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Hamirpur News: कल से रामलीला महोत्सव, दीपावली पर होगा रावण दहन
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संवाद न्यूज एजेंसी
राठ। दशहरे पर सभी जगह रावण दहन की परंपरा है लेकिन शहर में दीपावली पर रावण दहन किया जाता है। यह अनूठी परंपरा करीब 105 साल से चली आ रही है। शनिवार को शिव बरात के साथ रामलीला महोत्सव का आगाज होगा। दीपावली पर राम-रावण युद्ध मंचन के बाद 20 फिट ऊंचे रावण का अग्निबाण से दहन किया जाएगा।
श्री राठ रामलीला सांस्कृतिक समिति के मंत्री सुरेश खेवरिया बताते हैं करीब 105 साल पहले जमींदारों व व्यापारियों ने मिलकर रामलीला मेले की नींव डाली थी। यह मेला गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण है। जहां स्थानीय हिंदू-मुस्लिम मिलकर रामायण के पात्रों को पर्दे पर साकार करते थे। बताया कि उस समय नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से बारिश का पानी रामलीला मैदान होकर धमना रोड पर निकलता था। पानी सूखने में दशहरा निकल जाता था। जिस वजह से दशहरे के बाद रामलीला व दीपावली पर रावण दहन होता था।
समय के साथ बहुत कुछ बदला किन्तु पुरातन काल से चली आ रही दीपावली में रावण दहन की परंपरा अभी तक यथावत कायम है। कुछ वर्षों पहले यहां पर 20 फिट की ऊंचाई वाले लोहे के पुतले को स्थापित कर दिया गया था। जिसे प्रतिवर्ष सजा-संवारकर इसका दहन किया जाता है। बाकी पूरे वर्ष यह पुतला रामलीला मैदान में यूं ही खड़ा रहता है। समय के साथ रामलीला मेले का स्वरूप भी बदल गया। उस समय छोटे से मेले के रूप में प्रारम्भ होकर आज इसने महोत्सव का रूप ले लिया है। एक माह तक मेला लगता है साथ ही रामलीला, रास लीला व विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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28 अक्तूबर से होगा रामलीला महोत्सव का आगाज
रामलीला महोत्सव की शुरूआत 28 अक्तूबर को शिव बरात के साथ होगी। श्री गिर्राज आदर्श रामलीला मंडल वृंदावन के कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। 12 नवंबर को रावण वध के साथ रामलीला का समापन होगा। इस दौरान रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध के बाद पुतला दहन होगा। वहीं, आतिशबाजी का अद्भुद नजारा पेश किया जाएगा। 15 नवंबर से रासलीला का मंचन प्रारंभ होगा। श्री राधा रासेश्वरी आदर्श रासलीला मंडल वृंदावन धाम के कलाकार श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन करेंगे।
22 नवंबर को सुदामा चरित्र व बृज की होली के साथ रासलीला का समापन व 23 नवंबर को भजन संध्या तथा आतिशबाजी प्रदर्शन के साथ रामलीला महोत्सव का समापन होगा।
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महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम
28 अक्तूबर को शिव बरात व दो नवंबर को श्रीराम बरात का नगर भ्रमण होगा। नौ नवंबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 10 नवंबर को बुंदेली लोकगीत, 11 नवंबर को बुंदेली लोक नृत्य, 12 नवंबर को रावण वध के साथ आतिशबाजी का प्रदर्शन, 14 नवंबर को श्रीराम का राज तिलक, पुरस्कार वितरण व आतिशबाजी होगी। वहीं, 23 नवंबर को महोत्सव के समापन पर भी आतिशबाजी का प्रदर्शन होगा। मेले में विशाल झूले विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। खेल तमासे सहित जादू के शो देखने के लिए भीड़ जुटती है। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से महिलाएं मेले में खरीदारी करने पहुंचतीं हैं। मेले में प्रत्येक तरह की दुकानें व फूड स्टाल लगाए जाते हैं।
