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चारा न मिलने से पशुबाड़ो में बंद मवेशियों की हालत बिगड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Tue, 14 Mar 2017 11:15 PM IST
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गोहांड कस्बे के पशुबाड़े में बंद अन्ना मवेशी।
- फोटो : अमर उजाला
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कस्बे में किसानों द्वारा बनाए गए पशुबाड़ों में बंद अन्ना मवेशी पानी पीकर जिंदा हैं। चारा उपलब्ध न होने से मरने की कगार पर है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में अन्ना मवेशियों से अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए कस्बे के किसानों ने चंदा इकठ्ठा कर तीन पशुबाड़े बना रखे हैं।गांधी नगर, शास्त्री नगर व तीसरा बाड़ा
नगरपंचायत कार्यालय से सटा शमशान स्थल है। जिनमे सैकड़ों की संख्या में अन्ना मवेशाी बंद हैं। प्रत्येक पशुबाड़े में दो-दो चरवाहे लगाए गए है। प्रत्येक को चार हजार रुपये प्रति माह चंदा वसूल कर दिए जाते हैं। वहीं, बाड़ों में बंद अन्ना मवेशी बड़ी दयनीय दशा से गुजर रहे हैं। चरवाहों द्वारा सुबह 11 बजे
पशुओं को सड़क किनारे पानी पिलाकर व टहलाकर शाम चार बजे करीब पुन: बाड़े में बंद कर दिया जाता है। चरवाहे कल्लू ने बताया कि चरने की बात छोड़िए सड़क के अलावा इन्हे कहीं खडे़ होने की जगह नहीं है। कस्बे के किसान चंद्रभान सिंह का कहना है कि घर के दूध देने वाले जानवरों को तो भूसा नहीं है। इनकी
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व्यवस्था कहा से की जाए। पूर्व चेयरमैन रामकृपाल राजपूत कहते है कि फसलोें को बचाने के लिए चंदे से पशुबाड़े बनाना मजबूरी है। प्रशासन इस ओर चुप्पी साधे हैं।
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नगरपंचायत कार्यालय से सटा शमशान स्थल है। जिनमे सैकड़ों की संख्या में अन्ना मवेशाी बंद हैं। प्रत्येक पशुबाड़े में दो-दो चरवाहे लगाए गए है। प्रत्येक को चार हजार रुपये प्रति माह चंदा वसूल कर दिए जाते हैं। वहीं, बाड़ों में बंद अन्ना मवेशी बड़ी दयनीय दशा से गुजर रहे हैं। चरवाहों द्वारा सुबह 11 बजे
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पशुओं को सड़क किनारे पानी पिलाकर व टहलाकर शाम चार बजे करीब पुन: बाड़े में बंद कर दिया जाता है। चरवाहे कल्लू ने बताया कि चरने की बात छोड़िए सड़क के अलावा इन्हे कहीं खडे़ होने की जगह नहीं है। कस्बे के किसान चंद्रभान सिंह का कहना है कि घर के दूध देने वाले जानवरों को तो भूसा नहीं है। इनकी
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व्यवस्था कहा से की जाए। पूर्व चेयरमैन रामकृपाल राजपूत कहते है कि फसलोें को बचाने के लिए चंदे से पशुबाड़े बनाना मजबूरी है। प्रशासन इस ओर चुप्पी साधे हैं।