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मरीजों को देते बाहर का पर्चा
अमर उजाला हमीरपुर
Updated Sun, 31 Jan 2016 11:38 PM IST
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सदर अस्पताल में रोजाना करीब 600 पर्चे ओपीडी में बनते हैं। लेकिन इन मरीजों में दो फीसदी को भी एसआरएल डायग्नोस्टिक जांच केंद्र का लाभ नहीं मिल पाता। हाल ये है कि नि:शुल्क जांच सुविधा होने के बाद भी अधिकांश मरीजों को बाहर जांच के लिए भेज दिया जाता है। उन्हें प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच करवानी पड़ती है।
सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला पुरुष अस्पताल में एसआरएल जांच केंद्र स्थापित किया है। दो दिसंबर से अस्तपाल के ओपीडी परिसर में संचालित इस जांच केंद्र में सभी गंभीर बीमारियों की जांच नि:शुल्क की जाती है। लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर कमीशन के चक्कर में जांच के लिए बाहर भेज देते हैं।
ये सुविधा उपलब्ध
एसआरएल डायग्नोस्टिक जांच केंद्र के लैब प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि लैब में डेंगू, सुगर, लीवर, कोलस्ट्राल, टीबी प्रोफाइल, थायराइड, आरए फैक्टर गठिया, कैंसर, ट्यूमर मारकर, किडनी, हैपीटाइटिस समेत 150 जांचें नि:शुल्क की जाती हैं। ब्लड सैंपल को लखनऊ भेजा जाता है। लखनऊ, गुड़गांव और मुंबई के जांच केंद्राें से परीक्षण होने के बाद दो दिन में मरीज को ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध करा देते हैं।
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बांदा और हमीरपुर में संचालित केंद्र
एसआरएल डायग्नोस्टिक केंद्र के आईटी डिपार्टमेंट इंचार्ज अनुराग सिंह चौहान ने बताया कि जांच केंद्र के बारे में लोगों को कम जानकारी है। ये जांच केंद्र उच्च स्तरीय है। बुंदेलखंड में हमीरपुर और बांदा जिले में ही इसकी सुविधा है। सभी जांचें नि:शुल्क की जाती हैं।
एसआरएल जांच केंद्र में सभी जांचें नि:शुल्क की जा रहीं हैं। चिकित्सकों की मनमानी के मामले की जांच कराएंगे। जो भी चिकित्सक बाहर जांच के लिए लिखेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कर स्वास्थ्य निदेशालय को लिखा जाएगा।
डा.मनीराम, सीएमएस सदर अस्पताल
लोगों का दर्द
मुख्यालय निवासी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिला अस्पताल में खुले एसआरएल जांच केंद्र की जानकारी नहीं है। चिकित्सक मनमानी करते हैं। प्राइवेट पैथोलाजी में जांच कराने को कहते हैं। वह मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करेंगे।
मुख्यालय के रमेड़ी मोहल्ला निवासी मनोज निषाद ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व वह अपनी दादी को दिखाने जिला अस्पताल गया था। जहां चिकित्सक ने डेंगू की जांच प्राइवेट पैथोलाजी से कराने को कहा। बाहर से जांच कराने पर 400 रुपये देने पड़े। जबकि एसआरएल जांच केंद्र में यही जांच नि:शुल्क की जाती है। आरोप लगाया कि जिला अस्पताल के चिकित्सक मनमानी कर रहे हैं।
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सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला पुरुष अस्पताल में एसआरएल जांच केंद्र स्थापित किया है। दो दिसंबर से अस्तपाल के ओपीडी परिसर में संचालित इस जांच केंद्र में सभी गंभीर बीमारियों की जांच नि:शुल्क की जाती है। लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर कमीशन के चक्कर में जांच के लिए बाहर भेज देते हैं।
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ये सुविधा उपलब्ध
एसआरएल डायग्नोस्टिक जांच केंद्र के लैब प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि लैब में डेंगू, सुगर, लीवर, कोलस्ट्राल, टीबी प्रोफाइल, थायराइड, आरए फैक्टर गठिया, कैंसर, ट्यूमर मारकर, किडनी, हैपीटाइटिस समेत 150 जांचें नि:शुल्क की जाती हैं। ब्लड सैंपल को लखनऊ भेजा जाता है। लखनऊ, गुड़गांव और मुंबई के जांच केंद्राें से परीक्षण होने के बाद दो दिन में मरीज को ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध करा देते हैं।
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बांदा और हमीरपुर में संचालित केंद्र
एसआरएल डायग्नोस्टिक केंद्र के आईटी डिपार्टमेंट इंचार्ज अनुराग सिंह चौहान ने बताया कि जांच केंद्र के बारे में लोगों को कम जानकारी है। ये जांच केंद्र उच्च स्तरीय है। बुंदेलखंड में हमीरपुर और बांदा जिले में ही इसकी सुविधा है। सभी जांचें नि:शुल्क की जाती हैं।
एसआरएल जांच केंद्र में सभी जांचें नि:शुल्क की जा रहीं हैं। चिकित्सकों की मनमानी के मामले की जांच कराएंगे। जो भी चिकित्सक बाहर जांच के लिए लिखेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई कर स्वास्थ्य निदेशालय को लिखा जाएगा।
डा.मनीराम, सीएमएस सदर अस्पताल
लोगों का दर्द
मुख्यालय निवासी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिला अस्पताल में खुले एसआरएल जांच केंद्र की जानकारी नहीं है। चिकित्सक मनमानी करते हैं। प्राइवेट पैथोलाजी में जांच कराने को कहते हैं। वह मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करेंगे।
मुख्यालय के रमेड़ी मोहल्ला निवासी मनोज निषाद ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व वह अपनी दादी को दिखाने जिला अस्पताल गया था। जहां चिकित्सक ने डेंगू की जांच प्राइवेट पैथोलाजी से कराने को कहा। बाहर से जांच कराने पर 400 रुपये देने पड़े। जबकि एसआरएल जांच केंद्र में यही जांच नि:शुल्क की जाती है। आरोप लगाया कि जिला अस्पताल के चिकित्सक मनमानी कर रहे हैं।