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लॉकडाउन में एंबुलेंस सेवा बनी वरदान, कोरोना योद्धा से कम नहीं एंबुलेंस कर्मी
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हमीरपुर। लॉकडाउन में जहां हर कोई घरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं किसी मरीज को अस्पताल लाने या ले जाने में तकलीफ न हो, इसके लिए एंबुलेंस कर्मी दिन रात ड्यूटी पर डटे हैं। वहीं ऐसे समय जब कोई साधन नहीं है, एंबुलेंस सेवाओं में भी बढ़ोत्तरी हुई है।
एंबुलेंस सेवा के जिला प्रोग्राम मैनेजर अच्युत गुप्ता ने बताया जिले में 38 एंबुलेंस हैं। जिसमें 102 की 16, 108 की 18 और एएलएस की संख्या 4 है। मौजूदा समय में प्रतिदिन 250 कॉलें आ रही हैं। लॉकडाउन की वजह से मरीज को लाने और छोड़ने की जिम्मेदारी भी उनकी टीम पर है।
कर्मचारी कोविड-19 के प्रोटोकाल का पूरी तरह अनुपालन कर रहे हैं। एंबुलेंस सेवा के जिला समन्वयक मनीष अग्निहोत्री व कपिल वाष्णेय ने बताया कर्मचारी और इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर की टीम लोगों की सेवा के लिए युद्धस्तर पर अपनी सेवाएं दे रही है।
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कोरोना के मामले जब से आ रहे हैं। तब से काम बढ़ गया है। लेकिन हमारी कोशिश है कि किसी को भी कोई असुविधा न हो। मदद पहुंचाने के बाद गर्व का अनुभव होता है। -सरताज आलम, ईएमटी।
लोगों की मदद कर लग रहा है कि हम भी एक योद्धा हैं। आपदाओं में सेना के जवानों को मदद करते देखते थे। आज लग रहा है वही काम हम भी कर रहे हैं। -विवेक, ईएमटी।
लोगों का फोन आने के बाद जब एंबुलेंस लेकर जाते हैं और उनकी मदद करने के बाद जो खुशी मिलती है, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। -कृष्ण कुमार, एएलएस ईएमटी।
पहले तो डर लग रहा था, लेकिन साथियों को देखकर हौसला बढ़ गया। लोगों की मदद करने की जो खुशी मिल रही हैं। वह किसी भी उपलब्धि से कम नहीं है। -दीपिका उत्तम ईएमटी।
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एंबुलेंस सेवा के जिला प्रोग्राम मैनेजर अच्युत गुप्ता ने बताया जिले में 38 एंबुलेंस हैं। जिसमें 102 की 16, 108 की 18 और एएलएस की संख्या 4 है। मौजूदा समय में प्रतिदिन 250 कॉलें आ रही हैं। लॉकडाउन की वजह से मरीज को लाने और छोड़ने की जिम्मेदारी भी उनकी टीम पर है।
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कर्मचारी कोविड-19 के प्रोटोकाल का पूरी तरह अनुपालन कर रहे हैं। एंबुलेंस सेवा के जिला समन्वयक मनीष अग्निहोत्री व कपिल वाष्णेय ने बताया कर्मचारी और इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर की टीम लोगों की सेवा के लिए युद्धस्तर पर अपनी सेवाएं दे रही है।
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कोरोना के मामले जब से आ रहे हैं। तब से काम बढ़ गया है। लेकिन हमारी कोशिश है कि किसी को भी कोई असुविधा न हो। मदद पहुंचाने के बाद गर्व का अनुभव होता है। -सरताज आलम, ईएमटी।
लोगों की मदद कर लग रहा है कि हम भी एक योद्धा हैं। आपदाओं में सेना के जवानों को मदद करते देखते थे। आज लग रहा है वही काम हम भी कर रहे हैं। -विवेक, ईएमटी।
लोगों का फोन आने के बाद जब एंबुलेंस लेकर जाते हैं और उनकी मदद करने के बाद जो खुशी मिलती है, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। -कृष्ण कुमार, एएलएस ईएमटी।
पहले तो डर लग रहा था, लेकिन साथियों को देखकर हौसला बढ़ गया। लोगों की मदद करने की जो खुशी मिल रही हैं। वह किसी भी उपलब्धि से कम नहीं है। -दीपिका उत्तम ईएमटी।