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Hamirpur News: बेतवा किनारे सब्जी की बारियां डूबने से भड़कीं किसान महिलाएं

Tue, 12 May 2026 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 12:06 AM IST
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Farmer Women Outraged as Vegetable Plots Along the Betwa River Are Submerged
फोटो 11 एचएएमपी 26- कलक्ट्रेट कार्यालय के बाहर बैठी किसान महिलाएं। संवाद
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डीएम कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन, कहा पूरी मेहनत पानी में डूबी

मौदहा बांध से छोड़े गए पानी से बढ़ा बेतवा नदी का जलस्तर


संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। मौदहा बांध के गेटों की मरम्मत कराने के लिए बांध को खाली किया जा रहा है। हर रोज पानी छोड़े जाने से बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदी किनारे सब्जी की खेती करने वाले किसानों की फसलें डूब गईं। नुकसान से नाराज महिला किसान सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां पर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मुआवजे की मांग की गई। कहा कि मई माह में कभी पानी नहीं आता था।

कलक्ट्रेट पहुंची महिला किसान विमला, सोमवती, विद्यावती, सुमन, कंचना, मिथलेश और यशोदा समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि वे गर्मी के मौसम में बेतवा नदी किनारे लौकी, कद्दू, पालक, भिंडी, करेला, तरोई जैसी सब्जियों की खेती करतीं है। इसके अलावा खीरा ककड़ी खरबूजा व तरबूज की खेती करके परिवार का भरण-पोषण करती हैं। महिलाओं का का कहना था कि बिना पूर्व सूचना के बांध से पानी छोड़ दिए जाने से उनकी तैयार फसलें पूरी तरह डूब गईं और अब सड़ने लगी हैं।
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किसानों का कहना है कि उनके पास खुद की जमीन नहीं है, नदी किनारे ही खेती करके परिवार का गुजारा करते हैं। फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। महिला किसानों ने मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। इसी के साथ चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द मुआवजा नहीं दिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की कि क्षेत्रीय लेखपाल और राजस्व विभाग की टीम भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और जल्द से जल्द मुआवजा दिलाया जाए।
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किसान देवेश कुमार निषाद ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से उनकी पूरी सब्जी की फसल नष्ट हो गई। कहा कि यदि पहले सूचना मिल जाती तो इस सीजन में खेती ही नहीं करते।

महिला किसान अनीता ने कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन फसल डूबने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। आरोप लगाया कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा मिलना चाहिए।
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