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राठ। दशहरे पर सभी जगह रावण दहन की परंपरा है लेकिन शहर में दीपावली पर रावण दहन किया जाता है। यह अनूठी परंपरा करीब 105 साल से चली आ रही है। शनिवार को शिव बरात के साथ रामलीला महोत्सव का आगाज होगा। दीपावली पर राम-रावण युद्ध मंचन के बाद 20 फिट ऊंचे रावण का अग्निबाण से दहन किया जाएगा।
श्री राठ रामलीला सांस्कृतिक समिति के मंत्री सुरेश खेवरिया बताते हैं करीब 105 साल पहले जमींदारों व व्यापारियों ने मिलकर रामलीला मेले की नींव डाली थी। यह मेला गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण है। जहां स्थानीय हिंदू-मुस्लिम मिलकर रामायण के पात्रों को पर्दे पर साकार करते थे। बताया कि उस समय नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से बारिश का पानी रामलीला मैदान होकर धमना रोड पर निकलता था। पानी सूखने में दशहरा निकल जाता था। जिस वजह से दशहरे के बाद रामलीला व दीपावली पर रावण दहन होता था।
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समय के साथ बहुत कुछ बदला किन्तु पुरातन काल से चली आ रही दीपावली में रावण दहन की परंपरा अभी तक यथावत कायम है। कुछ वर्षों पहले यहां पर 20 फिट की ऊंचाई वाले लोहे के पुतले को स्थापित कर दिया गया था। जिसे प्रतिवर्ष सजा-संवारकर इसका दहन किया जाता है। बाकी पूरे वर्ष यह पुतला रामलीला मैदान में यूं ही खड़ा रहता है। समय के साथ रामलीला मेले का स्वरूप भी बदल गया। उस समय छोटे से मेले के रूप में प्रारम्भ होकर आज इसने महोत्सव का रूप ले लिया है। एक माह तक मेला लगता है साथ ही रामलीला, रास लीला व विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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28 अक्तूबर से होगा रामलीला महोत्सव का आगाज
रामलीला महोत्सव की शुरूआत 28 अक्तूबर को शिव बरात के साथ होगी। श्री गिर्राज आदर्श रामलीला मंडल वृंदावन के कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। 12 नवंबर को रावण वध के साथ रामलीला का समापन होगा। इस दौरान रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध के बाद पुतला दहन होगा। वहीं, आतिशबाजी का अद्भुद नजारा पेश किया जाएगा। 15 नवंबर से रासलीला का मंचन प्रारंभ होगा। श्री राधा रासेश्वरी आदर्श रासलीला मंडल वृंदावन धाम के कलाकार श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन करेंगे।
22 नवंबर को सुदामा चरित्र व बृज की होली के साथ रासलीला का समापन व 23 नवंबर को भजन संध्या तथा आतिशबाजी प्रदर्शन के साथ रामलीला महोत्सव का समापन होगा।
महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रहेगी धूम
28 अक्तूबर को शिव बरात व दो नवंबर को श्रीराम बरात का नगर भ्रमण होगा। नौ नवंबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 10 नवंबर को बुंदेली लोकगीत, 11 नवंबर को बुंदेली लोक नृत्य, 12 नवंबर को रावण वध के साथ आतिशबाजी का प्रदर्शन, 14 नवंबर को श्रीराम का राज तिलक, पुरस्कार वितरण व आतिशबाजी होगी। वहीं, 23 नवंबर को महोत्सव के समापन पर भी आतिशबाजी का प्रदर्शन होगा। मेले में विशाल झूले विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। खेल तमासे सहित जादू के शो देखने के लिए भीड़ जुटती है। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र से महिलाएं मेले में खरीदारी करने पहुंचतीं हैं। मेले में प्रत्येक तरह की दुकानें व फूड स्टाल लगाए जाते हैं।