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फसल बर्बादी के सदमे से किसान की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला हमीरपुर
Updated Mon, 20 Apr 2015 11:43 PM IST
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प्राकृतिक आपदा से बर्बाद फसलों को लेकर कर्ज अदायगी को परेशान एक किसान की सदमे के चलते दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वृद्व किसान पर करीब 2 लाख 30 हजार रुपये का कर्ज था। वहीं 14 बीघे खेत में मात्र आठ क्विंटल मटर निकलने से वह परेशान था।
चिकासी थानाक्षेत्र के रहंक गांव निवासी कालीचरन (60) के पास 6 बीघा निजी भूमि है। जिसमें उसने मटर की फसल बोई थी। इस फसल में केवल 4 क्विंटल मटर की पैदावार हुई। वहीं 8 बीघा जमीन किसान ने बलकट ले रखी थी जिसमें बोई गई मटर भी केवल 4 क्विंटल निकली। किसान के पास खेती के अलावा आमदनी का कोई जरिया नहीं था। मृतक के बेटे बाबादीन कुशवाहा ने बताया कि उसके पिता ने भूमि विकास बैंक से 50 हजार और एबीबी बैंक राठ से 55 हजार का ऋण ले रखा है। गांव के एक व्यक्ति का उन पर 30 हजार रुपये का कर्ज है। साथ ही 63 हजार रुपये के करीब निजी नलकूप का विद्युत बिल बकाया है। इतनी बड़ी रकम की अदायगी की चिंता में रोजाना उसके पिता खेताें में चक्कर लगाते रहते थे। वहीं फसल की बर्बादी से बेहद व्यथित थे। उसने बताया कि खेत बलकट लगाने के लिए रिश्तेदाराें से उधार रुपये लिए थे। बीती शाम खेतों से लौटते समय फसल की बर्बादी एवं ऋण चुकाने का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सके और रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़े। सूचना मिलते ही अस्पताल लेकर जाते समय रास्ते में पिता की मौत हो गई। इस मामले में उपजिलाधिकारी रामअक्षयवर सिंह ने कहा कि सूचना मिली है तहसीलदार और लेखपाल को गांव भेजकर घटना की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
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चिकासी थानाक्षेत्र के रहंक गांव निवासी कालीचरन (60) के पास 6 बीघा निजी भूमि है। जिसमें उसने मटर की फसल बोई थी। इस फसल में केवल 4 क्विंटल मटर की पैदावार हुई। वहीं 8 बीघा जमीन किसान ने बलकट ले रखी थी जिसमें बोई गई मटर भी केवल 4 क्विंटल निकली। किसान के पास खेती के अलावा आमदनी का कोई जरिया नहीं था। मृतक के बेटे बाबादीन कुशवाहा ने बताया कि उसके पिता ने भूमि विकास बैंक से 50 हजार और एबीबी बैंक राठ से 55 हजार का ऋण ले रखा है। गांव के एक व्यक्ति का उन पर 30 हजार रुपये का कर्ज है। साथ ही 63 हजार रुपये के करीब निजी नलकूप का विद्युत बिल बकाया है। इतनी बड़ी रकम की अदायगी की चिंता में रोजाना उसके पिता खेताें में चक्कर लगाते रहते थे। वहीं फसल की बर्बादी से बेहद व्यथित थे। उसने बताया कि खेत बलकट लगाने के लिए रिश्तेदाराें से उधार रुपये लिए थे। बीती शाम खेतों से लौटते समय फसल की बर्बादी एवं ऋण चुकाने का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सके और रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़े। सूचना मिलते ही अस्पताल लेकर जाते समय रास्ते में पिता की मौत हो गई। इस मामले में उपजिलाधिकारी रामअक्षयवर सिंह ने कहा कि सूचना मिली है तहसीलदार और लेखपाल को गांव भेजकर घटना की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
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