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संतान की खुशहाली के लिए महिलाओं ने की हरछठ पूजा

Sat, 28 Aug 2021 10:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 10:14 PM IST
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भरुआसुमेरपुर/गहरौली। श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती पर महिलाओं ने व्रत रहकर हरछठ देवी की पूजा की और अपने संतान की सुख-समृद्धि की कामना की। यह अनुष्ठान प्रत्येक हिंदू परिवारों में अत्यंत आस्था और विश्वास के साथ होता है।
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महिलाओं ने निर्जला व्रत रह भुने हुए धान्य चना, ज्वार, अरहर, महुआ, कांस, बेर व महुआ आदि के पत्ते एकत्र कर दीवार में हरछठ देवी का चित्र बनाकर मिट्टी और चीनी के छोटे कुल्वों में मेवा, भुना अनाज भरकर पूजा की। हरछठ देवी की कथा सुनी और संतानों की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद पूजा के प्रसाद के साथ जल ग्रहण किया। इस व्रत में हल से खेत में उत्पन्न होने वाले अनाज और गाय के दूध घी का प्रयोग करना वर्जित माना गया है तो महिलाओं ने तालाब आदि में उगने वाले पसई के चावल, मखाना, भैंस के दूध आदि से खीर बनाकर सेवन किया। शास्त्रों के अनुसार बलराम श्रीकृष्ण के बड़े भाई थे और शेषावतार थे। वह देवकी और वासुदेव की सातवीं संतान थे।
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मगर योग माया से विष्णुजी ने इन्हें रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया था। बलराम ताकतवर थे और गदा युद्ध में प्रवीण थे। दुर्योधन उनके शिष्य थे। उनका अस्त्र हल था। इसी कारण उनके जन्मदिन को हल षष्ठी के रूप में भी जाना जाता और मनाया जाता है। हलछठ मां की पूजा की जाती है। क्योंकि हलछठ माता को संतानों की रक्षा करने वाली माता भी माना जाता है। इसलिए जन्म लेने वाले शिशु की छठवें दिन छठी मनाने की परंपरा भी कायम है।
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