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तीन साल से प्रयास फिर भी सूख रहे हलक
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मौदहा (हमीरपुर)। गुसियारी को पानी देने के लिए तैयार होने वाली पेयजल योजना तीन साल से अधूरी है। शासन ने कुल 4.45 करोड़ रुपये के बजट में आधा ही जलनिगम को दिया है। जिससे छह हजार की आबादी परेशान है।
तहसील क्षेत्र में केन नदी किनारे बसे एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी का संकट दूर नहीं हो रहा है। इन गांवों के हैंडपंपों से खारा पानी निकलता है। पथरीली भूमि में पानी बहुत गहराई पर है या है ही नहीं। गुसियारी, इचौली, नायकपुरवा, कपसा, खंडेह, रतवा जैसे गांवों को पानी देने के लिए एशिया की दूसरे नंबर की एक बड़ी योजना 35 वर्ष पूर्व केन नदी से खंडेह गांव के नाम से बनी थी। जिसमें बांदा जनपद के भी 18 गांव शामिल थे। लेकिन यह योजना चल नहीं सकी।
गांव के कुएं के भी भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से सूखने लगे। हालत यह है कि गुसियारी की छह हजार की आबादी एक कुएं के सहारे है। पिछले तीन साल पूर्व 4.45 करोड़ की पेयजल योजना में दो नलकूप स्थापित किए गए हैं। प्रधान असरार अहमद के अनुरोध पर इन नलकूपों को 35 वर्ष पुरानी जर्जर पाइपलाइन से जोड़कर कुछ क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति संचालित की गई है।
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वहीं इस योजना को पूरा करने के लिए अभी ढाई करोड़ रुपये की दरकार है। जल निगम के अवर अभियंता आबिद अली ने बताया पूरे बजट में ढाई करोड़ से अधिक धनराशि शासन से नहीं मिली है। पाइपलाइन विस्तार का कार्य ठप है। धन उपलब्ध होते ही किया जाएगा। अवर अभियंता ने बताया इस सबके बावजूद कुछ क्षेत्र में शीघ्र बजट आने की उम्मीद पर कुछ गलियों में पाइपलाइन विस्तार कार्य शुरू कराया है। लेकिन धनाभाव से यह कार्य गति नहीं पकड़ रहा।
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तहसील क्षेत्र में केन नदी किनारे बसे एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी का संकट दूर नहीं हो रहा है। इन गांवों के हैंडपंपों से खारा पानी निकलता है। पथरीली भूमि में पानी बहुत गहराई पर है या है ही नहीं। गुसियारी, इचौली, नायकपुरवा, कपसा, खंडेह, रतवा जैसे गांवों को पानी देने के लिए एशिया की दूसरे नंबर की एक बड़ी योजना 35 वर्ष पूर्व केन नदी से खंडेह गांव के नाम से बनी थी। जिसमें बांदा जनपद के भी 18 गांव शामिल थे। लेकिन यह योजना चल नहीं सकी।
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गांव के कुएं के भी भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से सूखने लगे। हालत यह है कि गुसियारी की छह हजार की आबादी एक कुएं के सहारे है। पिछले तीन साल पूर्व 4.45 करोड़ की पेयजल योजना में दो नलकूप स्थापित किए गए हैं। प्रधान असरार अहमद के अनुरोध पर इन नलकूपों को 35 वर्ष पुरानी जर्जर पाइपलाइन से जोड़कर कुछ क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति संचालित की गई है।
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वहीं इस योजना को पूरा करने के लिए अभी ढाई करोड़ रुपये की दरकार है। जल निगम के अवर अभियंता आबिद अली ने बताया पूरे बजट में ढाई करोड़ से अधिक धनराशि शासन से नहीं मिली है। पाइपलाइन विस्तार का कार्य ठप है। धन उपलब्ध होते ही किया जाएगा। अवर अभियंता ने बताया इस सबके बावजूद कुछ क्षेत्र में शीघ्र बजट आने की उम्मीद पर कुछ गलियों में पाइपलाइन विस्तार कार्य शुरू कराया है। लेकिन धनाभाव से यह कार्य गति नहीं पकड़ रहा।