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Hamirpur News: सौ महिलाओं में सात गर्भ के समय मधुमेह से पीड़ित, प्रेग्नेंसी में बढ़ रहा है खतरा

Mon, 02 Feb 2026 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Mon, 02 Feb 2026 11:59 PM IST
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Seven out of 100 women suffer from diabetes during pregnancy, increasing the risk during pregnancy.
फोटो 02- एचएएमपी 01- जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर से परामर्श लेतीं गर्भवती। संवाद
हमीरपुर। गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भकालीन मधुमेह) के मामले बढ़ रहे हैं। यह एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता हैं जो मुख्य रूप से हार्मोनल परिवर्तन, खराब जीवनशैली, और कम शारीरिक गतिविधि के कारण होती है। यह स्थिति गर्भावस्था के 24-28वें सप्ताह के बीच सामने आती है। इसे सही समय पर नियंत्रित न करने से सिजेरियन प्रसव, बच्चे का वजन अधिक होना, और मां-बच्चे में भविष्य में टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
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जिला अस्पताल में सौ महिलाओं में सात ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित हैं। जिला अस्पताल की डॉ. प्रतीक्षा ने कहा कि 2024 की तुलना में 2025 में जेस्टेशनल डायबिटीज के मामले अधिक आए हैं। बताया कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को जेस्टेशनल डायबिटीज यानी गर्भकालीन मधुमेह कहते हैं। गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा ऐसे हार्मोन बनाता है जो मां के शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को कम करते हैं। इससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। जिसे हाइपर ग्लाइसेमिया कहते हैं। शिशु के जन्म के बाद यह डायबिटीज खत्म हो जाती है।
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शिशु का आकार बड़ा होने से प्रसव के दौरान होती हैं दिक्कतें

डॉ. प्रतीक्षा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नाल से निकलने वाले हार्मोन इंसुलिन का इस्तेमाल करने या बनाने की क्षमता को कम कर देते हैं। इससे प्रीटर्म बर्थ की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर महिलाओं में शिशु का आकार बड़ा हो सकता है। जिससे प्रसव के दौरान दिक्कतें हो सकती हैं। जन्म के बाद शिशु का ब्लड शुगर कम हो सकता है। शिशु को भी पीलिया और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।


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पांचवें माह के बाद हो पाती है इस रोग की जानकारी

जेस्टेशनल डायबिटीज की जानकारी प्रेग्नेंसी के दौरान तुरंत नहीं होती है। अधिकांशतः इसकी जानकारी पांचवें माह के बाद हो पाती है। डॉक्टर बताती हैं कि यह रोग दवा से कंट्रोल नहीं होती है। इसको इंसुलिन इंजेक्शन से ही कंट्रोल किया जाता है। कंट्रोल न होने पर शिशु के गर्भ में जान जाने तक का खतरा रहता है।

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यह एक तरह का मधुमेह है जो गर्भावस्था में होता है। यह तब होता है जब प्लेसेंटा से निकलने वाले हार्मोन इंसुलिन का इस्तेमाल करने या बनाने की क्षमता को कम कर देते हैं। इससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। जिन महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज होता है। उन्हें फिजीशियन के पास परामर्श के लिए भेजा जाता है।

-डॉ प्रतीक्षा- जिला महिला अस्पताल
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