{"_id":"6aa2eff8a06f15dd7c02af15","slug":"action-against-the-in-charge-headmaster-not-implemented-hamirpur-news-c-223-1-ham1013-144866-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur News: प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई पर अमल नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur News: प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई पर अमल नहीं
विज्ञापन
हमीरपुर। सुमेरपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय कैथी कंपोजिट विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना में फर्जी उपस्थिति और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), चित्रकूटधाम मंडल बांदा ने 31 अगस्त को दोषी प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, आदेश के 10 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक संतोष कुमार देव पांडेय के 31 अगस्त के पत्र में बताया गया है कि 16 मई को निरीक्षण में विद्यालय में केवल 49 बच्चे थे। जबकि मध्याह्न भोजन पंजिका में 300 से 350 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी। निरीक्षण के समय उपस्थिति और एमडीएम पंजिका में अंकन नहीं था। प्रथम दृष्टया प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर अनियमितता की आशंका जताई गई। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी सुमेरपुर और जिला समन्वयक एमडीएम को संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए।
जांच में वित्तीय अभिलेखों और बिल-बाउचर का उचित रखरखाव नहीं मिला। 26 मई और चार जुलाई के निरीक्षण में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन न दिए जाने की बात भी सामने आई। खाद्यान्न संबंधी अभिलेख और साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके। एमडीएम पंजिका और आईवीआरएस कॉल में दर्ज बच्चों की संख्या में भी अंतर था।
विज्ञापन
वेतन रोकने के आदेश का भी उल्लंघन
तत्कालीन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक रति वर्मा ने 16 मई 2026 को वेतन रोकने का आदेश दिया था। यह आदेश प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार के लिए था। तत्कालीन बीएसए आलोक कुमार सिंह ने भी खंड शिक्षा अधिकारी को वेतन रोकने को कहा था। परंतु आदेश के बावजूद वेतन नहीं रोका गया और बीएसए व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक का स्थानांतरण हो गया। अमर उजाला में खबर छपने के बाद नवगंतुक बीएसए मुकेश खरवार ने वेतन रुकवाया।
विज्ञापन
मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक संतोष कुमार देव पांडेय के 31 अगस्त के पत्र में बताया गया है कि 16 मई को निरीक्षण में विद्यालय में केवल 49 बच्चे थे। जबकि मध्याह्न भोजन पंजिका में 300 से 350 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी। निरीक्षण के समय उपस्थिति और एमडीएम पंजिका में अंकन नहीं था। प्रथम दृष्टया प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर अनियमितता की आशंका जताई गई। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी सुमेरपुर और जिला समन्वयक एमडीएम को संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए।
विज्ञापन
जांच में वित्तीय अभिलेखों और बिल-बाउचर का उचित रखरखाव नहीं मिला। 26 मई और चार जुलाई के निरीक्षण में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन न दिए जाने की बात भी सामने आई। खाद्यान्न संबंधी अभिलेख और साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके। एमडीएम पंजिका और आईवीआरएस कॉल में दर्ज बच्चों की संख्या में भी अंतर था।
विज्ञापन
वेतन रोकने के आदेश का भी उल्लंघन
तत्कालीन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक रति वर्मा ने 16 मई 2026 को वेतन रोकने का आदेश दिया था। यह आदेश प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार के लिए था। तत्कालीन बीएसए आलोक कुमार सिंह ने भी खंड शिक्षा अधिकारी को वेतन रोकने को कहा था। परंतु आदेश के बावजूद वेतन नहीं रोका गया और बीएसए व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक का स्थानांतरण हो गया। अमर उजाला में खबर छपने के बाद नवगंतुक बीएसए मुकेश खरवार ने वेतन रुकवाया।