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Hamirpur News: भ्रष्टाचार की शिकायत पर ग्राम प्रधान ने साथियों संग शिकायतकर्ता को बंधक बना दी यातनाएं
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बिवांर (हमीरपुर)। थाना क्षेत्र के उमरी में विकास व मनरेगा कार्याें में धांधली की शिकायत करने वाले एनजीओ संचालक को ग्राम प्रधान ने अपने साथियों संग मिलकर बंधक बना बेरहमी से यातनाएं देकर पीटा।
पीड़ित जांच टीम के कहने पर गांव के पंचायत भवन पहुंचा था। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत 18-20 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लिया है।
सुमेरपुर निवासी लक्ष्य बुंदेलखंड एनजीओ के संचालक व आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र कुमार भारतवंशी ने थाने में तहरीर दी। बताया कि उन्होंने उमरी गांव के विकास कार्यों और मनरेगा में हुई अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी, जिसकी जांच के लिए जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई टीम के नोडल अधिकारी हिमांशु अग्रवाल के बुलाने पर वह बुधवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे उमरी गांव गए। शाम साढ़े चार बजे नोडल अधिकारी के कहने पर वह पंचायत भवन पहुंच गए। वहां ग्राम प्रधान, उसके दो भाई और लगभग 18-20 लोग आ धमके और उसे बुरी तरह से बेल्टों व डंडों से पीटा और अमानवीय व्यवहार किया। उस समय जांच टीम नहीं आई थी। आरोप लगाया कि पंचायत भवन में पीटने के बाद उसे गोशाला ले गए और वहां भी बंधक बनाकर घंटों पीटा और उसका मोबाइल व लैपटॉप भी छीन लिया, बड़ी मुश्किल के बाद देर शाम छोड़ा।
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प्रभारी थानाध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि पीड़ित एनजीओ संचालक का मेडिकल कराया गया है और आरोपियों के खिलाफ दंगा करने, हमला कर चोट पहुंचाने व बंधक बनाकर अपहरण करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया कि ग्राम प्रधान की तरफ से भी तहरीर दी गई है। जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं, उनके आदेश पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सीओ विनीता पहल का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कहना है कि किसी भी जांच के लिए शिकायतकर्ता को अवगत कराना होता है, जिसको लेकर उन्होंने जानकारी दी थी। उनको जांच स्थल जाना है या नहीं उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। उनके साथ क्या घटना हुई उन्हें बाद में जानकारी हुई है।
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एनजीओ संचालक का विवादों से रहा नाता
-एनजीओ संचालक का विवादों से पुराना नाता है। जेलर केपी चंदीला के अनुसार वह एक साल में दो बार जेल जा चुका है। बिदोखर ग्राम प्रधान व सुमेरपुर कस्बावासियों पर दबाव बना रंगदारी करने के मामले में दो बार जेल गया था। इसके अलावा एनजीओ संचालक के खिलाफ सुमेरपुर थाने में ही दो और मुकदमे दर्ज हैं। बीते दिनों प्रशासन ने भी जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर एनजीओ संचालक को इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।
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पीड़ित जांच टीम के कहने पर गांव के पंचायत भवन पहुंचा था। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान समेत 18-20 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लिया है।
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सुमेरपुर निवासी लक्ष्य बुंदेलखंड एनजीओ के संचालक व आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र कुमार भारतवंशी ने थाने में तहरीर दी। बताया कि उन्होंने उमरी गांव के विकास कार्यों और मनरेगा में हुई अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी, जिसकी जांच के लिए जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई टीम के नोडल अधिकारी हिमांशु अग्रवाल के बुलाने पर वह बुधवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे उमरी गांव गए। शाम साढ़े चार बजे नोडल अधिकारी के कहने पर वह पंचायत भवन पहुंच गए। वहां ग्राम प्रधान, उसके दो भाई और लगभग 18-20 लोग आ धमके और उसे बुरी तरह से बेल्टों व डंडों से पीटा और अमानवीय व्यवहार किया। उस समय जांच टीम नहीं आई थी। आरोप लगाया कि पंचायत भवन में पीटने के बाद उसे गोशाला ले गए और वहां भी बंधक बनाकर घंटों पीटा और उसका मोबाइल व लैपटॉप भी छीन लिया, बड़ी मुश्किल के बाद देर शाम छोड़ा।
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प्रभारी थानाध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि पीड़ित एनजीओ संचालक का मेडिकल कराया गया है और आरोपियों के खिलाफ दंगा करने, हमला कर चोट पहुंचाने व बंधक बनाकर अपहरण करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया कि ग्राम प्रधान की तरफ से भी तहरीर दी गई है। जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं, उनके आदेश पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सीओ विनीता पहल का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कहना है कि किसी भी जांच के लिए शिकायतकर्ता को अवगत कराना होता है, जिसको लेकर उन्होंने जानकारी दी थी। उनको जांच स्थल जाना है या नहीं उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। उनके साथ क्या घटना हुई उन्हें बाद में जानकारी हुई है।
एनजीओ संचालक का विवादों से रहा नाता
-एनजीओ संचालक का विवादों से पुराना नाता है। जेलर केपी चंदीला के अनुसार वह एक साल में दो बार जेल जा चुका है। बिदोखर ग्राम प्रधान व सुमेरपुर कस्बावासियों पर दबाव बना रंगदारी करने के मामले में दो बार जेल गया था। इसके अलावा एनजीओ संचालक के खिलाफ सुमेरपुर थाने में ही दो और मुकदमे दर्ज हैं। बीते दिनों प्रशासन ने भी जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर एनजीओ संचालक को इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।