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डायलिसिस के मरीजों की उपचार से पहले फूलती हैं सांसे
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जिला अस्पताल की दूसरी मंजिल पर संचालित डायलिसिस सेंटर।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। जिला अस्पताल में गंभीर हालत में डायलिसिस कराने आने वाले मरीजों को लिफ्ट की सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में अस्पताल के मेन गेट से डायलिसिस सेंटर तक पहुंचने में मरीज के साथ उनके तीमारदार तक बेदम हो जाते हैं। जबकि मरीजों की सुविधा के लिए लिफ्ट पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
हमीरपुर का एक मात्र डायलिसिस सेंटर जिला अस्पताल में है। जो दूूसरी मंजिल पर है और करीब एक वर्ष पहले ही शुरू हुआ था। सेंटर में 60 मरीज पंजीकृत हैं। इनमें से 23 मरीज नियमित रूप से यहां डायलिसिस कराने आते हैं। जिला अस्पताल की लिफ्ट कई दशक से बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल के मेन गेट से करीब दो सौ मीटर पर दूसरी मंजिल पर स्थित डायलिसिस सेंटर तक की दूूरी तय करनी पड़ती है। तीमारदार को दूसरी मंजिल पर सेंटर में रखी व्हील चेयर वहां से उठाकर मेन गेट तक लानी पड़ती है। यहां से मरीज को व्हीलचेयर पर रोपवे से ले जाना पड़ता है। लेकिन मरीजों व तीमारदारों की इस समस्या को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
लिफ्ट से महज 10 कदम पर डायलिसिस सेंटर
जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर से लिफ्ट महज 10 कदम की दूरी पर है, लेकिन यह मेंटेन होने के बाद भी बंद है। इसी तरह अस्पताल के पीछे के दूसरे रास्ते से लिफ्ट तक की दूरी भी महज 20 कदम ही होगी। इसके बाद भी जिम्मेदार डायलिसिस कराने आने वाले मरीजों को लिफ्ट की सुविधा नहीं दे रहे हैं।
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कई बार पत्र लिख चुके, लेकिन सुनवाई नहीं
सेंटर के मैनेजर ज्ञानेंद्र गौतम ने बताया अस्पताल के मेन गेट से दूसरी मंजिल पर सेंटर तक पहुंचने में मरीज बेदम हो जाते हैं। उन्होंने कई बार सीएमएस, सीएमओ और डीएम को प्रार्थना पत्र भेजकर लिफ्ट चालू कराने की मांग की है, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
भर्ती वार्ड, एसएनसीयू व एनआरसी सेंटर भी ऊपर
जिला पुरुष अस्पताल की दूसरी मंजिल पर डायलिसिस सेंटर के अलावा, एसएनसीयू, गंभीर मरीजों को भर्ती करने का वार्ड हैं। इसके अलावा तीसरी मंजिल पर एनआरसी सेंटर है। जबकि आरटीपीसी लैब भी बनकर तैयार है। जिसका जल्द से जल्द उद्घाटन होना है।
शासन को पत्र लिखकर लिफ्ट चालू कराऊंगा
जिला महिला अस्पताल की लिफ्ट बंद होने की उन्हें जानकारी नहीं थी। आज अमर उजाला की खबर से पता चला है। यह मरीजों की सुविधा के लिए ही लगवाई गई है। वह शासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द लिफ्ट चालू कराने का प्रयास करेंगे।
डा.एके रावत, सीएमओ
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हमीरपुर का एक मात्र डायलिसिस सेंटर जिला अस्पताल में है। जो दूूसरी मंजिल पर है और करीब एक वर्ष पहले ही शुरू हुआ था। सेंटर में 60 मरीज पंजीकृत हैं। इनमें से 23 मरीज नियमित रूप से यहां डायलिसिस कराने आते हैं। जिला अस्पताल की लिफ्ट कई दशक से बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल के मेन गेट से करीब दो सौ मीटर पर दूसरी मंजिल पर स्थित डायलिसिस सेंटर तक की दूूरी तय करनी पड़ती है। तीमारदार को दूसरी मंजिल पर सेंटर में रखी व्हील चेयर वहां से उठाकर मेन गेट तक लानी पड़ती है। यहां से मरीज को व्हीलचेयर पर रोपवे से ले जाना पड़ता है। लेकिन मरीजों व तीमारदारों की इस समस्या को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
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लिफ्ट से महज 10 कदम पर डायलिसिस सेंटर
जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर से लिफ्ट महज 10 कदम की दूरी पर है, लेकिन यह मेंटेन होने के बाद भी बंद है। इसी तरह अस्पताल के पीछे के दूसरे रास्ते से लिफ्ट तक की दूरी भी महज 20 कदम ही होगी। इसके बाद भी जिम्मेदार डायलिसिस कराने आने वाले मरीजों को लिफ्ट की सुविधा नहीं दे रहे हैं।
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कई बार पत्र लिख चुके, लेकिन सुनवाई नहीं
सेंटर के मैनेजर ज्ञानेंद्र गौतम ने बताया अस्पताल के मेन गेट से दूसरी मंजिल पर सेंटर तक पहुंचने में मरीज बेदम हो जाते हैं। उन्होंने कई बार सीएमएस, सीएमओ और डीएम को प्रार्थना पत्र भेजकर लिफ्ट चालू कराने की मांग की है, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
भर्ती वार्ड, एसएनसीयू व एनआरसी सेंटर भी ऊपर
जिला पुरुष अस्पताल की दूसरी मंजिल पर डायलिसिस सेंटर के अलावा, एसएनसीयू, गंभीर मरीजों को भर्ती करने का वार्ड हैं। इसके अलावा तीसरी मंजिल पर एनआरसी सेंटर है। जबकि आरटीपीसी लैब भी बनकर तैयार है। जिसका जल्द से जल्द उद्घाटन होना है।
शासन को पत्र लिखकर लिफ्ट चालू कराऊंगा
जिला महिला अस्पताल की लिफ्ट बंद होने की उन्हें जानकारी नहीं थी। आज अमर उजाला की खबर से पता चला है। यह मरीजों की सुविधा के लिए ही लगवाई गई है। वह शासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द लिफ्ट चालू कराने का प्रयास करेंगे।
डा.एके रावत, सीएमओ