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गोवर्धन पूजा में करें गो संक्षरण का संकल्प
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हमीरपुर। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं.दिनेश दुबे के मुताबिक गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है।
उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गाय का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वेदों में मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र के अंहकार को चूर-चूर करने के लिए उनके पूजन के स्थान पर गोवर्धन की पूजा प्रारंभ करवाई थी। जिससे कुपित होकर इंद्र देव ने घनघोर जलवृष्टि की तब गोकुल में त्राहि-त्राहि मच गई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल के नर नारियों की पक्षु पक्षियों की रक्षा के लिए अपनी तर्जनी (उंगली) पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और निराश होकर इंद्र देव को वर्षा बंद करनी पड़ी। उसी दिन से गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने शुरू कराई थी।
पूजा करने की विधि: पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि इस दिन घर के आंगन में गोबर से निर्मित गोवर्धन बनाकर रोली, चावल, खीर, बताशे, गंगाजल, दूध, पान, केसर, पुष्प आदि से पूजन आरती करें। और गायों को स्नान कराकर मिष्ठान खिलाकर आरती करके आर्शीवाद प्राप्त करना चाहिए।
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गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त : सुबह 10 से 11:30 बजे तक।
दोपहर का मुहूर्त : 1:30 से 5 बजे तक गोधूल बेला में।
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भाई दूज: छह नवंबर को दोपहर 1:30 के बाद ही करें भाई का टीका
हमीरपुर। भाई दूज या यम द्वितीया 6 नवंबर को है। ज्योतिषाचार्य पं.दिनेश दुबे ने बताया कि भ्रात द्वितीया तिथि शनिवार को दोपहर 1:10 से दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। उन्होंने बताया कि बहनें अपने भाइयों को चंदन रोली से तिलक करेंगी और मिष्ठान खिला दीर्घायु की कामना करेंगी। बहन द्वारा भाई का तिलक करने से यम देवता प्रसन्न होते हैं। इसी को यम द्वितीया भी कहते हैं जो यम देव की कृपा से भाइयों की या अन्य लोग उपासना करते हैं उन्हें अकाल मृत्यु का किंचित भय नहीं रहता है।
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उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन गाय का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। वेदों में मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र के अंहकार को चूर-चूर करने के लिए उनके पूजन के स्थान पर गोवर्धन की पूजा प्रारंभ करवाई थी। जिससे कुपित होकर इंद्र देव ने घनघोर जलवृष्टि की तब गोकुल में त्राहि-त्राहि मच गई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल के नर नारियों की पक्षु पक्षियों की रक्षा के लिए अपनी तर्जनी (उंगली) पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और निराश होकर इंद्र देव को वर्षा बंद करनी पड़ी। उसी दिन से गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने शुरू कराई थी।
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पूजा करने की विधि: पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि इस दिन घर के आंगन में गोबर से निर्मित गोवर्धन बनाकर रोली, चावल, खीर, बताशे, गंगाजल, दूध, पान, केसर, पुष्प आदि से पूजन आरती करें। और गायों को स्नान कराकर मिष्ठान खिलाकर आरती करके आर्शीवाद प्राप्त करना चाहिए।
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गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त : सुबह 10 से 11:30 बजे तक।
दोपहर का मुहूर्त : 1:30 से 5 बजे तक गोधूल बेला में।
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भाई दूज: छह नवंबर को दोपहर 1:30 के बाद ही करें भाई का टीका
हमीरपुर। भाई दूज या यम द्वितीया 6 नवंबर को है। ज्योतिषाचार्य पं.दिनेश दुबे ने बताया कि भ्रात द्वितीया तिथि शनिवार को दोपहर 1:10 से दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। उन्होंने बताया कि बहनें अपने भाइयों को चंदन रोली से तिलक करेंगी और मिष्ठान खिला दीर्घायु की कामना करेंगी। बहन द्वारा भाई का तिलक करने से यम देवता प्रसन्न होते हैं। इसी को यम द्वितीया भी कहते हैं जो यम देव की कृपा से भाइयों की या अन्य लोग उपासना करते हैं उन्हें अकाल मृत्यु का किंचित भय नहीं रहता है।