{"_id":"68efef7d705a7ee5af0380ad","slug":"preparation-to-light-up-the-house-and-courtyard-with-earthen-lamps-and-life-with-hard-work-hamirpur-news-c-223-1-sknp1030-131396-2025-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur News: मिट्टी के दीपक से घर आंगन और मेहनत से जिंदगी रोशन की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur News: मिट्टी के दीपक से घर आंगन और मेहनत से जिंदगी रोशन की तैयारी
Thu, 16 Oct 2025 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Thu, 16 Oct 2025 12:31 AM IST
विज्ञापन
फोटो 15 एचएएमपी 16- बनकर तैयार लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं। संवाद
हमीरपुर। दीपावली और धनतेरस नजदीक देख मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार अपनी चाक पर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। शहर के रहुनिया मोहल्ला निवासी कुम्हार परिवार के सभी सदस्य मिट्टी के दीपक और मूर्ति बनाने में व्यस्त हैं।
मोहल्ला निवासी कुम्हार छेदीलाल ने बताया कि अब तक 50 हजार दीपक तैयार कर पाए हैं। इनमें करीब 20 हजार की लागत आई है। मिट्टी कनौटा के पास नदी किनारे से लानी पड़ती है। लकड़ी खरीदकर इनको पकाना पड़ता है। इस बार मौसम सही न रहने से काम ज्यादा नहीं हो पाया है। 120 रुपये के 100 दीये बेचते हैं। दीपक के साथ मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। करीब 600 प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें इस समय रंग भरे जा रहे हैं। 50 रुपये से लेकर 400 रुपये तक की प्रतिमाएं हैं। दोनों बेटे व बच्चे इसी कार्य में लगे रहते हैं। बर्तन व दीये बेचकर ही उनका परिवार दीपावली की खुशियां मना पाता है।
दीपावली व गर्मियों में बढ़ती है मांग : कुम्हार दिनेश व उसकी मां मुन्नी देवी का कहना है कि दीपावली व गर्मी में मिट्टी के बर्तनों, दीयों, खिलौनों और घड़ा-सुराही की मांग जरूर बढ़ जाती है, लेकिन इसके बाद वे मजदूरी करके ही परिवार का पेट पालते हैं। दूर से मिट्टी लाना, महंगी लकड़ी खरीदकर दीपक पकाना जैसे खर्चों के कारण आमदनी लगातार घटती जा रही है। बाजार की चमक-दमक में मिट्टी के दीये की रोशनी धीमी पड़ती जा रही है। इस बार लगातार बारिश होने से अधिक दीये नहीं बन सके हैं। इसके चलते कानपुर के नरवल से एक लाख दीये मंगाए हैं। लोग अब दीयों का उपयोग केवल पूजन के लिए करने लगे हैं। बताते हैं कि अत्यधिक मेहनत और कम लाभ के कारण प्रजापति समाज के युवा अब अपने पुश्तैनी काम से दूर हो रहे हैं। हालांकि इस बार दीपावली में मुनाफे की थोड़ी उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहल्ला निवासी कुम्हार छेदीलाल ने बताया कि अब तक 50 हजार दीपक तैयार कर पाए हैं। इनमें करीब 20 हजार की लागत आई है। मिट्टी कनौटा के पास नदी किनारे से लानी पड़ती है। लकड़ी खरीदकर इनको पकाना पड़ता है। इस बार मौसम सही न रहने से काम ज्यादा नहीं हो पाया है। 120 रुपये के 100 दीये बेचते हैं। दीपक के साथ मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। करीब 600 प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें इस समय रंग भरे जा रहे हैं। 50 रुपये से लेकर 400 रुपये तक की प्रतिमाएं हैं। दोनों बेटे व बच्चे इसी कार्य में लगे रहते हैं। बर्तन व दीये बेचकर ही उनका परिवार दीपावली की खुशियां मना पाता है।
विज्ञापन
दीपावली व गर्मियों में बढ़ती है मांग : कुम्हार दिनेश व उसकी मां मुन्नी देवी का कहना है कि दीपावली व गर्मी में मिट्टी के बर्तनों, दीयों, खिलौनों और घड़ा-सुराही की मांग जरूर बढ़ जाती है, लेकिन इसके बाद वे मजदूरी करके ही परिवार का पेट पालते हैं। दूर से मिट्टी लाना, महंगी लकड़ी खरीदकर दीपक पकाना जैसे खर्चों के कारण आमदनी लगातार घटती जा रही है। बाजार की चमक-दमक में मिट्टी के दीये की रोशनी धीमी पड़ती जा रही है। इस बार लगातार बारिश होने से अधिक दीये नहीं बन सके हैं। इसके चलते कानपुर के नरवल से एक लाख दीये मंगाए हैं। लोग अब दीयों का उपयोग केवल पूजन के लिए करने लगे हैं। बताते हैं कि अत्यधिक मेहनत और कम लाभ के कारण प्रजापति समाज के युवा अब अपने पुश्तैनी काम से दूर हो रहे हैं। हालांकि इस बार दीपावली में मुनाफे की थोड़ी उम्मीद जगी है।

फोटो 15 एचएएमपी 16- बनकर तैयार लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाएं। संवाद
विज्ञापन