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Hamirpur News: दो महिला दुग्ध उत्पादक गोकुल पुरस्कार से हुई सम्मानित
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हमीरपुर। दुग्ध उत्पादन में अच्छा कार्य करने पर शासन ने जिले की दो महिला दुग्ध उत्पादकों को लखनऊ में आयोजित समारोह में गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दोनों को 51-51 हजार का पुरस्कार दिया गया है। हालांकि लागत के सापेक्ष समितियों में आय न होने से 34 दुग्ध समितियां वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हैं। शेष 144 समितियों से प्रतिदिन करीब 800 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वहीं इनवेस्टर्स समिट के तहत तीन करोड़ के एमओयू शामिल किए गए हैं। जिससे इन समितियों को गति मिलने की उम्मीद है।
वर्ष 2020-21 में सरीला ब्लॉक के पचखुरा गांव निवासी मनोज पत्नी कृष्ण कुमार ने एक वर्ष में 7228 लीटर दुग्ध उत्पादन किया था। उन्हें लखनऊ में 10 अप्रैल को गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं, वर्ष 21-22 में कुरारा के कौतुबपुर निवासी अनीता पत्नी सुघर सिंह ने 5973 लीटर दूध उत्पादन कर पुरस्कार पाया है।
वर्ष 2011 में श्वेत क्रांति कार्यक्रम के तहत दुग्ध उत्पादन सहकारी समिति लि. की स्थापना की गई थी। स्थापना के समय जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कुल 178 समितियां इससे जुड़ी थी। समितियों से करीब पांच हजार लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन होता था। धीरे-धीरे गांव में दूध मुहैया कराने व उत्पादकों को भुगतान दिए जाने में लापरवाही बरतने से समितियों की संख्या कम होती गई। दुग्ध उत्पादन कम होने व ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण करीब 34 समितियां ठप हो गईं। मौजूदा समय में मात्र 144 समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों में करीब 500 लोगों को रोजगार मुहैया हो रहा है। जिसमें 144 सचिव व करीब 350 सक्रिय दुग्ध उत्पादक शामिल हैं।
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तीन करोड़ के एमओयू शामिल इन्वेस्टर्स समिट के तहत जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने व अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन करोड़ के एमओयू शामिल किए गए हैं। राठ क्षेत्र के जराखर गांव निवासी इनवेस्टर्स कमलेश कुमार ने तीन करोड़ के एमओयू साइन किए हैं। जो देशरानी मिल्क एंड चिलिंग सेंटर प्रा. लि. के नाम से संचालित होना है। करीब 60 फीसदी सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है। जो अगले वित्तीय वर्ष में चालू होने की उम्मीद है। इससे करीब सात हजार पशुपालकों को रोजगार प्राप्त होगा।
उप दुग्ध अधिकारी रामशरन ने बताया कि प्रतिर्स्पधा के चलते समितियों को दूध नहीं मिलता है। ट्रांसपोर्ट खर्च अधिक व आय कम होने से कुछ समितियां निष्क्रिय हैं। कहा कि इनवेस्टर्स समिट के तहत तीन करोड़ के एमओयू साइन हुए हैं। कहा कि इस चिलिंग प्लांट के चलने से करीब सात हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
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वर्ष 2020-21 में सरीला ब्लॉक के पचखुरा गांव निवासी मनोज पत्नी कृष्ण कुमार ने एक वर्ष में 7228 लीटर दुग्ध उत्पादन किया था। उन्हें लखनऊ में 10 अप्रैल को गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं, वर्ष 21-22 में कुरारा के कौतुबपुर निवासी अनीता पत्नी सुघर सिंह ने 5973 लीटर दूध उत्पादन कर पुरस्कार पाया है।
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वर्ष 2011 में श्वेत क्रांति कार्यक्रम के तहत दुग्ध उत्पादन सहकारी समिति लि. की स्थापना की गई थी। स्थापना के समय जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कुल 178 समितियां इससे जुड़ी थी। समितियों से करीब पांच हजार लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन होता था। धीरे-धीरे गांव में दूध मुहैया कराने व उत्पादकों को भुगतान दिए जाने में लापरवाही बरतने से समितियों की संख्या कम होती गई। दुग्ध उत्पादन कम होने व ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण करीब 34 समितियां ठप हो गईं। मौजूदा समय में मात्र 144 समितियां सक्रिय हैं। इन समितियों में करीब 500 लोगों को रोजगार मुहैया हो रहा है। जिसमें 144 सचिव व करीब 350 सक्रिय दुग्ध उत्पादक शामिल हैं।
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तीन करोड़ के एमओयू शामिल इन्वेस्टर्स समिट के तहत जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने व अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन करोड़ के एमओयू शामिल किए गए हैं। राठ क्षेत्र के जराखर गांव निवासी इनवेस्टर्स कमलेश कुमार ने तीन करोड़ के एमओयू साइन किए हैं। जो देशरानी मिल्क एंड चिलिंग सेंटर प्रा. लि. के नाम से संचालित होना है। करीब 60 फीसदी सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है। जो अगले वित्तीय वर्ष में चालू होने की उम्मीद है। इससे करीब सात हजार पशुपालकों को रोजगार प्राप्त होगा।
उप दुग्ध अधिकारी रामशरन ने बताया कि प्रतिर्स्पधा के चलते समितियों को दूध नहीं मिलता है। ट्रांसपोर्ट खर्च अधिक व आय कम होने से कुछ समितियां निष्क्रिय हैं। कहा कि इनवेस्टर्स समिट के तहत तीन करोड़ के एमओयू साइन हुए हैं। कहा कि इस चिलिंग प्लांट के चलने से करीब सात हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
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