फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hamirpur News ›   In an hour the night dealt weighage

सारी रात होने वाली तौलाई एक घंटे में निपटी

Mon, 20 Apr 2015 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
अमर उजाला ब्यूरो महोबा Updated Mon, 20 Apr 2015 11:27 PM IST
विज्ञापन
In an hour the night dealt weighage
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाह हुई फसलों का असर अब गल्ला मंडी में साफ दिखने लगा है। अप्रैल महीने में मंडी में जहां सैकड़ों ट्रैक्टरों की आमद होती थी  वहां फसल बर्वादी के चलते आज मंडी में सिर्फ दर्जनों ट्रैक्टर दिखाई दे रहे है। मंडी के गल्ला व्यापारी हाथ पे हाथ धरे बैठे हैं। इन दिनों में जहां मंडी में रात भर  तौलाई होती थी, वहीं फसल बर्बाद होने से सात बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। फसल चौपट होने से पल्लेदारों  को भी काम नहीं मिल पा रहा है। प्रस्तुत है सूरज साहू की एक रिपोर्ट-
विज्ञापन



 किसान और व्यापारी हुआ बर्बाद
गल्ला मंडी के दिग्गज व्यापारी जय सांई ट्रेडिंग के मालिक संदीप अग्रवाल ने बताया कि इस साल फसल चौपट होने से किसान तो बर्वाद हुआ ही है मंडी का व्यापारी भी बर्बाद हो गया। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनकी फर्म पर जहां प्रतिदिन 1500  से 2000  कुंतल के बीच किसानों का चना, मटर, मसूर, गेहूं , लाही खरीदा जाता था। आज उनकी खरीद 300 से 400 कुंतल तक रह गई है।
विज्ञापन


 मंडी की आवक 60 फीसदी घटी
गल्ला व्यापार संघ के अध्यक्ष काशी प्रसाद गुप्ता का कहना था प्रकृति ने जो मार किसानों को दी है वही व्यापारियों को दी है। मंडी में अनाज की आवक नाम मात्र की रह गई है। पिछले साल की तुलना में इस साल मंडी में किसानों की आवक  60 फीसदी तक कम हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन



ढाई एकड़ में निकला 6 कुंतल मटर
गल्ला मंडी में माल बेंचने आए धनौरी गांव के किसान जयहिंद ने बताया कि ओलावृष्टि से किसान पूरी तरह मिट्टी में  मिल गया है। प्रकृति ने  किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। सोचा था कि इस साल अच्छी फसल होगी। किसान ने बताया कि ढाई एकड़ खेत में जहां 35 कुंतल मटर निकलना चाहिए वहां मात्र 6 कुंतल मटर निकला।


 16 बीघा में निकला डेढ़ कुंतल चना
औड़ेरा गांव निवासी किसान देवसिंह ने बताया कि इस साल उसने अपने 16 बीघा खेत में चने की फसल बोई थी। बारिश और ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। किसान ने बताया कि जहां 50 कुंतल चना निकलना चाहिए वहां मात्र डेढ़ कुंतल चना निकला।



 कर्जदार का कर्जदार रह गया किसान
किसानों का माल बेंचने वाले कमीशन एजेंट रामनारायन ने बताया कि कुदरत का कहर किसानों व्यापारियों, कमीशन एजेंटों और पल्लेदारों पर कहर बनकर टूटा है। मंडी में अनाज की आवक नाम मात्र की रह गई है। एक किसान जहां सैकड़ों कुंतल माल लाखों में बेंचता था आज उसकी आमदनी हजारों में पहुंच गई। किसान कर्जदार का कर्जदार रह गया।


 आबक कम होने से एक घंटे में निपट जाती तुलाई
मंडी में किसानों क े माल की आवक कम होने से पल्लेदार भी पूरी तरह से दुखी दिखाई दे रहे थे। पल्लेदार लखनलाल, जीतेंद्र, कौशल, सीताराम, रंजीत, रत्तू आदि ने बताया कि पिछले साल 500 से 700  रुपये प्रतिदिन कमा लेते थे। अब 100 रुपये कमाना मुश्किल हो गया है। पिछले साल गल्ला व्यापारियों के यहां सारी रात किसानों के माल की तुलाई करते थे। अब एक घंटे में निपट जाती है। उन्होंने बताया कि काम न होने से सारा दिन ताश खेलने में व्यतीत हो जाता है।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed