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हमीरपुर: दरिंदगी की शिकार युवती के बयान न हुए तो कमजोर हो जाएगा मुकदमा
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हमीरपुर। सिटी फॉरेस्ट में दरिंदगी का शिकार युवती अगर पुलिस के सामने नहीं आई तो मुकदमा कमजोर हो जाएगा। पीड़िता के न मिलने पर आरोपियों पर लगी अन्य धाराएं खत्म हो जाएंगी। केवल वीडियो वायरल करने के आरोप में ही मुकदमा चलेगा।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अवध नरेश चंदेल ने बताया कि जिसके साथ घटना घटती है अगर उसके बयान नहीं होते हैं तो मुकदमा कमजोर हो जाता है। इस मामले में अगर पीड़िता बयान देने नहीं आएगी तो मुकदमे से अन्य धाराएं हटा दी जाएंगी। शासकीय अधिवक्ता चंद्रप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ऐसे में केवल वीडियो वायरल करने की धारा पर ही मुकदमा चलेगा।
पहली बार ऐसा वीडियो वायरल का अपराध करने पर कम से कम तीन वर्ष की सजा व पांच लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है। दूसरी बार ये अपराध करने पर पांच वर्ष की सजा व दस लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
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एसपी शुभम पटेल ने कहा कि वायरल वीडियो मुकदमे में अपने आप में सबसे बड़ा प्रमाण है। जिस मोबाइल से वीडियो बनाया गया है उसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। पीड़िता का सामने न आने से मुकदमे में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, फिर भी उसका पता लगाया जा रहा है। मारपीट, छेड़खानी व आईटी एक्ट के मुकदमे के सभी छह आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
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विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अवध नरेश चंदेल ने बताया कि जिसके साथ घटना घटती है अगर उसके बयान नहीं होते हैं तो मुकदमा कमजोर हो जाता है। इस मामले में अगर पीड़िता बयान देने नहीं आएगी तो मुकदमे से अन्य धाराएं हटा दी जाएंगी। शासकीय अधिवक्ता चंद्रप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ऐसे में केवल वीडियो वायरल करने की धारा पर ही मुकदमा चलेगा।
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पहली बार ऐसा वीडियो वायरल का अपराध करने पर कम से कम तीन वर्ष की सजा व पांच लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है। दूसरी बार ये अपराध करने पर पांच वर्ष की सजा व दस लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
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एसपी शुभम पटेल ने कहा कि वायरल वीडियो मुकदमे में अपने आप में सबसे बड़ा प्रमाण है। जिस मोबाइल से वीडियो बनाया गया है उसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। पीड़िता का सामने न आने से मुकदमे में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, फिर भी उसका पता लगाया जा रहा है। मारपीट, छेड़खानी व आईटी एक्ट के मुकदमे के सभी छह आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।