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Hamirpur News: खानापूरी तक सिमटा स्वदेशी मेला, पांचवें दिन भी सुधार नहीं
Mon, 13 Oct 2025 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:59 PM IST
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फोटो 13 एचएएमपी 20- स्वदेशी मेले में लगे पंडाल पर खाली पड़ी कुर्सियां। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
हमीरपुर। शहर के चौरा देवी मैदान में लगा स्वदेशी मेला में पांचवें -दिन भी दर्शकों और खरीदारों की कमी के चलते फीका नजर आया। शाम चार बजे तक खाली कुर्सियां दर्शकों का इंतजार करती रहीं। मेले में कहीं भी स्वदेशी की झलक देखने को नहीं मिली। 24 के सापेक्ष 14 स्टॉल ही लगे मिले। इनमें चार स्टॉल स्वयं सहायता समूह के नजर आए। बाकी स्टॉल सूने पड़े थे। फास्ट फूड स्टॉल में चाइनीज डिश का बोलबाला रहा। इनमें भी ग्राहक कहीं नजर नहीं आए। हालांकि देर शाम मेले में कुछ दर्शक व ग्राहक नजर आए।
मेले का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करना और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करना है। लेकिन, उद्घाटन के अगले ही दिन से पूरा पंडाल खाली नजर आ रहा है। सुबह 11 बजे से राज आठ बजे चलने वाले मेले में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। शहर के आसपास के छोटे-मोटे कारोबारियों को बुलाकर स्टॉल लगवा दिए जाते हैं। यह कारोबारी इधर-उधर बाजारों में सामान खरीदकर मेले में बिक्री करते हैं। मेले में एक छोटी सी स्क्रीन लगा दी गई है।
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20 लाख के बजट को लगाया जा रहा ठिकाने
शासन से मेले के लिए 20 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति है। विभाग ने जैम पोर्टल के माध्यम से लक्ष्मी ट्रेडर्स फर्म को 12.95 लाख रुपये का टेंडर दिए जाने का दावा कर रहा है। इसमें 7.70 लाख रुपये का टेंट, स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तथा 5.25 लाख रुपये खानपान और अतिथि व्यवस्था पर खर्च किए जाने हैं। इस बजट को जिम्मेदार ठिकाने लगाने के लिए इधर-उधर से कारोबारियों को बुलाकर मेले को किसी तरह संचालित कराने में जुटे हैं। वहीं अब मेले का समय तीन बजे से सात बजे तक का कर दिया गया है।
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सिर्फ खर्चा निकल रहा
चादर व बेडशीट विक्रेता मोहित ने बताया कि वह झांसी से आया है। ग्राहक कम आ रहे हैं। खर्चा पानी निकल आता है। ग्राहक देखकर लौट जाते हैं।
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आज पहना दिन, अभी बोहनी नहीं हुई
मातारानी स्वयं सहायता समूह उजनेड़ी निवासी नीलम कॉस्मेटिक सामानों का स्टॉल लगाए मिलीं। बताया कि आज उनका पहला दिन है। अभी बोहनी तक नहीं हुई है।
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रोजाना एक हजार से अधिक की हो जाती बिक्री
फास्ट फूड उद्यमी विजय के स्टॉल में मोमोज, फिंगर व रोल के अलावा कोई भी स्वदेशी व्यंजन नहीं दिखा। बताया कि उसका भाई करन यहीं ठेला लगाता है। उसने उसे गांव से बुलाकर दो दिन से यहां भेजा है। रोजाना एक हजार से अधिक की बिक्री हो जाती है।
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चार दिनों में 10 हजार हुई बिक्री
