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धूल फांक रही लाखों की सीवीसी मशीनें
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राठ सीएचसी में तालाबंद कक्ष में रखी सीवीसी मशीन
- फोटो : HAMIRPUR
राठ। बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सीएचसी में खून की जांच को छह माह पहले विभाग की ओर से भेजी गई सीवीसी मशीन धूल फांक रही है। मशीन चालू ही नहीं हो सकी। ऐसे में मरीज प्राइवेट लैबों में ढाई से तीन सौ रुपये खर्च कर जांच करा रहे हैं।
बुखार समेत विभिन्न बीमारियों में रक्त की संपूर्ण जांच (सीवीसी) जरूरी है। अभी तक सीएचसी में एचआईवी, मलेरिया, डेंगू, एचसीवी, शुगर आदि व कोरोना की जांच की जाती है। मगर रिजेंट उपलब्ध न होने पर हीमोग्लोबिन की जांच प्रभावित है। सीएचसी में लाखों रुपये खर्च कर छह माह पूर्व सीवीसी मशीन भेजी गई थी। पंद्रह दिन पूर्व इंजीनियर मशीन इंस्टाल करने आए। मगर रीजेंट न होने पर बैरंग लौट गए। जांचों के नाम पर तीन लैब टेक्नीशियन व एक सहायक की तैनाती है। जिनमें फिरोज खान फील्ड का कार्य देखते हैं। धर्मेंद्र कुमार की नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्ति है। सीएचसी के लिए बीएन नागर व उनके सहायक हरिओम यादव हैं। हरिओम की भी कोविड में ड्यूटी लगी है।
सीवीसी जांच के लिए एनसीडी लैब तैयार कर एक लैब टेक्नीशियन व दो स्टॉप नर्स की तैनाती होती है। अभी तक सीएचसी में लैब ही तैयार नहीं हुई। मजबूरी में मरीजों को सीवीसी जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। रक्त परीक्षण के लिए राठ समेत सरीला, गोहांड, मुस्करा व नौरंगा सीएचसी से मरीजों को नगर के सीएचसी में रेफर किया जाता है। जहां प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक जांचें की जातीं हैं। वहीं मातृत्व दिवस पर जांचों की संख्या पांच सौ से अधिक पहुंच जाती है। यहां एक टेक्नीशियन होने से विवाद होता है।
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एक्सरे फिल्म का रहता टोटा
कहने को तो सीएचसी में एक्सरे लैब व टेक्नीशियन की तैनाती है। मगर अक्सर एक्सरे फिल्म का टोटा रहता है। 15 दिनों से एक्सरे फिल्म का अभाव है। दुर्घटना में घायल लोगों को उनके तीमारदार स्ट्रेचर पर लादकर सीएचसी के बाहर खुली लैबों में ले जाने को मजबूर हैं। जहां डेढ़ सौ से लेकर ढाई सौ रुपये खर्च कर एक्सरे कराना मजबूरी है।
सीएचसी में सीवीसी मशीन इंस्टाल करने पंद्रह दिन पूर्व इंजीनियर आए थे। कहा अभी इंजीनियर जांच कर गए है। जल्द ही सीवीसी मशीन इंस्टाल करा दी जाएगी। -डा. जेपी साहू, अधीक्षक सीएचसी
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बुखार समेत विभिन्न बीमारियों में रक्त की संपूर्ण जांच (सीवीसी) जरूरी है। अभी तक सीएचसी में एचआईवी, मलेरिया, डेंगू, एचसीवी, शुगर आदि व कोरोना की जांच की जाती है। मगर रिजेंट उपलब्ध न होने पर हीमोग्लोबिन की जांच प्रभावित है। सीएचसी में लाखों रुपये खर्च कर छह माह पूर्व सीवीसी मशीन भेजी गई थी। पंद्रह दिन पूर्व इंजीनियर मशीन इंस्टाल करने आए। मगर रीजेंट न होने पर बैरंग लौट गए। जांचों के नाम पर तीन लैब टेक्नीशियन व एक सहायक की तैनाती है। जिनमें फिरोज खान फील्ड का कार्य देखते हैं। धर्मेंद्र कुमार की नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्ति है। सीएचसी के लिए बीएन नागर व उनके सहायक हरिओम यादव हैं। हरिओम की भी कोविड में ड्यूटी लगी है।
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सीवीसी जांच के लिए एनसीडी लैब तैयार कर एक लैब टेक्नीशियन व दो स्टॉप नर्स की तैनाती होती है। अभी तक सीएचसी में लैब ही तैयार नहीं हुई। मजबूरी में मरीजों को सीवीसी जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। रक्त परीक्षण के लिए राठ समेत सरीला, गोहांड, मुस्करा व नौरंगा सीएचसी से मरीजों को नगर के सीएचसी में रेफर किया जाता है। जहां प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक जांचें की जातीं हैं। वहीं मातृत्व दिवस पर जांचों की संख्या पांच सौ से अधिक पहुंच जाती है। यहां एक टेक्नीशियन होने से विवाद होता है।
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एक्सरे फिल्म का रहता टोटा
कहने को तो सीएचसी में एक्सरे लैब व टेक्नीशियन की तैनाती है। मगर अक्सर एक्सरे फिल्म का टोटा रहता है। 15 दिनों से एक्सरे फिल्म का अभाव है। दुर्घटना में घायल लोगों को उनके तीमारदार स्ट्रेचर पर लादकर सीएचसी के बाहर खुली लैबों में ले जाने को मजबूर हैं। जहां डेढ़ सौ से लेकर ढाई सौ रुपये खर्च कर एक्सरे कराना मजबूरी है।
सीएचसी में सीवीसी मशीन इंस्टाल करने पंद्रह दिन पूर्व इंजीनियर आए थे। कहा अभी इंजीनियर जांच कर गए है। जल्द ही सीवीसी मशीन इंस्टाल करा दी जाएगी। -डा. जेपी साहू, अधीक्षक सीएचसी

एक्स रे लैब के बाहर फिल्म न होने का चस्पा नोटिस- फोटो : HAMIRPUR