई बार लखनऊ जाकर गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों और प्रमुख सचिव पशु पालन से भी मिले। इतना ही नहीं गौशाला के लिए अनुदान की फाइल पर जिलाधिकारी कृष्णा करुनेश और तत्कालीन जिला पशु चिकित्साधिकारी वीरेंद्र त्यागी से संस्तुति कराकर गौ सेवा आयोग में पहुंचाई। इस पर भी तमाम जांच होने के बाद उक्त 1.18 करोड़ रुपये का अनुदान गौशाला के खाते में पहुंच सका। इससे काफी राहत मिलेगी। उन्होंने गौशालाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का भी आभार प्रकट किया है।
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हापुड़ की गौशाला का अनुदान दूसरे नंबर पर
हापुड़। पंचायती गौशाला की प्रबंध समिति के सदस्य दीपक गोयल का कहना है कि यहां की गौशाला को मिला 1.18 करोड़ का अनुदान, इस बार जारी अनुदान में दूसरे नंबर पर है। इससे ज्यादा अनुदान मथुरा की गौशाला को मिला है।