साड़ी, सलवार सूट के स्टॉल में पौथिया गांव निवासी किशोर दीपक टहलते नजर आए। पूछने पर बताया कि बीते चार दिनों में करीब 10 हजार की बिक्री हुई है। ये कपड़े स्वयं बनाते हैं तो कोई जवाब नहीं दे सके।
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एक ही स्टॉल मोमोज, फिंगर, रोल व पानी पूरी का लगा है। सारे स्टॉल लगे हैं। धूप तेज होने के कारण ग्राहक व दर्शक देर से आते हैं। शाम साढ़े पांच बजे मेले में काफी चहल-पहल थी।
- रवि वर्मा, उपायुक्त उद्योग।
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मेले का उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करना और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करना है। लेकिन, उद्घाटन के अगले ही दिन से पूरा पंडाल खाली नजर आ रहा है। सुबह 11 बजे से राज आठ बजे चलने वाले मेले में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। शहर के आसपास के छोटे-मोटे कारोबारियों को बुलाकर स्टॉल लगवा दिए जाते हैं। यह कारोबारी इधर-उधर बाजारों में सामान खरीदकर मेले में बिक्री करते हैं। मेले में एक छोटी सी स्क्रीन लगा दी गई है।
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20 लाख के बजट को लगाया जा रहा ठिकाने
शासन से मेले के लिए 20 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति है। विभाग ने जैम पोर्टल के माध्यम से लक्ष्मी ट्रेडर्स फर्म को 12.95 लाख रुपये का टेंडर दिए जाने का दावा कर रहा है। इसमें 7.70 लाख रुपये का टेंट, स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तथा 5.25 लाख रुपये खानपान और अतिथि व्यवस्था पर खर्च किए जाने हैं। इस बजट को जिम्मेदार ठिकाने लगाने के लिए इधर-उधर से कारोबारियों को बुलाकर मेले को किसी तरह संचालित कराने में जुटे हैं। वहीं अब मेले का समय तीन बजे से सात बजे तक का कर दिया गया है।
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सिर्फ खर्चा निकल रहा
चादर व बेडशीट विक्रेता मोहित ने बताया कि वह झांसी से आया है। ग्राहक कम आ रहे हैं। खर्चा पानी निकल आता है। ग्राहक देखकर लौट जाते हैं।
आज पहना दिन, अभी बोहनी नहीं हुई
मातारानी स्वयं सहायता समूह उजनेड़ी निवासी नीलम कॉस्मेटिक सामानों का स्टॉल लगाए मिलीं। बताया कि आज उनका पहला दिन है। अभी बोहनी तक नहीं हुई है।
रोजाना एक हजार से अधिक की हो जाती बिक्री
फास्ट फूड उद्यमी विजय के स्टॉल में मोमोज, फिंगर व रोल के अलावा कोई भी स्वदेशी व्यंजन नहीं दिखा। बताया कि उसका भाई करन यहीं ठेला लगाता है। उसने उसे गांव से बुलाकर दो दिन से यहां भेजा है। रोजाना एक हजार से अधिक की बिक्री हो जाती है।
चार दिनों में 10 हजार हुई बिक्री
साड़ी, सलवार सूट के स्टॉल में पौथिया गांव निवासी किशोर दीपक टहलते नजर आए। पूछने पर बताया कि बीते चार दिनों में करीब 10 हजार की बिक्री हुई है। ये कपड़े स्वयं बनाते हैं तो कोई जवाब नहीं दे सके।
एक ही स्टॉल मोमोज, फिंगर, रोल व पानी पूरी का लगा है। सारे स्टॉल लगे हैं। धूप तेज होने के कारण ग्राहक व दर्शक देर से आते हैं। शाम साढ़े पांच बजे मेले में काफी चहल-पहल थी।
- रवि वर्मा, उपायुक्त उद्योग।

फोटो 13 एचएएमपी 20- स्वदेशी मेले में लगे पंडाल पर खाली पड़ी कुर्सियां। संवाद- फोटो : सांकेतिक

फोटो 13 एचएएमपी 20- स्वदेशी मेले में लगे पंडाल पर खाली पड़ी कुर्सियां। संवाद- फोटो : सांकेतिक