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Hamirpur News: धूमधाम से हुई वैद्य राज मैकासुर देव की पूजा, पकवान का लगाया भोग
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फोटो 18 एचएएमपी 24- गहरौली गांव में देर रात पूजा करते ग्रामीण। संवाद
फोटो 18 एचएएमपी 24- गहरौली गांव में देर रात पूजा करते ग्रामीण। संवाद
= आज भी जीवित है वर्षों पुरानी परंपरा, पाल-यादव बिरादरी मानती है कुल देवता
संवाद न्यूज एजेंसी
गहरौली (हमीरपुर)। कस्बा एवं आसपास के गांवों में बीती देर रात वैद्य राज मैकासुर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पाल और यादव बिरादरी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और दोनों बिरादरियों के घरों में बने पकवान देवता को भोग के रूप में चढ़ाए।
बृहस्पतिवार को देर रात सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने विधिवत पूजा-अर्चना, हवन और धूप करने के बाद पकवान का भोग लगाया। देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोक मान्यता में इन्हें देवता और वैद्य राज कहा जाता है। बुंदेलखंड क्षेत्र में इन्हें रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। इनके पास जड़ी-बूटी और चिकित्सा का अपार ज्ञान था, इसी कारण इन्हें वैद्य राज कहा जाता है। मैकासुर को बुंदेलखंड में पशु-रक्षक देवता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
ईश्वर दीन यादव बताते हैं कि क्षेत्र की पाल और यादव बिरादरी इन्हें अपना कुल-देवता और रोग-निवारक देवता मानती है। मान्यता है कि इनकी पूजा से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते ग्रामीण वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
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= आज भी जीवित है वर्षों पुरानी परंपरा, पाल-यादव बिरादरी मानती है कुल देवता
संवाद न्यूज एजेंसी
गहरौली (हमीरपुर)। कस्बा एवं आसपास के गांवों में बीती देर रात वैद्य राज मैकासुर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पाल और यादव बिरादरी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और दोनों बिरादरियों के घरों में बने पकवान देवता को भोग के रूप में चढ़ाए।
बृहस्पतिवार को देर रात सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने विधिवत पूजा-अर्चना, हवन और धूप करने के बाद पकवान का भोग लगाया। देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोक मान्यता में इन्हें देवता और वैद्य राज कहा जाता है। बुंदेलखंड क्षेत्र में इन्हें रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। इनके पास जड़ी-बूटी और चिकित्सा का अपार ज्ञान था, इसी कारण इन्हें वैद्य राज कहा जाता है। मैकासुर को बुंदेलखंड में पशु-रक्षक देवता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
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ईश्वर दीन यादव बताते हैं कि क्षेत्र की पाल और यादव बिरादरी इन्हें अपना कुल-देवता और रोग-निवारक देवता मानती है। मान्यता है कि इनकी पूजा से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते ग्रामीण वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
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